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Arvind Kejriwal की बरी होने पर Anna Hazare ने तोड़ी चुप्पी: “अब देश व समाज के लिए काम करें”
न्यायालय के फैसले का स्वागत करते हुए अन्ना हजारे ने कहा—न्यायपालिका सर्वोच्च, अब अरविंद केजरीवाल को स्वयं से ऊपर देश रखना चाहिए।
समाजसेवी Anna Hazare ने शुक्रवार को Arvind Kejriwal को दिल्ली आबकारी नीति मामले में कोर्ट से मिली राहत पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि न्यायपालिका सर्वोच्च है और उसका निर्णय देशहित में स्वीकार करना चाहिए। साथ ही उन्होंने केजरीवाल को यह सलाह भी दी कि अब समय है कि वे स्वयं व अपनी पार्टी से ऊपर उठकर समाज और राष्ट्र के लिए काम करें।
दिल्ली की एक अदालत ने शुक्रवार को केजरीवाल, पूर्व उपमुख्यमंत्री Manish Sisodia सहित 21 अन्य लोगों को बहुचर्चित मामले से बरी कर दिया। अदालत ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि मामले में कोई “सर्वव्यापी साज़िश” या “अपराधिक मंशा” नहीं पाई गई और जांच एजेंसी Central Bureau of Investigation (CBI) को फटकार लगाई।
केजरीवाल को मार्च 2024 में Enforcement Directorate (ED) ने गिरफ्तार किया था। बाद में उन्हें जमानत मिली और उन्होंने 155 दिन जेल में बिताए।
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अन्ना हजारे ने महाराष्ट्र के अहमदनगर ज़िले स्थित अपने गांव रालेगण सिद्धि में मीडिया से बात करते हुए कहा—
“हमारा देश न्यायव्यवस्था पर चलता है। विविधताओं से भरे इतने बड़े देश में यदि अदालतें न हों तो अराजकता फैल सकती है। इसलिए अदालत का फैसला मानना ही चाहिए।”
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि पहले उन्होंने जो भी आलोचना की थी, वह न्यायालय के किसी निर्णय से पहले की गई थी। उन्होंने कहा—
“उस वक्त आरोप हवा में थे। अब जब अदालत ने साफ कहा है कि उनकी कोई भूमिका नहीं थी, तो हमें निर्णय स्वीकार करना चाहिए।”

हजारे ने पुराने दिनों को याद करते हुए कहा कि केजरीवाल और सिसोदिया दोनों उनके “कार्यकर्ता” रहे हैं। 2011 के भ्रष्टाचार-विरोधी आंदोलन में तीनों प्रमुख चेहरे थे, जिसने देशभर में जनलोकपाल की मांग को नई ऊंचाई दी थी और तत्कालीन सरकार पर दबाव बनाया था।
बाद में Aam Aadmi Party (AAP) के गठन के साथ आंदोलन राजनीतिक मोड़ ले गया और हजारे इससे अलग हो गए। मार्च 2024 में केजरीवाल की गिरफ्तारी के बाद उन्होंने कड़ी नाराज़गी जताते हुए कहा था कि जनलोकपाल की लड़ाई लड़ने वाला व्यक्ति भ्रष्टाचार के आरोपों में घिरा हुआ है, यह दुर्भाग्यपूर्ण है।
लेकिन अब अदालत का फैसला आने के बाद हजारे ने अपने सुर नरम किए और केजरीवाल को स्पष्ट संदेश देते हुए कहा—
“देश व समाज के लिए काम करें, स्वयं या पार्टी के बारे में न सोचें।”
देश की राजनीति में यह घटनाक्रम एक बार फिर इस बहस को हवा दे रहा है कि 2011 के आंदोलन के बाद बने समीकरण और वैचारिक मतभेद समय के साथ कैसे बदलते गए। अब देखना यह होगा कि केजरीवाल अदालत से मिली इस राहत के बाद किस नई राजनीतिक दिशा की ओर आगे बढ़ते हैं।
