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फाइनल में चूके पहलवान ललित, गोल्ड से रह गए दूर लेकिन सिल्वर ने जगाई नई उम्मीद
एशियन चैंपियनशिप में 55 किग्रा वर्ग में भारत के ललित को मिला रजत पदक, कोच बोले—“हार नहीं, सीख है ये”
भारतीय कुश्ती के उभरते सितारे ललित ने एशियन चैंपियनशिप में शानदार प्रदर्शन करते हुए रजत पदक तो अपने नाम कर लिया, लेकिन फाइनल में गोल्ड से चूक गए। किर्गिस्तान में आयोजित इस टूर्नामेंट के 55 किलोग्राम ग्रीको-रोमन वर्ग के फाइनल मुकाबले में ललित को उज़्बेकिस्तान के अनुभवी पहलवान इख्तियोर बोटिरोव के खिलाफ 0-9 से हार का सामना करना पड़ा।
23 वर्षीय ललित के लिए यह मुकाबला आसान नहीं था। फाइनल में दबाव साफ दिखाई दिया और अनुभवी विरोधी के सामने वह अपनी लय नहीं पकड़ सके। हालांकि, यह उनके करियर का पहला सीनियर अंतरराष्ट्रीय पदक है, जो अपने आप में बड़ी उपलब्धि है।
पानीपत के इस युवा पहलवान ने फाइनल से पहले सेमीफाइनल में चीन के दिग्गज और वर्ल्ड नंबर-4 खिलाड़ी हुयोइंग शी को हराकर सबको चौंका दिया था। यह जीत उनके आत्मविश्वास और तकनीकी क्षमता का बड़ा उदाहरण थी।
ललित के कोच कुलदीप सिंह का मानना है कि यह हार एक सीख है, न कि निराशा। उन्होंने कहा, “फाइनल जैसे बड़े मुकाबलों में अनुभव बहुत मायने रखता है। ललित तकनीकी रूप से मजबूत हैं, लेकिन उन्हें अपनी ताकत (पावर) पर और काम करना होगा। अगर उन्हें एशियाई स्तर पर लगातार जीत हासिल करनी है, तो यह सुधार जरूरी है।”

रायपुर स्पोर्ट्स अखाड़ा में प्रशिक्षण लेने वाले ललित ने अपने सफर में कई उतार-चढ़ाव देखे हैं। लेकिन इस बार उन्होंने यह साबित कर दिया कि वह बड़े मंच पर खुद को साबित करने का दम रखते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रदर्शन के बाद ललित का आत्मविश्वास और बढ़ेगा और आने वाले टूर्नामेंट्स में वह और बेहतर प्रदर्शन कर सकते हैं। भारत को भी उनसे भविष्य में गोल्ड की उम्मीदें होंगी।
कुल मिलाकर, भले ही गोल्ड मेडल हाथ से निकल गया हो, लेकिन ललित का यह सिल्वर भारतीय कुश्ती के लिए एक सकारात्मक संकेत है।
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