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ईरान ने अमेरिका पर साधा निशाना: “गैर-तर्कसंगत मांगों” की वजह से फेल हुई इस्लामाबाद वार्ता

JD Vance के बयान के बाद ईरान का पलटवार, कहा– अमेरिका की शर्तें एकतरफा और दबाव बनाने वाली थीं

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इस्लामाबाद में वार्ता के बाद मीडिया से बात करते अमेरिकी उपराष्ट्रपति JD Vance
इस्लामाबाद वार्ता के बाद अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ते तनाव को दर्शाती प्रतीकात्मक तस्वीर

अमेरिका और ईरान के बीच इस्लामाबाद में हुई हाई-प्रोफाइल वार्ता अब खुलकर आरोप-प्रत्यारोप में बदल गई है। जहां एक तरफ अमेरिकी उपराष्ट्रपति JD Vance ने बातचीत की विफलता के लिए ईरान को जिम्मेदार ठहराया, वहीं ईरान ने साफ शब्दों में कहा है कि वार्ता अमेरिका की “गैर-तर्कसंगत मांगों” की वजह से फेल हुई।

ईरान का सीधा आरोप

ईरान के विदेश मंत्रालय ने बयान जारी कर कहा कि अमेरिका ने बातचीत के दौरान ऐसी शर्तें रखीं, जो न केवल असंतुलित थीं बल्कि देश की संप्रभुता के खिलाफ भी थीं।

ईरानी अधिकारियों का कहना है कि अमेरिका चाहता था कि ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम को पूरी तरह खत्म कर दे, जो किसी भी संप्रभु देश के लिए स्वीकार करना मुश्किल है।

JD Vance का क्या था बयान?

इससे पहले JD Vance ने कहा था कि अमेरिका ने ईरान को एक “स्पष्ट और अंतिम प्रस्ताव” दिया था, लेकिन तेहरान ने उसे मानने से इनकार कर दिया।

और भी पढ़ें : Iran से बातचीत, साथ में Fighter Jets और 2,000 Troops West Asia में US की दोहरी चाल, JD Vance पहुँचे Pakistan

उनका यह भी कहना था कि अगर ईरान इस मौके को गंवाता है, तो इसका नुकसान उसे ही उठाना पड़ेगा।

कूटनीति या दबाव की रणनीति?

विशेषज्ञों के अनुसार, यह पूरा मामला सिर्फ बातचीत का नहीं बल्कि रणनीति का भी है। अमेरिका जहां “फाइनल ऑफर” देकर दबाव बनाना चाहता है, वहीं ईरान इसे अपनी स्वतंत्र नीति में दखल के रूप में देख रहा है।

यह पहली बार नहीं है जब दोनों देशों के बीच इस तरह की कड़ी टकराहट देखने को मिली हो। पहले भी कई बार परमाणु समझौते को लेकर दोनों देशों के बीच मतभेद सामने आ चुके हैं।

इस्लामाबाद वार्ता के बाद अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ते तनाव को दर्शाती प्रतीकात्मक तस्वीर


वैश्विक असर की आशंका

इस वार्ता के असफल होने के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ गई है। मध्य पूर्व में तनाव बढ़ने की आशंका जताई जा रही है, जिसका असर तेल बाजार और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।

विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर जल्द ही कोई समाधान नहीं निकला, तो यह विवाद और गहरा सकता है और कई देशों को इसकी कीमत चुकानी पड़ सकती है।

आगे क्या होगा?

फिलहाल दोनों देश अपने-अपने रुख पर कायम हैं। Iran ने साफ कर दिया है कि वह दबाव में आकर कोई समझौता नहीं करेगा, जबकि United States अब भी अपनी शर्तों को सही ठहरा रहा है।

अब देखना होगा कि आने वाले दिनों में क्या दोनों देश फिर से बातचीत की मेज पर लौटते हैं या यह टकराव और ज्यादा गंभीर रूप लेता है।

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