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ईरान के राष्ट्रपति ने पड़ोसी देशों से मांगी माफी, लेकिन रखी यह बड़ी शर्त जानें पूरा मामला
ईरान-इज़राइल युद्ध में दुबई, कतर, बहरीन और कुवैत तक पहुंची तबाही के बाद ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान ने खेद जताया, मगर चेतावनी भी दी।
तेहरान/दुबई। मध्य-पूर्व में इन दिनों जो आग जल रही है, उसकी लपटें अब खाड़ी देशों तक पहुंच चुकी हैं। ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान ने अपने पड़ोसी देशों से माफी जरूर मांगी है — लेकिन साथ में एक कड़ी शर्त भी रख दी। उन्होंने साफ कहा कि ईरान तब तक किसी पर हमला नहीं करेगा, जब तक उस पर पहले हमला न हो। यानी माफी भी, और धमकी भी।
क्या हुआ था 28 फरवरी को?
बात तब शुरू हुई जब अमेरिका और इज़राइल ने मिलकर 28 फरवरी को ईरान पर बड़े हवाई हमले किए। इस ऑपरेशन को नाम दिया गया था — ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’। इन हमलों में राजधानी तेहरान समेत कई ईरानी शहरों को निशाना बनाया गया। सबसे बड़ा झटका तब लगा जब ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह अली खामेनेई की हत्या हो गई। उनके साथ उनकी पत्नी, बेटी, दामाद और पोती भी इन हमलों में मारे गए। पूरा ईरान सदमे में आ गया।
बदले की आग में जलता ईरान
खामेनेई की मौत के बाद ईरान ने बदला लेने की ठान ली। पिछले एक हफ्ते से ईरान लगातार इज़राइल और खाड़ी देशों में अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइलें और ड्रोन दाग रहा है। इन हमलों की चपेट में दुबई, अबू धाबी, कतर, कुवैत और बहरीन आ चुके हैं।
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दुबई में तो हालात बेहद चिंताजनक हो गए। दुनिया के सबसे व्यस्त हवाई अड्डे दुबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट के पास हुए हमले में चार लोग घायल हो गए। इतना ही नहीं, मशहूर पाम जुमेराह डेवलपमेंट और पांच सितारा बुर्ज अल अरब होटल भी इन हमलों की जद में आए। मंगलवार को ड्रोन के मलबे से दुबई स्थित अमेरिकी कांसुलेट में आग लग गई।
बहरीन और कतर भी नहीं बचे
बहरीन में ईरानी मिसाइल ने गुरुवार को एक सरकारी तेल रिफाइनरी को उड़ा दिया। कतर के रक्षा मंत्रालय ने बताया कि उनके देश पर 14 बैलिस्टिक मिसाइलें और चार ड्रोन दागे गए, जिनमें से एक अल-उदेद कतरी बेस से जा टकराया। यह बेस अमेरिकी सेना के लिए भी बेहद अहम माना जाता है।
सऊदी अरब की तेल कंपनी सऊदी अरामको पर भी हमले की खबरें आईं, हालांकि ईरान ने इससे इनकार किया है।

सऊदी अरब ने दी खुली चेतावनी
सऊदी अरब, जो दुनिया का सबसे बड़ा तेल निर्यातक देश है, ने भी ईरान को सख्त लहजे में चेतावनी दी। सऊदी रक्षा मंत्री प्रिंस खालिद बिन सलमान ने कहा कि ईरान “गलतफहमी से बचे।” उन्होंने बताया कि सऊदी अरब ने एक एयरबेस — जहां अमेरिकी सैनिक तैनात हैं — पर कई बार हमले की कोशिश नाकाम की है। इसके अलावा पूर्वी सऊदी अरब में स्थित रास तनुरा रिफाइनरी पर भी इस हफ्ते दो ड्रोन हमले हुए।
राष्ट्रपति की ‘माफी’ — असली मायने क्या हैं?
इस पूरे तनाव के बीच ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान ने पड़ोसी देशों से खेद जताया। यह एक असामान्य कदम माना जा रहा है, क्योंकि ईरान आमतौर पर इस तरह की भाषा का इस्तेमाल नहीं करता। लेकिन उनकी माफी के साथ यह शर्त भी जुड़ी थी — “जब तक हम पर हमला नहीं होगा, हम नहीं मारेंगे।”
यानी ईरान का संदेश साफ है — हम युद्ध नहीं चाहते, लेकिन पीछे भी नहीं हटेंगे।
मध्य-पूर्व के जानकार मानते हैं कि यह युद्ध अब सिर्फ इज़राइल और ईरान के बीच नहीं रहा। इसमें अमेरिका, खाड़ी देश और कई अप्रत्यक्ष ताकतें शामिल हो चुकी हैं। आने वाले दिन और भी तनावपूर्ण हो सकते हैं।
