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कश्मीर में बड़े पैमाने पर छापेमारी: 200-300 लोकेशनों पर छूटे रेडार
Jammu and Kashmir Police ने कथित आतंक-समर्थक नेटवर्क को निशाना बनाया, दर्जनों गिरफ्तार – एक सप्ताह में 400 से अधिक सीएसो
भारत के एकजुटता के लिए संवेदनशील क्षेत्र Kashmir Valley में बुधवार को सुरक्षा बलों द्वारा एक बड़े पैमाने की कार्रवाई देखी गई। Jammu and Kashmir Police ने दक्षिण और मध्य कश्मीर के विभिन्न जिलों में कथित आतंक-समर्थक व सहयोगी नेटवर्क पर दर्जनों स्थानों पर रेड अभियान चलाया है। इस कार्रवाई में मुख्य रूप से Jamaat‑e‑Islami (JeI) नामक प्रतिबंधित संगठन के सदस्यों और उनके सहयोगियों के ठिकानों को निशाना बनाया गया है।
सूत्रों के अनुसार पुलिस ने मंगलवार देर रात और बुधवार सुबह से चल रही तलाशी-तहकीकात के तहत लगभग 200 से 300 से अधिक स्थानों पर छापेमारी की है। इनमें से अकेले दक्षिण कश्मीर के Kulgam जिले में 200 से अधिक ठिकानों को निशाना बनाया गया।
पुलिस प्रवक्ता ने कहा कि यह कार्रवाई उन खुफिया सूचनाओं के आधार पर की गई है जिनमें कहा गया था कि JeI से जुड़े लोग विभिन्न छद्म तरीकों से जमीनी स्तर पर आतंक-समर्थन नेटवर्क का पुनर्जीवन कर रहे थे।
इन छापों के दौरान डिजिटल उपकरण, साख पत्र, प्रिंट सामग्री और अन्य incriminating (संदिग्ध) सामग्री बरामद की गई है।
पुलिस ने बताया कि पिछले चार दिनों में दक्षिण कश्मीर में 400 से अधिक Cordon and Search Operations (CASO) आयोजित किए गए हैं, इन ऑपरेशनों में लगभग 500 व्यक्तियों से पूछताछ हुई है। कई लोगों को मट्टन जेल, अनंतनाग भेजा गया है, जहां उन्हें निवारक कानूनों के तहत हिरासत में रखा गया है।

यह कार्रवाई उस गंभीर सुरक्षा स्थिति की पृष्ठभूमि में आई है, जब राजधानी Delhi के लाल क़िले के पास हुए एक धमाके की जांच का दायरा कश्मीर तक फैल गया है।
विश्लेषकों का कहना है कि यह अभियान स्थानीय स्तर पर आतंक-सहयोग नेटवर्क को भंग करने का मकसद रखता है — जिसमें विचारधारा, वित्तीय सहायता, रिक्रूटमेंट और लॉजिस्टिक चैनल शामिल हैं।
हालांकि, कुछ स्थानीय संगठनों ने इस तरह की व्यापक कार्रवाई को स्वेच्छाचारी बताकर आलोचना की है और कहा है कि यह आम नागरिकों में निराशा और असुरक्षा की भावना बढ़ा सकती है।
इस बीच, कश्मीर की घाटियों में अलर्ट स्तर बढ़ा हुआ है: कई इलाकों में वाहन चेक पोस्ट बढ़ा दिए गए हैं, नाकाबंदी और सघन तलाशी अभियान चलाए जा रहे हैं।
इस ऑपरेशन के बाद सवाल उठते हैं:
- क्या यह कार्रवाई केवल जमीनी नेटवर्क तक सीमित रहेगी या इसके पीछे कोई बड़ी अंतर-राज्यीय/अंतर्राष्ट्रीय साजिश भी है?
- किस तरह से इन छापों का प्रभाव लंबे समय तक सुरक्षा-परिस्थिति पर होगा?
- विशेष रूप से उन परिवारों, मित्रों और सहयोगियों पर पड़ने वाले प्रभाव को कितने ध्यान में लिया गया है, जिन्हें सिर्फ पूछताछ के लिए बुलाया गया है?
कश्मीर में लंबे समय से चल रही घुमावदार सुरक्षा चुनौतियों के बीच यह कार्रवाई नया अध्याय जोड़ती है। यह देखना अहम होगा कि आगे क्या ठोस कानूनी कार्रवाई होगी और कितनी जल्दी स्थिरता की ओर गवाही देना संभव होगा।
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