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ईरान पहुंचते ही बदला समीकरण! अमेरिका-ईरान तनाव के बीच पाकिस्तान की नई कूटनीति

इस्लामाबाद वार्ता फेल होने के बाद तेहरान पहुंचे असीम मुनीर, ट्रंप का शांति प्रस्ताव फिर चर्चा में

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तेहरान में ईरान के विदेश मंत्री के साथ बैठक करते पाकिस्तान सेना प्रमुख असीम मुनीर
तेहरान में ईरान के विदेश मंत्री के साथ बैठक करते पाकिस्तान सेना प्रमुख असीम मुनीर

अमेरिका, ईरान और इज़राइल के बीच चल रहे तनाव के बीच एक नया मोड़ सामने आया है। पाकिस्तान के सेना प्रमुख असीम मुनीर तेहरान पहुंच चुके हैं, जहां वे एक बार फिर शांति वार्ता को आगे बढ़ाने की कोशिश करेंगे। इस घटनाक्रम ने न सिर्फ दक्षिण एशिया बल्कि पूरी दुनिया की राजनीति को नई दिशा दे दी है।

दरअसल, बीते सप्ताह इस्लामाबाद में हुई अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत किसी ठोस नतीजे पर नहीं पहुंच सकी। इसके बाद पाकिस्तान ने मध्यस्थ की भूमिका निभाते हुए एक बार फिर कूटनीतिक प्रयास तेज कर दिए हैं। इस मिशन में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ भी सक्रिय रूप से शामिल हैं।

पाकिस्तान की बढ़ती कूटनीतिक भूमिका

पिछले कुछ वर्षों में पाकिस्तान ने खुद को एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक पुल के रूप में स्थापित करने की कोशिश की है। खासतौर पर अमेरिका, ईरान और सऊदी अरब जैसे देशों के बीच संवाद बनाए रखने में उसकी भूमिका अहम रही है।

असीम मुनीर का तेहरान दौरा इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। पाकिस्तान की कोशिश है कि वह युद्ध की स्थिति को टालते हुए बातचीत का रास्ता खुला रखे।

और भी पढ़ें : मिडिल ईस्ट में शांति का नया फॉर्मूला: Xi Jinping का 4-पॉइंट प्लान, दुनिया की बढ़ी नजरें

व्हाइट हाउस की प्रतिक्रिया

व्हाइट हाउस की प्रेस सेक्रेटरी कैरोलीन लेविट ने भी पाकिस्तान की तारीफ करते हुए कहा कि इस कठिन समय में इस्लामाबाद ने बेहतरीन मध्यस्थ की भूमिका निभाई है।

उन्होंने यह भी संकेत दिया कि अगली दौर की बातचीत फिर से पाकिस्तान में हो सकती है। इससे यह साफ हो जाता है कि अमेरिका भी पाकिस्तान की भूमिका को गंभीरता से ले रहा है।

तीन बड़े मुद्दों पर अटकी बातचीत

इस्लामाबाद में हुई वार्ता तीन प्रमुख मुद्दों पर आकर रुक गई:

  1. यूरेनियम संवर्धन (Nuclear Issue)
    ईरान का कहना है कि उसे शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए परमाणु ऊर्जा विकसित करने का अधिकार है। वहीं अमेरिका इस पर सख्त नियंत्रण चाहता है।
तेहरान में ईरान के विदेश मंत्री के साथ बैठक करते पाकिस्तान सेना प्रमुख असीम मुनीर
  1. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ का मुद्दा
    यह जलडमरूमध्य वैश्विक तेल आपूर्ति का एक महत्वपूर्ण मार्ग है। ईरान ने संकेत दिया है कि यदि समझौता होता है, तो वह इस रास्ते को सुरक्षित बना सकता है।
  2. लेबनान और इज़राइल संघर्ष
    इज़राइल और लेबनान के बीच जारी तनाव भी इस वार्ता में बड़ी बाधा बना हुआ है।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस मुद्दे पर कहा है कि जल्द ही दोनों पक्षों के बीच बातचीत होगी।

क्या युद्ध टल पाएगा?

विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा हालात बेहद नाजुक हैं। सात हफ्तों से चल रहे इस संघर्ष ने न केवल हजारों लोगों की जान ली है, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था को भी झटका दिया है।

तेल की कीमतों में उछाल और महंगाई का खतरा बढ़ गया है। ऐसे में पाकिस्तान की मध्यस्थता अगर सफल होती है, तो यह पूरी दुनिया के लिए राहत भरी खबर होगी।

आगे क्या?

तेहरान में असीम मुनीर की मौजूदगी इस बात का संकेत है कि बातचीत अभी खत्म नहीं हुई है। कूटनीति के जरिए समाधान निकालने की कोशिशें जारी हैं।

अब सबकी नजर इस बात पर है कि क्या पाकिस्तान की यह पहल अमेरिका और ईरान के बीच स्थायी शांति का रास्ता खोल पाएगी या फिर यह तनाव एक बड़े संघर्ष में बदल जाएगा।