India
‘आखिरी चेतावनी’ के साथ सड़कों पर उतरेंगे लोग? Stalin का केंद्र पर हमला, Delimitation बिल पर बड़ा विरोध
तमिलनाडु में ब्लैक फ्लैग प्रोटेस्ट का ऐलान, सीट बढ़ाने के प्रस्ताव को दक्षिण के खिलाफ बताया ‘अन्याय’
देश की राजनीति में एक नया विवाद खड़ा हो गया है। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री M. K. Stalin ने केंद्र सरकार के प्रस्तावित Delimitation Amendment Bill के खिलाफ राज्यव्यापी ‘ब्लैक फ्लैग प्रोटेस्ट’ का ऐलान किया है।
उन्होंने इसे दक्षिण भारत के राज्यों के साथ “ऐतिहासिक अन्याय” बताते हुए प्रधानमंत्री Narendra Modi को “आखिरी चेतावनी” तक दे दी है।
क्या है पूरा मामला?
केंद्र सरकार संसद के विशेष सत्र में एक संवैधानिक संशोधन बिल लाने की तैयारी में है। इस प्रस्ताव के तहत लोकसभा सीटों की संख्या 543 से बढ़ाकर करीब 850 करने की योजना है।
इसमें 33% महिला आरक्षण लागू करने की बात भी शामिल है। लेकिन सीटों का बंटवारा जनसंख्या के आधार पर होगा—यही सबसे बड़ा विवाद बन गया है।
दक्षिण राज्यों की चिंता क्यों?
Stalin का आरोप है कि यह फॉर्मूला दक्षिण भारत के राज्यों के लिए नुकसानदायक होगा।
उनका कहना है कि—
- दक्षिण राज्यों ने वर्षों तक जनसंख्या नियंत्रण नीति का पालन किया
- अब उसी के कारण उनकी सीटें कम हो सकती हैं
- जबकि ज्यादा जनसंख्या वाले राज्यों को फायदा मिलेगा
उन्होंने सवाल उठाया, “क्या हमने देश की तरक्की के लिए जो किया, वही अब हमारी सजा बनेगा?”
‘तमिलनाडु उठेगा’—Stalin की चेतावनी
Stalin ने कहा कि अगर यह बिल लाया गया, तो तमिलनाडु में बड़े स्तर पर विरोध प्रदर्शन होगा। उन्होंने यहां तक कहा कि हर परिवार सड़कों पर उतर सकता है।
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उन्होंने अपने आंदोलन की तुलना DMK के ऐतिहासिक आंदोलनों से करते हुए संकेत दिया कि विरोध काफी बड़ा हो सकता है।
अन्य राज्यों ने भी उठाई आवाज
तेलंगाना के मुख्यमंत्री A. Revanth Reddy ने भी इस मुद्दे पर केंद्र सरकार की आलोचना की।
उन्होंने कहा कि इस प्रस्ताव से महिलाओं, अनुसूचित जाति और जनजाति के लोगों के साथ भी अन्याय हो सकता है।

केंद्र की स्थिति मुश्किल में
यह विवाद ऐसे समय सामने आया है जब तमिलनाडु में चुनावी माहौल भी बन रहा है। ऐसे में विपक्षी दल इस मुद्दे को ‘राज्यों के अधिकार’ और ‘संघीय ढांचे’ से जोड़कर बड़ा राजनीतिक मुद्दा बनाने की कोशिश कर रहे हैं।
आगे क्या?
संसद के विशेष सत्र में इस बिल पर चर्चा के दौरान स्थिति और स्पष्ट होगी।
अगर सरकार इस पर आगे बढ़ती है, तो दक्षिण भारत में राजनीतिक टकराव और बढ़ सकता है।
