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TV को ‘Dustbin Medium’ कहकर Rohit Roy ने मचाई हलचल, एक्टर्स पर भी उठाए सवाल “ना वो Grace है, ना Dignity…”

‘स्वाभिमान’ और ‘देस में निकला होगा चांद’ जैसे लोकप्रिय टीवी शोज से पहचान बनाने वाले रोहित रॉय ने भारतीय टेलीविजन को लेकर बेहद तीखी टिप्पणी की है। अभिनेता ने TV कंटेंट की क्रिएटिविटी से लेकर कलाकारों के सार्वजनिक व्यवहार तक पर सवाल उठाए और सिनेमा को ‘posterity’ यानी लंबे समय तक याद रहने वाला माध्यम बताया।

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टीवी से अपना अभिनय करियर शुरू करने वाले रोहित रॉय ने भारतीय टेलीविजन को ‘dustbin medium’ बताते हुए कंटेंट की क्रिएटिविटी और टीवी कलाकारों की सार्वजनिक छवि पर सवाल उठाए हैं।

भारतीय टेलीविजन से अपना करियर शुरू कर पहचान बनाने वाले अभिनेता Rohit Roy ने अब इसी माध्यम को लेकर ऐसा बयान दिया है, जो मनोरंजन जगत में बहस छेड़ सकता है। रोहित ने टेलीविजन को ‘dustbin medium’ बताते हुए कहा कि आज देखा गया टीवी कंटेंट कई बार कल के अखबार की तरह अगले दिन भुला दिया जाता है।

Kindle Cast यूट्यूब चैनल को दिए इंटरव्यू में रोहित ने सिर्फ टीवी कंटेंट पर ही सवाल नहीं उठाए, बल्कि टेलीविजन कलाकारों के व्यवहार, कपड़ों और सार्वजनिक छवि को लेकर भी अपनी राय रखी।

‘आज देखते हैं, कल भूल जाते हैं’

रोहित से पूछा गया था कि क्या टेलीविजन इंडस्ट्री पहले से ज्यादा प्रोफेशनल तो हो गई है, लेकिन कला और क्राफ्ट के प्रति उसका समर्पण कम हुआ है?

इस पर अभिनेता ने स्वीकार किया कि ऐसी बात कहते समय उन्हें कभी-कभी लगता है कि कहीं वह ‘ungrateful’ न लगें। इसके बावजूद उन्होंने कहा, “Television is a dustbin medium.”

अपनी बात समझाते हुए रोहित ने टीवी की तुलना पुराने अखबार से की। उनके मुताबिक दर्शक किसी चीज को आज देखते हैं, लेकिन अगले दिन उसे भूल जाते हैं।

रोहित ने भारतीय टेलीविजन में बन रहे भारी मात्रा के कंटेंट पर भी सवाल उठाया। उनका कहना था कि एक ही तरह का कंटेंट बार-बार बनाया जा रहा है और इसमें क्रिएटिविटी बेहद कम दिखाई देती है।

अपने ही मशहूर शो ‘Swabhimaan’ का दिया उदाहरण

रोहित रॉय ने अपने करियर की शुरुआत टेलीविजन से की थी। उन्हें खास पहचान स्वाभिमान से मिली, जो 1990 के दशक में प्रसारित हुआ था।

इसके बाद वह देस में निकला होगा चांद जैसे लोकप्रिय शो का भी हिस्सा बने।

रोहित का कहना है कि ‘स्वाभिमान’ आज भी लोगों को याद है, लेकिन उन्होंने खुद ऐसे कई टीवी कार्यक्रमों में काम किया है जिन्हें समय बीतने के साथ दर्शक भूल चुके हैं।

यहीं से उन्होंने टीवी और फिल्मों के बीच सबसे बड़ा फर्क बताते हुए कहा कि “Cinema is for posterity”—यानी उनके मुताबिक फिल्मों में किया गया काम लंबे समय तक मौजूद रहता है और आने वाली पीढ़ियों तक पहुंच सकता है।

TV Actors में Film Stars जैसी ‘Carriage’ नहीं?

रोहित का बयान केवल टीवी कंटेंट तक सीमित नहीं रहा। उन्होंने टेलीविजन और फिल्म कलाकारों की सार्वजनिक छवि की तुलना करते हुए भी तीखी टिप्पणी की।

उन्होंने कहा, “Quite honestly, television actors don’t have the carriage that film actors have.”

रोहित के मुताबिक फिल्म स्टार्स सार्वजनिक जगहों पर खुद को ज्यादा graceful, dignified, stylish और cool तरीके से पेश करते हैं।

उनका मानना है कि एक कलाकार को सार्वजनिक जगहों पर अपने व्यवहार और व्यक्तित्व में एक निश्चित स्तर की गरिमा बनाए रखनी चाहिए।

‘Paparazzi देखकर कुछ भी नहीं कर सकते’

रोहित ने टीवी कलाकारों के इवेंट्स में व्यवहार और पहनावे को लेकर भी नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि सिर्फ इसलिए कि सामने paparazzi मौजूद हैं, किसी कलाकार को जरूरत से ज्यादा प्रतिक्रिया देना या बेवजह बयान देना ठीक नहीं है।

उन्होंने कहा, “आपको खुद को एक निश्चित grace और dignity के साथ पेश करना चाहिए।”

इसी दौरान रोहित ने बिना नाम लिए एक टीवी स्टार के पहनावे की भी आलोचना की। उनकी टिप्पणी से साफ था कि वह मानते हैं कि सेलिब्रिटी की सार्वजनिक छवि बनाने में सिर्फ उसका काम ही नहीं, बल्कि उसका व्यवहार और प्रस्तुति भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

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हालांकि कलाकारों के कपड़ों और सार्वजनिक व्यवहार को लेकर रोहित की यह राय व्यक्तिगत दृष्टिकोण है और इस पर अलग-अलग मत होना स्वाभाविक है।

क्या Rohit Roy ने मान ली TV और Bollywood की ‘Hierarchy’?

बातचीत के दौरान होस्ट ने रोहित से सवाल किया कि क्या उन्होंने खुद उस hierarchy को स्वीकार कर लिया है, जिसमें बॉलीवुड कलाकारों को टेलीविजन कलाकारों से ऊपर देखा जाता है।

लेकिन रोहित अपनी बात पर कायम रहे।

उन्होंने एक बार फिर सिनेमा को लंबे समय तक टिकने वाला माध्यम बताते हुए टेलीविजन के लिए ‘dustbin medium’ शब्द का इस्तेमाल किया।

उन्होंने दोनों माध्यमों के बीच अंतर समझाने के लिए क्रिकेट का उदाहरण भी दिया। रोहित ने इसकी तुलना भारत के लिए अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट खेलने और रणजी ट्रॉफी खेलने के अंतर से की।

उनकी इस तुलना से यह साफ हुआ कि वह सिनेमा और टेलीविजन को एक समान स्तर का माध्यम नहीं मानते।

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दिलचस्प इसलिए भी है बयान क्योंकि TV ने ही दिलाई पहचान

रोहित की टिप्पणियां इसलिए ज्यादा ध्यान खींचती हैं क्योंकि उनका अपना करियर टेलीविजन से ही शुरू हुआ और छोटे पर्दे ने उन्हें घर-घर पहचान दिलाने में बड़ी भूमिका निभाई।

बाद में उन्होंने फिल्मों की ओर रुख किया और शूटआउट एट लोखंडवाला तथा फैशन जैसी फिल्मों में काम किया।

यही वजह है कि उन्होंने इंटरव्यू में खुद भी इस बात का जिक्र किया कि टीवी को लेकर ऐसी राय जाहिर करते समय उन्हें ‘ungrateful’ समझे जाने का डर रहता है।

इसके बावजूद अभिनेता का तर्क है कि उनकी आलोचना उस माध्यम से मिली पहचान को नकारने के बजाय आज के भारतीय टेलीविजन में कंटेंट की प्रकृति और उसकी यादगार क्षमता को लेकर है।

आखिरी बार ‘Controll’ में आए थे नजर

वर्क फ्रंट की बात करें तो रोहित रॉय को पिछली बार 2025 की क्राइम थ्रिलर ‘Controll’ में देखा गया था।

इस प्रोजेक्ट में उनके साथ ठाकुर अनूप सिंह, प्रिया आनंद और डेंजिल स्मिथ जैसे कलाकार प्रमुख भूमिकाओं में नजर आए थे।

फिलहाल रोहित के ‘dustbin medium’ वाले बयान ने एक पुरानी बहस को फिर हवा दे दी है क्या फिल्मों और टेलीविजन के कलाकारों के बीच वास्तव में कोई स्वाभाविक hierarchy है, या दोनों सिर्फ अलग-अलग दर्शकों और अलग storytelling formats के लिए काम करने वाले माध्यम हैं?

रोहित की राय भले ही स्पष्ट हो, लेकिन जिस टेलीविजन ने दशकों से भारत में कई कलाकारों को घर-घर पहचान दिलाई है, उसे ‘dustbin medium’ कहना निश्चित रूप से हर किसी को स्वीकार नहीं होगा।

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