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Lok Sabha में गूंजा ‘Vande Mataram’ का सवाल… क्यों भड़क उठे Rajnath Singh? बोले– ‘कौन बैठनेवाला है… ये हिम्मत कैसे?’

सदन में हंगामे के बीच रक्षा मंत्री का तीखा जवाब, ‘Vande Mataram’ पर राजनीति करने वालों को सुनाई सख्त बात।

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Rajnath Singh furious in Lok Sabha during Vande Mataram debate | Dainik Diary
Lok Sabha में ‘Vande Mataram’ पर भाषण देते समय भड़के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह—सदन में बढ़ा तनाव।

सोमवार का दिन Lok Sabha में उस वक्त अचानक गर्म हो गया जब Defence Minister Rajnath SinghVande Mataram’ के महत्व पर बोल रहे थे और विपक्षी सांसद लगातार बीच में टोकते रहे। उनके बार-बार के व्यवधान से नाराज़ होकर राजनाथ सिंह ने जिस अंदाज़ में जवाब दिया, वह कुछ ही मिनटों में सोशल मीडिया पर वायरल हो गया।

वीडियो में साफ दिखता है कि जैसे ही विपक्ष की तरफ से शोर-शराबा बढ़ा, राजनाथ सिंह ने गुस्से में कहा—
“कौन बैठने वाला है? कौन बैठाएगा? क्या बात कर रहे हो… बैठ! ये हिम्मत कैसे हो गई?”

सदन में मौजूद Om Birla ने तुरंत विपक्षी सांसदों को शांत रहने का इशारा किया। लेकिन तब तक माहौल काफी गरम हो चुका था। भाजपा के कई नेता भी विपक्ष की तरफ देखते हुए इशारा कर रहे थे कि मंत्री को इस तरह बीच में टोकना शोभा नहीं देता।


‘Vande Mataram’ पर मिला तीखा जवाब

अपने भाषण में राजनाथ सिंह ने कहा कि Vande Mataram को वह सम्मान नहीं मिला जिसके वह हकदार था। उन्होंने Congress को निशाने पर लेते हुए कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री Jawaharlal Nehru के समय appeasement politics ने ही ‘Vande Mataram’ के “fragmentation” की जमीन तैयार की।

Rajnath Singh furious in Lok Sabha during Vande Mataram debate | Dainik Diary

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उन्होंने कहा—
“Vande Mataram की महिमा को पुनर्स्थापित करना समय की जरूरत है। इसे जो न्याय मिलना चाहिए था, वह नहीं मिला। राष्ट्रगान और राष्ट्रीय गीत के साथ समान व्यवहार नहीं किया गया।”

सिंह ने यह भी कहा कि गीत के साथ हुआ “अन्याय” कोई एक घटना नहीं बल्कि कांग्रेस की appeasement politics की शुरुआत थी।


सदन में गूंजते सवाल और तीखी प्रतिक्रियाएँ

भाषण के दौरान उन्होंने जब ऐतिहासिक गलतियों का मुद्दा उठाया, तो विपक्ष की तरफ से फिर व्यवधान शुरू हो गया। लेकिन इस बार उन्होंने रूखे शब्दों में अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए साफ कहा कि “सदन की गरिमा से खिलवाड़ किसी कीमत पर नहीं चलेगा।”

सांसदों के बीच चर्चा यह भी रही कि हाल के सत्रों में लगातार बढ़ते व्यवधानों ने संसद की कार्यवाही को प्रभावित किया है।
इसी बीच, Rahul Gandhi द्वारा SIR बहस में हिस्सा लेने और प्रधानमंत्री Narendra Modi के NDA MPs को संबोधित करने की खबरों ने सत्र को और रोचक बना दिया।

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राजनीति में ‘Vande Mataram’ का होता रहा है इस्तेमाल

चाहे 2006 में हुए विवाद हों या उसके बाद कई राज्यों में समय-समय पर उठे सवाल—Vande Mataram बार-बार राजनीतिक विमर्श के केंद्र में रहा है। राजनाथ सिंह के भाषण के बाद एक बार फिर यह बहस तेज हो गई है कि देश के राष्ट्रीय प्रतीकों को लेकर राजनीति की क्या सीमाएँ होनी चाहिए।

कई विशेषज्ञों का मानना है कि सामाजिक-सांस्कृतिक मुद्दे जब सदन में आते हैं, तो राजनीतिक टकराव और भी तीखा हो जाता है। यही वजह है कि सोमवार को संसद में दिखा तनाव किसी एक दल या व्यक्ति तक सीमित नहीं था—यह उस व्यापक मानसिकता का हिस्सा है जहाँ राष्ट्रीय पहचान बनाम राजनीतिक व्याख्या की लड़ाई छिड़ी रहती है।


अंत में क्या संदेश छोड़ गए राजनाथ सिंह?

अपने भाषण के अंत में राजनाथ सिंह ने कहा कि “Vande Mataram सिर्फ एक गीत नहीं, भारत की आत्मा है।”
उन्होंने यह भी जोड़ा कि आने वाली पीढ़ियों के लिए यह समझना जरूरी है कि राष्ट्रीय गीत के सम्मान में राजनीति नहीं, बल्कि एकता की भावना होनी चाहिए।

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