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बैसाखी पर बड़ी पहल: Pakistan ने 2,800 Indian श्रद्धालुओं को दिया वीजा, तनाव के बाद नई उम्मीद
पहलगाम हमले और ऑपरेशन सिंदूर के बाद पहली धार्मिक यात्रा—10 अप्रैल से शुरू होगा पवित्र बैसाखी तीर्थ
भारत और पाकिस्तान के बीच लंबे समय से चले आ रहे तनाव के बीच एक सकारात्मक खबर सामने आई है। इस साल बैसाखी के पावन अवसर पर पाकिस्तान ने करीब 2,800 भारतीय श्रद्धालुओं को वीजा जारी किया है, ताकि वे वहां आयोजित होने वाली बैसाखी तीर्थ यात्रा में शामिल हो सकें।
यह यात्रा 10 अप्रैल से शुरू होकर 19 अप्रैल 2026 तक चलेगी और इसमें भारत से बड़ी संख्या में श्रद्धालु ऐतिहासिक गुरुद्वारों के दर्शन करने पहुंचेंगे।
पहली यात्रा, खास मायने
इस बार की बैसाखी यात्रा कई मायनों में खास है। यह पहली धार्मिक यात्रा है जो पहलगाम आतंकी हमला और उसके बाद हुए ऑपरेशन सिंदूर के बाद आयोजित की जा रही है।
ऐसे माहौल में पाकिस्तान द्वारा वीजा जारी करना दोनों देशों के बीच धार्मिक और सांस्कृतिक रिश्तों को बनाए रखने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।
पाकिस्तान हाई कमीशन का बयान
पाकिस्तान उच्चायोग ने एक आधिकारिक बयान में कहा कि बैसाखी के अवसर पर 2,800 से अधिक भारतीय श्रद्धालुओं को वीजा जारी किए गए हैं, ताकि वे इस वार्षिक धार्मिक उत्सव में भाग ले सकें।
यह पहल सिख समुदाय के लिए खास महत्व रखती है, क्योंकि बैसाखी उनके सबसे बड़े त्योहारों में से एक है।

पिछले साल से कम संख्या
हालांकि इस साल वीजा की संख्या पिछले साल की तुलना में कम है। वर्ष 2025 में करीब 6,500 भारतीय श्रद्धालुओं को पाकिस्तान जाने का मौका मिला था।
इसके अलावा नवंबर 2025 में गुरु नानक देव की जयंती पर भी पाकिस्तान ने 2,100 से अधिक वीजा जारी किए थे।
श्रद्धालुओं में उत्साह
वीजा मिलने के बाद श्रद्धालुओं में खासा उत्साह देखा जा रहा है। कई लोगों के लिए यह यात्रा सिर्फ धार्मिक नहीं, बल्कि भावनात्मक भी होती है, क्योंकि वे अपने पवित्र स्थलों के दर्शन कर पाते हैं।
बैसाखी के दौरान श्रद्धालु पाकिस्तान में स्थित प्रमुख गुरुद्वारों में मत्था टेकेंगे और धार्मिक कार्यक्रमों में हिस्सा लेंगे।
उम्मीद की किरण
भारत-पाकिस्तान संबंधों में भले ही राजनीतिक और सुरक्षा मुद्दों को लेकर तनाव बना रहता हो, लेकिन इस तरह की धार्मिक यात्राएं दोनों देशों के बीच लोगों को जोड़ने का काम करती हैं।
बैसाखी पर जारी किए गए ये वीजा एक बार फिर यह संदेश देते हैं कि आस्था और संस्कृति की कोई सीमा नहीं होती।
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