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Akshay Kumar’s की दरियादिली से बदली Kashmir border school, की तस्वीर, पिता के नाम पर बना नया education block
जम्मू-कश्मीर के दूरदराज गुरेज़ वैली स्थित सरकारी स्कूल को अक्षय कुमार ने दिए थे 1 करोड़ रुपये, अब बच्चों को मिली आधुनिक सुविधाओं वाली नई इमारत।
बॉलीवुड अभिनेता अक्षय कुमार सिर्फ फिल्मों में ही नहीं, बल्कि असल जिंदगी में भी लोगों के दिल जीतने का काम करते रहते हैं। इस बार उनकी मदद ने जम्मू-कश्मीर के सीमावर्ती इलाके के बच्चों की पढ़ाई का भविष्य बदल दिया है।
बांदीपोरा जिले के गुरेज़ वैली स्थित गवर्नमेंट मिडिल स्कूल नीरो तुलैल को अब एक नया आधुनिक स्कूल ब्लॉक मिल गया है, जिसका निर्माण अक्षय कुमार की ओर से दिए गए 1 करोड़ रुपये के सहयोग से किया गया है। खास बात यह है कि इस नई इमारत का नाम अभिनेता के दिवंगत पिता ‘श्री हरि ओम भाटिया’ के नाम पर रखा गया है।
बॉर्डर इलाके के बच्चों को मिली नई उम्मीद
एलओसी (Line of Control) के पास बसे इस दूरदराज गांव के बच्चों को पहले सीमित संसाधनों में पढ़ाई करनी पड़ती थी। लेकिन अब स्कूल में नए क्लासरूम, कंप्यूटर लैब, लाइब्रेरी और शिक्षकों के लिए ऑफिस स्पेस जैसी आधुनिक सुविधाएं तैयार हो चुकी हैं।
स्कूल में मिड-डे मील योजना के तहत भी बेहतर व्यवस्था की गई है, जिससे बच्चों को साफ-सुथरे माहौल में भोजन मिल पा रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि नई इमारत बनने के बाद बच्चों का स्कूल आने का उत्साह भी बढ़ा है।
2021 की यात्रा बनी बदलाव की वजह
बताया जा रहा है कि अक्षय कुमार साल 2021 में बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स (BSF) के निमंत्रण पर गुरेज़ वैली पहुंचे थे। इस दौरान उन्होंने सीमा पर तैनात जवानों से मुलाकात की और तुलैल गांव के बच्चों व स्थानीय लोगों से भी बातचीत की।
इसी यात्रा के दौरान अभिनेता ने स्कूल की स्थिति देखी और बच्चों की शिक्षा के लिए मदद करने का फैसला लिया।
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जवानों के साथ भी बिताया था समय
गुरेज़ दौरे के दौरान अक्षय कुमार ने BSF जवानों के साथ समय बिताया था। सोशल मीडिया पर उनकी तस्वीरें और वीडियो भी वायरल हुए थे, जिनमें वह जवानों के साथ बातचीत करते और डांस करते नजर आए थे। उन्होंने शहीद सैनिकों को श्रद्धांजलि भी दी थी।

बाद में अभिनेता ने सोशल मीडिया पर लिखा था कि देश की सुरक्षा में तैनात जवानों के साथ समय बिताना उनके लिए बेहद भावुक और यादगार अनुभव रहा।
गांववालों ने जताई खुशी
अब जब स्कूल का नया ब्लॉक पूरी तरह तैयार हो चुका है, तो स्थानीय परिवारों और छात्रों में खुशी का माहौल है। गांववालों का कहना है कि यह सिर्फ एक नई इमारत नहीं, बल्कि बच्चों के बेहतर भविष्य की शुरुआत है।
दूरदराज और कठिन परिस्थितियों वाले इस इलाके में आधुनिक शिक्षा सुविधाएं मिलना बच्चों के सपनों को नई उड़ान देने जैसा माना जा रहा है।
