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पश्चिम एशिया युद्ध का असर: हवाई ईंधन महंगा, फिर भी घरेलू यात्रियों को मिली राहत!

ATF कीमतों में भारी उछाल के बावजूद सरकार ने घरेलू फ्लाइट्स के किराए पर डाला ब्रेक, लेकिन अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर बढ़ा बोझ

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पश्चिम एशिया युद्ध के चलते जेट फ्यूल की कीमतों में उछाल, घरेलू यात्रियों को फिलहाल राहत

पश्चिम एशिया में जारी तनाव और युद्ध का असर अब सीधे आम लोगों की जेब पर पड़ता दिख रहा है। खासकर हवाई यात्रा करने वालों के लिए यह खबर बेहद महत्वपूर्ण है। 28 फरवरी 2026 से शुरू हुए इस युद्ध ने वैश्विक स्तर पर एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) यानी जेट फ्यूल की कीमतों को लगभग दोगुना कर दिया है।

International Air Transport Association (IATA) के आंकड़ों के मुताबिक, 28 फरवरी को जहां ATF की कीमत $99.40 प्रति बैरल थी, वहीं 27 मार्च तक यह बढ़कर $195.19 प्रति बैरल पहुंच गई। यानी सिर्फ एक महीने में कीमतों में लगभग 100% की वृद्धि।

भारत में क्या हुआ?

भारत में ATF की कीमतें अंतरराष्ट्रीय बाजार से जुड़ी होती हैं, खासकर S&P Global के MOPAG (Mean of Platts Arab Gulf) इंडेक्स के आधार पर तय होती हैं। ऐसे में वैश्विक कीमतों में उछाल का असर भारत पर पड़ना तय था।

लेकिन राहत की बात यह है कि Ministry of Petroleum and Natural Gas ने घरेलू यात्रियों को तुरंत झटका नहीं दिया। मंत्रालय के मुताबिक, ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (OMCs) ने घरेलू फ्लाइट्स के लिए ATF की कीमतों में सिर्फ “आंशिक और चरणबद्ध” बढ़ोतरी की है।

इसका मतलब यह है कि अभी घरेलू फ्लाइट्स के टिकट अचानक बहुत ज्यादा महंगे नहीं होंगे। सरकार ने यह कदम खासतौर पर आम यात्रियों को राहत देने के लिए उठाया है, ताकि यात्रा पर सीधा असर न पड़े।

अंतरराष्ट्रीय यात्रियों के लिए बुरी खबर

जहां घरेलू यात्रियों को राहत मिली है, वहीं अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए स्थिति बिल्कुल उलट है। विदेशी उड़ानों के लिए एयरलाइंस को पूरी बाजार कीमत पर ATF खरीदना होगा, जो मार्च के मुकाबले लगभग 115% तक बढ़ चुकी है।

इसका सीधा असर यह होगा कि आने वाले दिनों में इंटरनेशनल फ्लाइट्स के किराए तेजी से बढ़ सकते हैं। खासकर यूरोप, अमेरिका और मिडिल ईस्ट जाने वाले यात्रियों को ज्यादा खर्च करना पड़ सकता है।

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चार्टर फ्लाइट्स पर भी असर

सिर्फ कमर्शियल एयरलाइंस ही नहीं, बल्कि प्राइवेट चार्टर ऑपरेटर्स को भी पूरा बढ़ा हुआ दाम चुकाना होगा। इसका मतलब है कि बिजनेस क्लास या प्राइवेट जेट से यात्रा करने वाले लोगों के लिए लागत और बढ़ जाएगी।

आगे क्या हो सकता है?

अगर पश्चिम एशिया में हालात जल्द नहीं सुधरे, तो ATF की कीमतों में और बढ़ोतरी हो सकती है। ऐसे में सरकार के लिए घरेलू यात्रियों को लंबे समय तक राहत देना मुश्किल हो सकता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यही स्थिति बनी रही, तो आने वाले महीनों में घरेलू फ्लाइट्स के किराए भी धीरे-धीरे बढ़ सकते हैं।

आम आदमी पर असर

  • घरेलू फ्लाइट्स अभी सस्ती रहेंगी (सीमित समय के लिए)
  • अंतरराष्ट्रीय यात्रा महंगी होने वाली है
  • पर्यटन और बिजनेस ट्रैवल दोनों प्रभावित हो सकते हैं


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