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Lionel Messi पर पूर्व FIFA रेफरी का बड़ा दावा, बोले- वर्ल्ड कप में मिलना चाहिए था रेड कार्ड?

पूर्व FIFA रेफरी Keith Hackett ने दावा किया है कि फीफा वर्ल्ड कप 2026 के ग्रुप स्टेज में Lionel Messi के एक विवादित मूव पर रेड कार्ड दिखाया जाना चाहिए था। उनके बयान के बाद रेफरिंग और VAR को लेकर नई बहस छिड़ गई है।

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पूर्व FIFA रेफरी Keith Hackett के बयान के बाद Lionel Messi को लेकर रेफरिंग विवाद एक बार फिर चर्चा में।

नई दिल्ली: फीफा वर्ल्ड कप 2026 के दौरान अर्जेंटीना के कप्तान Lionel Messi को लेकर एक बार फिर विवाद सामने आया है। इस बार यह बहस किसी गोल या असिस्ट को लेकर नहीं, बल्कि रेफरिंग के एक फैसले को लेकर हो रही है। पूर्व FIFA रेफरी Keith Hackett ने दावा किया है कि टूर्नामेंट के ग्रुप स्टेज के एक मुकाबले में Messi को रेड कार्ड दिखाया जाना चाहिए था, लेकिन मैच अधिकारियों ने ऐसा नहीं किया।

Keith Hackett का कहना है कि संबंधित घटना में Messi की चुनौती सामान्य फाउल से कहीं अधिक गंभीर थी। उनके मुताबिक, यदि फुटबॉल के नियमों को पूरी तरह लागू किया जाता तो उस स्थिति में सीधे रेड कार्ड का फैसला लिया जा सकता था।

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पूर्व रेफरी के इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर फुटबॉल प्रशंसकों के बीच बहस तेज हो गई है। कुछ लोग Hackett की राय से सहमत दिखाई दे रहे हैं, जबकि बड़ी संख्या में फैंस का मानना है कि मैदान पर मौजूद रेफरी और VAR अधिकारियों ने उपलब्ध फुटेज के आधार पर सही निर्णय लिया था।

फुटबॉल में VAR तकनीक का उद्देश्य विवादित फैसलों को अधिक सटीक बनाना है, लेकिन बड़े टूर्नामेंटों में कई बार इसके इस्तेमाल को लेकर सवाल उठते रहे हैं। Messi से जुड़ा यह मामला भी अब उन्हीं चर्चाओं में शामिल हो गया है।

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हालांकि, FIFA की ओर से इस मामले पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। मैच के दौरान भी रेफरी ने किसी रेड कार्ड की जरूरत नहीं समझी थी और VAR की समीक्षा के बाद भी मूल फैसला बरकरार रखा गया।

Lionel Messi लंबे समय से दुनिया के सबसे सफल और लोकप्रिय फुटबॉल खिलाड़ियों में गिने जाते हैं। ऐसे में उनसे जुड़ा हर विवाद स्वाभाविक रूप से सुर्खियां बन जाता है। Keith Hackett के बयान ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या बड़े खिलाड़ियों को कभी-कभी रेफरिंग में अतिरिक्त लाभ मिल जाता है, या फिर यह केवल अलग-अलग विशेषज्ञों की राय का मामला है।

फिलहाल इस विवाद पर अंतिम निर्णय वही माना जाएगा जो मैच अधिकारियों ने मैदान पर लिया था। हालांकि, पूर्व रेफरी की टिप्पणी ने फुटबॉल जगत में निष्पक्ष रेफरिंग और VAR की भूमिका को लेकर नई चर्चा जरूर शुरू कर दी है।