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₹14.2 करोड़ का All-rounder लेकिन गेंदबाजी शून्य, CSK की रणनीति पर उठे बड़े सवाल
Prashant Veer को सिर्फ बल्लेबाज बनाकर खेला रही CSK, हर मैच में ₹50 लाख की ‘बेकार’ कीमत चुकाने का आरोप
आईपीएल 2026 में Chennai Super Kings की रणनीति अब सवालों के घेरे में आ चुकी है। टीम ने ₹14.2 करोड़ खर्च करके जिस खिलाड़ी को खरीदा, वही खिलाड़ी अब अधूरा इस्तेमाल होता नजर आ रहा है।
यह कहानी है Prashant Veer की—एक ऐसे ऑलराउंडर की, जिसे दोहरी भूमिका निभाने के लिए टीम में लाया गया था, लेकिन मैदान पर उसे सिर्फ बल्लेबाज बनाकर छोड़ दिया गया है।
ऑलराउंडर खरीदा, लेकिन इस्तेमाल आधा
नीलामी के समय CSK ने Prashant Veer को एक ऐसे खिलाड़ी के रूप में चुना था जो बाएं हाथ से बल्लेबाजी और बाएं हाथ से स्पिन गेंदबाजी दोनों कर सकता है।
यही “dual-skill” उसे खास बनाता था। IPL जैसी लीग में ऐसे खिलाड़ी टीम के संतुलन को मजबूत करते हैं।
लेकिन हकीकत कुछ और ही है। Veer ने अब तक Punjab Kings और Royal Challengers Bengaluru के खिलाफ मैच खेले, लेकिन एक भी ओवर गेंदबाजी नहीं की।
सवाल सीधा है—अगर गेंदबाजी नहीं, तो ₹14.2 करोड़ क्यों?
यहीं से CSK की रणनीति पर सवाल खड़े होते हैं।
अगर Veer गेंदबाजी करने के लिए भरोसेमंद नहीं हैं, तो उन्हें प्लेइंग इलेवन में क्यों रखा गया? और अगर वे टीम के लिए इतने अहम हैं, तो फिर उन्हें गेंदबाजी का मौका क्यों नहीं दिया जा रहा?
यह स्थिति सिर्फ “underuse” नहीं, बल्कि “misuse” जैसी लगने लगी है।
हर मैच में ₹50 लाख का नुकसान?
अगर Veer की कीमत को 14 मैचों में बांटें, तो वह हर मैच में करीब ₹1 करोड़ के पड़ते हैं।
अब अगर उनके ऑलराउंड प्रदर्शन को दो हिस्सों—बल्लेबाजी और गेंदबाजी—में बांटें, तो सिर्फ गेंदबाजी का हिस्सा ही लगभग ₹50 लाख प्रति मैच बैठता है।
यानि दो मैचों में CSK ने करीब ₹1 करोड़ की गेंदबाजी क्षमता को सिर्फ बेंच पर बैठाकर रखा।
यह सिर्फ पैसों का नुकसान नहीं, बल्कि टीम की रणनीतिक ताकत का भी नुकसान है।
रणनीतिक कमजोरी बनता जा रहा फैसला
T20 क्रिकेट में एक ऑलराउंडर की असली ताकत उसकी flexibility होती है।
एक अतिरिक्त गेंदबाज कप्तान को कई विकल्प देता है—
- खराब फॉर्म में चल रहे गेंदबाज को हटाना
- मैच-अप के हिसाब से ओवर देना
- डेथ ओवर्स में रणनीति बदलना
लेकिन जब यह विकल्प इस्तेमाल ही नहीं किया जाता, तो टीम खुद अपनी ताकत को कमजोर बना देती है।

CSK के लिए असली चिंता क्या है?
यह मामला सिर्फ पैसे का नहीं है, बल्कि “role clarity” का है।
या तो CSK को Veer की गेंदबाजी पर भरोसा नहीं है,
या फिर उन्होंने शुरुआत से ही उन्हें सिर्फ बल्लेबाज के रूप में इस्तेमाल करने की योजना बनाई थी।
दोनों ही स्थिति में ₹14.2 करोड़ का निवेश सही नहीं ठहरता।
टीम बैलेंस पर भी असर
अगर एक ऑलराउंडर गेंदबाजी नहीं करता, तो वह टीम का संतुलन बिगाड़ देता है।
कप्तान को अतिरिक्त ओवर ढूंढने पड़ते हैं, जिससे बाकी गेंदबाजों पर दबाव बढ़ता है।
यानी Veer अब टीम के लिए समाधान नहीं, बल्कि एक अतिरिक्त समस्या बनते जा रहे हैं।
निष्कर्ष
IPL जैसे बड़े टूर्नामेंट में हर फैसला मायने रखता है—खासकर जब उसमें करोड़ों का निवेश जुड़ा हो।
Indian Premier League में CSK का यह फैसला फिलहाल समझ से परे लग रहा है।
एक ऑलराउंडर को सिर्फ बल्लेबाज बनाकर खेलाना न सिर्फ पैसे की बर्बादी है, बल्कि टीम की रणनीति पर भी सवाल खड़े करता है।
अब देखना दिलचस्प होगा कि आने वाले मैचों में CSK अपनी इस “अधूरी रणनीति” को बदलती है या फिर यह सिलसिला ऐसे ही चलता रहता है।
