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Delhi में विरोध, राज्यों में सवाल! Rahul Gandhi के साथ उतरी Congress अब अपने ही राज्यों में घिरी
Delhi में सरकार के खिलाफ प्रदर्शन करने वाली Congress को अपने शासन वाले राज्यों में उठ रहे सवालों का सामना करना पड़ रहा है, जिससे पार्टी की सियासी रणनीति पर बहस तेज हो गई है।
Delhi में Congress का प्रदर्शन और फिर उठा दोहरे रवैये का सवाल
देशभर में शिक्षा व्यवस्था और छात्र आंदोलनों को लेकर सियासत लगातार तेज होती जा रही है। July 21 को Rahul Gandhi के नेतृत्व में Congress नेताओं ने Prime Minister Narendra Modi के आवास की ओर मार्च निकालकर केंद्र सरकार से शिक्षा व्यवस्था पर जवाबदेही की मांग की। हालांकि Delhi Police ने प्रदर्शनकारियों को रास्ते में ही रोक दिया और कई नेताओं को हिरासत में लेकर Chhatrasal Stadium भेज दिया।
इस दौरान Rahul Gandhi के साथ Karnataka के D.K. Shivakumar और Kerala के V.D. Satheesan भी मौजूद थे। बाद में V.D. Satheesan ने पुलिस कार्रवाई को “अलोकतांत्रिक” और “निंदनीय” बताया।
लेकिन इसी घटनाक्रम के बाद राजनीतिक बहस का केंद्र एक अलग सवाल बन गया—क्या Congress शासित राज्यों में विरोध प्रदर्शनों के लिए वही लोकतांत्रिक रवैया अपनाया गया जिसकी मांग पार्टी Delhi में कर रही थी?
Karnataka में शांतिपूर्ण प्रदर्शन पर भी पुलिस की सख्ती
Bengaluru के Freedom Park में हजारों लोग छात्र आंदोलनों के समर्थन में एकत्र हुए। प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए और बाद में एक महिला प्रदर्शनकारी के खिलाफ मामला दर्ज किया।
पुलिस का आरोप था कि महिला ने ऐसा पोस्टर प्रदर्शित किया जिसमें Umar Khalid और Sharjeel Imam के समर्थन का संदेश था। अधिकारियों का कहना था कि इससे सार्वजनिक व्यवस्था प्रभावित हो सकती थी।
वहीं All India Students’ Association (AISA) की Aratrika ने दावा किया कि पूरा प्रदर्शन शांतिपूर्ण था, लेकिन पुलिस पहले से ही वाटर कैनन और भारी बल के साथ पहुंची थी। उन्होंने आरोप लगाया कि एक सादे कपड़ों में मौजूद महिला पुलिसकर्मी ने प्रदर्शन में इस्तेमाल किया गया पोस्टर भी फाड़ दिया।
छात्र संगठनों का कहना है कि Bengaluru में Freedom Park के अलावा किसी अन्य स्थान पर प्रदर्शन की अनुमति मिलना लगभग असंभव हो गया है।
BJP के विरोध प्रदर्शन पर भी हुई कार्रवाई
इसी दौरान Bharatiya Janata Party (BJP) ने भी कई जिलों में Congress के खिलाफ प्रदर्शन किए। Kalaburagi, Belagavi और Vijayapura में पार्टी कार्यकर्ताओं ने जिला Congress कार्यालयों तक मार्च निकालने की कोशिश की, लेकिन पुलिस ने बैरिकेडिंग कर कई नेताओं को हिरासत में ले लिया।
इससे यह स्पष्ट हुआ कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के नाम पर विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रदर्शन भी पुलिस कार्रवाई के दायरे में आए।
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Kerala में कलाकारों समेत करीब 100 लोगों पर केस
July 22 को Kochi के Panampilly Nagar स्थित Central Park में लगभग 100 लोगों ने Delhi के छात्र आंदोलनों के समर्थन में प्रदर्शन किया।
इस कार्यक्रम में लोकप्रिय रैपर Hirandas Murali (Vedan) और गायक Gabri भी शामिल हुए। पुलिस ने अनुमति न होने का हवाला देते हुए Vedan, उनके मैनेजर Vignesh G. Pillai और अन्य प्रदर्शनकारियों के खिलाफ गैरकानूनी जमावड़े समेत विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज कर लिया।
बाद में Vedan ने इसे “रूटीन केस” बताया, जबकि इस कार्रवाई की व्यापक आलोचना हुई।
दिलचस्प बात यह रही कि Kerala सरकार के गृह मंत्री Ramesh Chennithala ने कहा कि उन्हें मामले की पूरी जानकारी नहीं है और वे इसकी समीक्षा करेंगे। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि ऐसे मामलों में सामान्यतः एफआईआर दर्ज नहीं की जाती।
Telangana में छात्र प्रदर्शनकारियों पर रोक

Hyderabad के Lok Bhavan के बाहर प्रदर्शन कर रहे छात्र संगठनों को भी पुलिस ने रोक दिया। कई प्रदर्शनकारियों को एहतियाती हिरासत में लिया गया और रैलियों को आगे बढ़ने से रोक दिया गया।
हालांकि विपक्ष का आरोप है कि इसी अवधि में Telangana Chief Minister Revanth Reddy की अगुवाई में निकली कैंडल मार्च को किसी प्रकार की पुलिस बाधा का सामना नहीं करना पड़ा।
यही कारण है कि विपक्षी दल राज्य सरकार पर विरोध प्रदर्शनों के मामले में चयनात्मक रवैया अपनाने का आरोप लगा रहे हैं।
छात्र संगठनों ने सरकारों से मांगी समान नीति
छात्र संगठन AISA और Cockroach Janata Party (CJP) का कहना है कि यदि प्रदर्शनकारियों पर दर्ज मामले वापस नहीं लिए गए और कार्रवाई जारी रही तो आंदोलन दोबारा तेज किया जाएगा।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि लोकतंत्र में शांतिपूर्ण विरोध हर नागरिक का संवैधानिक अधिकार है। ऐसे में किसी भी सरकार—चाहे वह केंद्र में हो या राज्य में—से एक समान और पारदर्शी नीति की अपेक्षा की जाती है।
अब बहस केवल Delhi में हुए प्रदर्शन तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या अलग-अलग राज्यों में विरोध प्रदर्शनों के लिए अलग-अलग मानदंड अपनाए जा रहे हैं।
