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Stock Market Crash: Sensex 500 अंक से ज्यादा टूटा, Nifty भी फिसला! जानिए आज बाजार में बिकवाली की 3 बड़ी वजह
US-Iran तनाव, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और ग्लोबल टेक शेयरों में गिरावट ने निवेशकों का भरोसा डगमगाया। जानिए आगे बाजार की चाल किन बातों पर निर्भर करेगी।
भारतीय शेयर बाजार में बुधवार को तेज बिकवाली देखने को मिली। कारोबार के दौरान Sensex 500 अंकों से ज्यादा टूट गया, जबकि Nifty 24,250 के नीचे फिसल गया। पिछले कुछ हफ्तों की तेजी के बाद आई इस गिरावट ने निवेशकों को एक बार फिर सतर्क कर दिया है।
विश्लेषकों का मानना है कि इस बार बाजार पर केवल घरेलू नहीं, बल्कि वैश्विक घटनाओं का भी बड़ा असर देखने को मिल रहा है। आइए जानते हैं कि आखिर आज शेयर बाजार में इतनी बड़ी गिरावट क्यों आई।
1. US-Iran तनाव बढ़ने से महंगा हुआ कच्चा तेल
बाजार में गिरावट की सबसे बड़ी वजह US और Iran के बीच बढ़ता तनाव माना जा रहा है। ताजा घटनाक्रम के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में Brent Crude Oil की कीमत 76 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गई।
भारत अपनी जरूरत का अधिकांश कच्चा तेल विदेशों से आयात करता है। ऐसे में तेल महंगा होने का सीधा असर देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ता है। इससे आयात बिल बढ़ सकता है, महंगाई पर दबाव बन सकता है और कई कंपनियों की लागत भी बढ़ सकती है। यही कारण है कि बाजार खुलते ही ऑटो, एविएशन और कंज्यूमर सेक्टर के कई शेयरों में दबाव देखने को मिला।
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2. Global Tech Stocks में बिकवाली का असर
अमेरिकी शेयर बाजार में टेक कंपनियों के शेयरों में आई कमजोरी का असर भारतीय बाजार पर भी पड़ा।
Wall Street के प्रमुख इंडेक्स गिरावट के साथ बंद हुए, जिसमें Nasdaq सबसे ज्यादा दबाव में रहा। AI और सेमीकंडक्टर कंपनियों के शेयरों में मुनाफावसूली के चलते निवेशकों का रुझान कमजोर हुआ। इसका असर एशियाई बाजारों के साथ भारतीय आईटी और टेक शेयरों पर भी देखने को मिला।
3. AI सेक्टर को लेकर बढ़ी चिंता
हाल ही में AI से जुड़ी कंपनियों में जबरदस्त तेजी देखने को मिली थी, लेकिन अब निवेशक इस बात पर सवाल उठा रहे हैं कि क्या यह तेजी लंबे समय तक बनी रहेगी।
Samsung के मजबूत नतीजों के बावजूद उसके शेयरों में गिरावट आई। वहीं AI चिप्स से जुड़ी खबरों और चीन की AI कंपनी DeepSeek द्वारा अपना चिप विकसित करने की योजना ने भी सेमीकंडक्टर सेक्टर को लेकर नई चिंताएं पैदा कर दी हैं। इससे वैश्विक टेक शेयरों में दबाव बढ़ा और उसका असर भारतीय बाजार पर भी दिखाई दिया।

फिर भी भारत के लिए एक अच्छी खबर
आज की गिरावट के बीच एक सकारात्मक संकेत भी सामने आया है। विदेशी संस्थागत निवेशक (FII) पिछले कुछ कारोबारी सत्रों से भारतीय बाजार में लगातार खरीदारी कर रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि दक्षिण कोरिया और ताइवान जैसे बाजारों में बढ़ती अनिश्चितता के बीच भारत निवेशकों के लिए अपेक्षाकृत स्थिर विकल्प बनकर उभर रहा है। हालांकि यदि मध्य पूर्व में तनाव और बढ़ता है या कच्चे तेल की कीमतें लगातार ऊपर जाती हैं, तो विदेशी निवेश का रुख बदल भी सकता है।
निवेशकों को अब किन बातों पर रखनी होगी नजर?
आने वाले दिनों में बाजार की दिशा तीन प्रमुख कारकों पर निर्भर करेगी।
- US-Iran तनाव आगे कितना बढ़ता है।
- Brent Crude Oil की कीमतें किस दिशा में जाती हैं।
- June Quarter Results में कंपनियों का प्रदर्शन कैसा रहता है।
अगर इन तीनों मोर्चों पर सकारात्मक संकेत मिलते हैं, तो बाजार में फिर से मजबूती लौट सकती है। वहीं नकारात्मक घटनाक्रम जारी रहने पर उतार-चढ़ाव और बढ़ सकता है।
