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Israel-Iran तनाव से उछले तेल के दाम, लेकिन Trump के Ceasefire दावे ने पलट दी बाज़ी
Middle East में बढ़ते संघर्ष के बीच कच्चे तेल की कीमतों में आई तेजी, लेकिन Donald Trump के युद्धविराम दावे के बाद बाजार में राहत का माहौल दिखा।
Middle East में जारी तनाव का असर अब वैश्विक बाजारों पर भी साफ दिखाई देने लगा है। Israel और Iran के बीच बढ़ते टकराव ने अंतरराष्ट्रीय निवेशकों की चिंता बढ़ा दी, जिसके चलते कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में अचानक उछाल देखने को मिला।
विशेषज्ञों का मानना है कि जब भी Middle East में अस्थिरता बढ़ती है, तो ऊर्जा बाजार सबसे पहले प्रभावित होते हैं। यही वजह रही कि संघर्ष की खबरों के बीच तेल की कीमतें तेजी से ऊपर चली गईं। निवेशकों को डर था कि यदि हालात और बिगड़े तो वैश्विक तेल आपूर्ति प्रभावित हो सकती है।
हालांकि बाजार का रुख अचानक तब बदल गया जब Donald Trump ने दावा किया कि दोनों पक्ष तत्काल ceasefire चाहते हैं और इस दिशा में बातचीत जारी है। ट्रंप के इस बयान के बाद तेल बाजार में तेजी का दौर थम गया और कीमतों में नरमी देखने को मिली।
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बाजार विश्लेषकों के अनुसार, युद्ध या सैन्य तनाव की स्थिति में निवेशक अक्सर सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर रुख करते हैं। लेकिन जब शांति वार्ता या युद्धविराम की संभावना सामने आती है, तो बाजार में भरोसा लौटने लगता है। यही कारण रहा कि ट्रंप के बयान ने निवेशकों की चिंताओं को कुछ हद तक कम कर दिया।

इस पूरे घटनाक्रम पर दुनिया भर की निगाहें टिकी हुई हैं। यदि वास्तव में ceasefire लागू होता है, तो न केवल क्षेत्रीय तनाव कम हो सकता है बल्कि वैश्विक ऊर्जा बाजारों को भी राहत मिल सकती है। वहीं अगर बातचीत विफल रहती है, तो तेल की कीमतों में फिर से तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।
भारत जैसे तेल आयातक देशों के लिए भी यह स्थिति बेहद महत्वपूर्ण है। कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी का सीधा असर पेट्रोल, डीजल और परिवहन लागत पर पड़ता है। इसलिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में हो रहे हर बदलाव पर सरकारों और उद्योग जगत की नजर बनी हुई है।
फिलहाल निवेशक और वैश्विक बाजार Middle East से आने वाले अगले घटनाक्रम का इंतजार कर रहे हैं। आने वाले दिनों में यह साफ होगा कि क्षेत्र शांति की ओर बढ़ता है या फिर तनाव का नया दौर शुरू होता है।
