Connect with us

World News

ईरान युद्ध का कहर — Sensex 1,580 अंक धराशायी, Rupee रिकॉर्ड निचले स्तर पर, कच्चा तेल $100 के पार

Published

on

ईरान युद्ध का कहर — Sensex 1,580 अंक धराशायी, Rupee रिकॉर्ड निचले स्तर पर, कच्चा तेल $100 के पार
BSE Sensex में 1,580 अंक की गिरावट — ईरान युद्ध, महंगे तेल और कमजोर रुपये ने एक साथ भारतीय बाजारों को हिलाया।

नई दिल्ली। शुक्रवार का दिन भारतीय बाजारों के लिए किसी बुरे सपने से कम नहीं रहा। ईरान युद्ध के बढ़ते असर ने एक साथ शेयर बाजार, रुपया और Bond Market — तीनों को बुरी तरह हिला दिया। Sensex 1,580 अंक से ज्यादा गिरा, रुपया अपने अब तक के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया और कच्चे तेल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल का मनोवैज्ञानिक स्तर तोड़ गई।

बाजार में भूचाल

मुंबई के Dalal Street पर आज जो हुआ उसे एक शब्द में कहें तो — तबाही। 30 शेयरों वाला BSE Sensex 2.07% यानी 1,579.82 अंक गिरकर 75,070.44 पर आ गया। NSE Nifty 50 भी 2.22% की गिरावट के साथ 23,305.75 पर बंद हुआ। Larsen & Toubro और Tata Steel जैसे दिग्गज शेयर 4% से ज्यादा टूटे। Bharat Electronics और UltraTech Cement भी बड़े गिरावटों में शामिल रहे। हालांकि Hindustan Unilever और Bharti Airtel जैसे Defensive Stocks ने थोड़ी राहत दी और मामूली बढ़त बनाए रखी।

एक Private Bank Trader ने कहा — “यह संघर्ष दो हफ्ते के करीब पहुंच रहा है और वैश्विक स्तर पर Risk Aversion गहरा हो रहा है। भारत जैसे तेल-आयातक देश के लिए $100 से ऊपर का Crude और कमजोर होता रुपया — दोनों मिलकर एक Classic Twin-Deficit की चिंता खड़ी कर देते हैं।”

रुपया — रिकॉर्ड तोड़ गिरावट

Currency Market में भी हालात उतने ही खराब रहे। रुपया आज 92.4325 प्रति डॉलर के अब तक के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया — और यह रिकॉर्ड कल ही बना था। यानी दो दिन में दो बार ऐतिहासिक गिरावट। ईरान युद्ध शुरू होने के बाद से रुपया करीब 1.5% कमजोर हो चुका है।

स्थानीय Traders के मुताबिक Reserve Bank of India ने Spot और Forward दोनों बाजारों में आक्रामक दखलंदाजी की, वरना गिरावट और भी गहरी हो सकती थी। RBI इस हफ्ते ₹50,000 करोड़ के OMO Purchases भी कर चुका है और शुक्रवार को इसी तरह के एक और इंजेक्शन की योजना थी।

तेल का झटका — महंगाई की नई चिंता

वैश्विक तेल बेंचमार्क Brent Crude शुक्रवार को $101 प्रति बैरल पर पहुंच गया। भारत अपनी 80% से ज्यादा तेल जरूरतें आयात से पूरा करता है, इसलिए यह बढ़ोतरी सीधे देश की Growth और Inflation पर असर डालती है।

HDFC Bank के विश्लेषकों ने चेतावनी दी है कि अगर तेल की कीमत इस संघर्ष के चलते औसतन $90 प्रति बैरल रही, तो मार्च 2027 तक के वित्त वर्ष में Headline Inflation 5% से 5.5% तक पहुंच सकती है — यह पिछले अनुमानों से करीब 100 Basis Points ज्यादा है।

सीधे शब्दों में कहें तो — पेट्रोल-डीजल, खाना पकाने का तेल, ट्रांसपोर्ट लागत — सब कुछ महंगा होने का खतरा बढ़ गया है।

Bond Market और Swap Market में भी बेचैनी

शेयर और रुपये के बाद Bond Market भी दबाव में आई। Benchmark 6.48% 2035 Bond का Yield बढ़कर 6.6744% पर पहुंच गया — Bond Prices और Yields विपरीत दिशा में चलते हैं, इसलिए Yield का बढ़ना बताता है कि निवेशक सरकारी कर्जपत्रों से दूर भाग रहे हैं।

Swaps Market में भी घबराहट साफ दिखी। एक साल का Overnight Indexed Swap Rate 5 Basis Points बढ़कर 5.81% पर आ गया — इसका मतलब है कि बाजार को लग रहा है कि RBI के पास ब्याज दरें घटाने की गुंजाइश कम है, क्योंकि ऊर्जा की बढ़ती लागत Inflation को दबाने नहीं देगी।

विदेशी निवेशकों की भगदड़ — $5 अरब निकले

इस महीने अब तक विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार से करीब $5 अरब यानी लगभग ₹42,000 करोड़ निकाल लिए हैं। यह वही निवेशक हैं जो इस साल की शुरुआत में भारतीय बाजारों में जमकर पैसा लगा रहे थे। अब Geopolitical अनिश्चितता ने उन्हें पीछे खींच लिया है।

रुपया 97-98 तक जा सकता है?

ईरान युद्ध का कहर — Sensex 1,580 अंक धराशायी, Rupee रिकॉर्ड निचले स्तर पर, कच्चा तेल $100 के पार


आगे का नजरिया और भी चिंताजनक है। MUFG Bank ने चेतावनी दी है कि अगर तेल की कीमत $120 प्रति बैरल तक पहुंचती है और Strait of Hormuz — जो दुनिया का सबसे अहम तेल शिपिंग रास्ता है — बंद रहता है, तो रुपया 97.50 या उससे भी नीचे जा सकता है।

QuantEco Research ने तो और कड़ा अनुमान दिया है — $100 प्रति बैरल का परिदृश्य लंबे समय तक बना रहा तो मार्च 2027 तक रुपया 98.5 तक पहुंच सकता है।

MUFG के विश्लेषकों ने अपने नोट में लिखा कि जब तक Strait of Hormuz की स्थिति और Iran-Israel टकराव की व्यापकता को लेकर स्पष्टता नहीं आती, भारतीय संपत्तियां दबाव में बनी रहेंगी।

आम आदमी पर क्या असर?

बाजारों की यह उठापटक सिर्फ Traders और निवेशकों की समस्या नहीं है। अगर रुपया कमजोर होता है और तेल महंगा रहता है, तो इसकी मार सीधे आम आदमी की थाली और पेट्रोल पंप पर पड़ेगी। सरकार के लिए भी यह दोहरी मुसीबत है — एक तरफ Import Bill बढ़ रहा है, दूसरी तरफ Fiscal Deficit का दबाव।

फिलहाल बाजार की नजरें टिकी हैं Middle East में शांति की किसी भी संभावना पर। जब तक वहां तनाव कम नहीं होता, भारत के बाजारों के लिए राहत की उम्मीद कम ही दिखती है।