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Ahmedabad में Rabada’s का कहर: “एक्स्ट्रा बाउंस मेरा सबसे बड़ा हथियार”
गुजरात टाइटंस की सटीक रणनीति से केकेआर की पारी लड़खड़ाई, पावरप्ले में ही मैच का रुख बदला
आईपीएल के इस सीजन में एक बार फिर गुजरात टाइटंस ने अपनी रणनीतिक समझ का लोहा मनवाया। अहमदाबाद में खेले गए मुकाबले में कोलकाता नाइट राइडर्स के खिलाफ टीम ने शुरुआत से ही ऐसा दबाव बनाया कि विपक्षी बल्लेबाज संभल ही नहीं पाए।
इस जीत के हीरो रहे तेज गेंदबाज कगिसो रबाडा, जिन्होंने तीन विकेट लेकर मैच का पासा पलट दिया। मैच के बाद रबाडा ने खुलकर बताया कि कैसे पिच की समझ और सही प्लानिंग ने उन्हें सफलता दिलाई।
रबाडा ने कहा कि भारत में पिच को समझना बेहद जरूरी होता है—कभी काली मिट्टी, कभी लाल मिट्टी, तो कभी मिश्रित सतह। अहमदाबाद की पिच देखने में तो लाल मिट्टी जैसी लगी, लेकिन उसका व्यवहार थोड़ा अलग था। नई गेंद के साथ हल्की नमी और असमान उछाल ने बल्लेबाजों को खुलकर खेलने का मौका नहीं दिया।
यही वजह रही कि टीम मैनेजमेंट ने एक अनोखा फैसला लिया—पावरप्ले के पूरे छह ओवर मोहम्मद सिराज और रबाडा से ही गेंदबाजी कराई गई। आमतौर पर टीमें इस दौरान ज्यादा गेंदबाजों को आजमाती हैं, लेकिन गुजरात ने जोखिम उठाया और यह दांव बिल्कुल सही साबित हुआ।
पावरप्ले खत्म होते-होते केकेआर का स्कोर 37/3 हो चुका था। रबाडा का मानना है कि किसी भी दिन यह रणनीति विपक्ष को पूरी तरह ढहा सकती है, लेकिन तीन विकेट भी एक मजबूत शुरुआत है।
रबाडा ने अपनी गेंदबाजी की खासियत पर बात करते हुए कहा, “मेरे करियर में एक्स्ट्रा बाउंस हमेशा मेरा साथ देता आया है।” उन्होंने बताया कि जहां सिराज जैसी गेंदबाजी स्किड करती है और लो बाउंस वाली पिचों पर खतरनाक होती है, वहीं उछाल वाली पिचें उनके लिए ज्यादा मददगार होती हैं।

इस मैच में भी कुछ ऐसा ही देखने को मिला, जहां पिच पर मौजूद उछाल और हल्की नमी ने रबाडा को बढ़त दिलाई। उन्होंने 3 विकेट लेकर अपनी फॉर्म में वापसी के संकेत भी दे दिए, क्योंकि इससे पहले सीजन में उनका इकॉनमी रेट थोड़ा ज्यादा रहा था।
मैच के बाद रबाडा ने टीम के फोकस पर भी बात की। उन्होंने साफ कहा कि टीम का पहला लक्ष्य हमेशा जीत होता है, न कि नेट रन रेट। “नेट रन रेट अपने आप बेहतर हो जाएगा, अगर आप लगातार मैच जीतते रहेंगे,” उन्होंने कहा।
उन्होंने यह भी जोड़ा कि टीम के बल्लेबाजों और गेंदबाजों के बीच भरोसा बेहद जरूरी है। “जैसे बल्लेबाज हमें गेंदबाजी सिखाने नहीं आते, वैसे ही हम उन्हें बल्लेबाजी के बारे में नहीं बताते। हर खिलाड़ी अपने रोल को समझता है।”
सीजन अभी शुरुआती दौर में है और गुजरात टाइटंस के पास सुधार के लिए कई मौके हैं। लेकिन जिस तरह से टीम ने इस मैच में प्लानिंग और एक्जीक्यूशन का मेल दिखाया, वह बाकी टीमों के लिए एक चेतावनी जरूर है।
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