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Russia Sanctions Bill से India पर बढ़ा 100% Tariff का खतरा, US Analyst बोले‘Modi ने वो किया जो किसी non-Western leader ने नहीं…’
US Congress से पास Lindsey O. Graham Sanctioning Russia and Iran Act अब President Donald Trump के पास है। Analyst Michael Kugelman का कहना है कि इसका असर India-US संबंधों पर गंभीर हो सकता है और India को China से ज्यादा tariff pressure का सामना करना पड़ सकता है।
Washington और New Delhi के रिश्तों के सामने एक नई चुनौती खड़ी होती दिख रही है। Russia से तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर कड़े आर्थिक कदम उठाने से जुड़ा नया अमेरिकी विधेयक Congress से पास होकर President Donald Trump के पास पहुंच गया है। इस कानून के तहत अमेरिकी राष्ट्रपति को कुछ परिस्थितियों में Russian energy के बड़े खरीदार देशों के सामान पर 100 प्रतिशत तक tariff लगाने का अधिकार मिल सकता है। हालांकि 100 प्रतिशत tariff अपने-आप लागू नहीं होगा; इसकी दर और इस्तेमाल राष्ट्रपति के फैसले पर निर्भर करेगा।
इस घटनाक्रम के बीच South Asia analyst Michael Kugelman ने आशंका जताई है कि नया Russia sanctions bill हाल के समय में India-US relations के लिए सबसे बड़े झटकों में से एक साबित हो सकता है। Kugelman ने यह भी कहा कि India पर China की तुलना में ज्यादा tariff pressure पड़ने का जोखिम है।
India और China पर क्यों टिकी नजर?
नए कानून का आधिकारिक नाम Lindsey O. Graham Sanctioning Russia and Iran Act of 2026 है। US House of Representatives ने इसे 262-159 वोट से मंजूरी दी, जबकि Senate इसे अगस्त में 86-11 से पारित कर चुका था। अब इसे कानून बनने के लिए Donald Trump की मंजूरी का इंतजार है।
इस विधेयक की सबसे अहम धाराओं में Russian oil और natural gas के बड़े खरीदार देशों पर tariff लगाने का अधिकार शामिल है। ऐसे में India और China पर खास नजर है, क्योंकि दोनों Russian crude के प्रमुख खरीदारों में शामिल हैं।
हालांकि यहां एक अहम बात यह है कि Bill में 100% tariff का प्रावधान अधिकतम सीमा के रूप में है। Donald Trump के हस्ताक्षर होते ही India पर अपने-आप 100 प्रतिशत tariff लागू नहीं हो जाएगा। आगे यह इस बात पर निर्भर करेगा कि Washington किन देशों को निशाना बनाता है, tariff की दर क्या तय होती है और waiver provisions का इस्तेमाल किया जाता है या नहीं।
Michael Kugelman ने China को लेकर क्यों जताई चिंता?
Kugelman के मुताबिक, जोखिम यह है कि Washington एक बार फिर India और China के साथ अलग-अलग तरीके से पेश आ सकता है। उन्होंने China की वैश्विक अर्थव्यवस्था पर मौजूद leverage का जिक्र करते हुए आशंका जताई कि Beijing पर वैसा दबाव डालना Washington के लिए मुश्किल हो सकता है।
यह चिंता पिछले अनुभव से भी जुड़ी है। 2025 में Russian oil खरीद को लेकर India को अतिरिक्त अमेरिकी tariff का सामना करना पड़ा था, जबकि China के साथ वैसा व्यवहार नहीं किया गया, भले ही वह Russian crude का बड़ा खरीदार था।
‘No non-Western leader…’ Modi को लेकर क्या बोले Kugelman?
इस tariff विवाद के बीच Kugelman ने Prime Minister Narendra Modi की Ukraine युद्ध को लेकर कूटनीतिक कोशिशों का भी जिक्र किया। उनका तर्क है कि किसी अन्य non-Western leader ने Russian President Vladimir Putin को युद्ध खत्म करने के लिए मनाने की उतनी कोशिश नहीं की जितनी Modi ने की है। यह Kugelman का आकलन है, न कि कोई आधिकारिक निष्कर्ष।
Modi ने Russia-Ukraine संघर्ष के दौरान कई मौकों पर dialogue और diplomacy पर जोर दिया है। उनकी चर्चित टिप्पणी—“today’s era is not of war”—भी इसी कूटनीतिक रुख का हिस्सा रही है।
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India ने साफ किया अपना रुख
इस बीच Ministry of External Affairs ने कहा है कि भारत अमेरिकी कानून से जुड़े घटनाक्रम पर नजर रख रहा है। New Delhi ने Washington को इस कानून के India-US bilateral relations और global energy markets पर पड़ने वाले संभावित प्रभावों के बारे में अपनी चिंताओं से अवगत कराया है।
भारत सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि देश के 1.4 billion लोगों की energy security उसकी प्राथमिकता बनी रहेगी और बदलती market conditions के आधार पर energy sourcing को diversify किया जाएगा। सरकार ने अपने trade और economic interests की रक्षा के लिए जरूरी कदम उठाने की बात कही है।
आगे Donald Trump के फैसले पर नजर

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि Donald Trump Bill पर कब हस्ताक्षर करते हैं और उसके बाद उनकी administration tariff provisions का इस्तेमाल किस तरह करती है।
इसलिए फिलहाल India पर 100% अमेरिकी tariff लग चुका है, ऐसा कहना सही नहीं होगा। Bill अमेरिकी राष्ट्रपति को ऐसा करने का अधिकार देता है, लेकिन वास्तविक tariff rate, targeted countries और संभावित exemptions आगे होने वाले फैसलों पर निर्भर करेंगे।
India के लिए मामला सिर्फ Russian oil तक सीमित नहीं है। इसके साथ India-US trade negotiations, energy security और Washington-New Delhi strategic relations भी जुड़े हुए हैं। आने वाले फैसले तय करेंगे कि यह कानून दोनों देशों के आर्थिक रिश्तों पर कितना असर डालता है।
