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2029 से पहले महिलाओं को मिलेगा 33% आरक्षण? Parliament में आज होगा बड़ा फैसला

Nari Shakti Vandan Adhiniyam को लागू करने के लिए Budget Session तीन दिन बढ़ाया गया — 2011 की Census के आधार पर हो सकता है आरक्षण, समझिए पूरा मामला

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Women Reservation Bill: 2029 से पहले 33% आरक्षण? Parliament में आज होगा बड़ा फैसला | Dainik Diary
Nari Shakti Vandan Adhiniyam को 2029 से पहले लागू करने की कोशिश — Parliament का Budget Session तीन दिन बढ़ाया गया।

भारतीय राजनीति में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने की बात दशकों से होती रही है। 2023 में Nari Shakti Vandan Adhiniyam पास हुआ, तालियाँ बजीं, बधाइयाँ मिलीं — लेकिन असली सवाल यह था कि यह कानून लागू कब होगा? अब सरकार ने उस सवाल का जवाब देने की कोशिश शुरू की है।

Parliament का Budget Session तीन दिनों के लिए बढ़ा दिया गया है। इन तीन दिनों में सरकार एक संशोधन पास कराना चाहती है जिससे Lok Sabha और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण 2029 के चुनावों से पहले मिल सके।

2023 में पास हुआ था कानून, लेकिन अटकी थी बात

2023 में जब यह कानून पास हुआ था, तब एक शर्त जोड़ी गई थी — आरक्षण तभी लागू होगा जब delimitation की प्रक्रिया पूरी हो और census भी हो जाए। समस्या यह थी कि census 2027 में होनी है। और अगर 2027 की census का इंतजार किया जाता, तो आरक्षण 2034 तक भी लागू नहीं हो पाता।

यानी कानून था, इरादा था — लेकिन तारीख नहीं थी।

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अब क्या बदलेगा?

सरकार अब इस कानून में संशोधन लाकर यह प्रावधान करना चाहती है कि 2027 की census का इंतजार किए बिना, 2011 की census के आधार पर ही महिला आरक्षण लागू किया जाए। इससे 2029 के Lok Sabha चुनावों में महिलाओं को 33 प्रतिशत सीटें मिल सकेंगी।

Women Reservation Bill: 2029 से पहले 33% आरक्षण? Parliament में आज होगा बड़ा फैसला | Dainik Diary


यह एक बड़ा कदम है। Lok Sabha में फिलहाल 543 सीटें हैं। 33 प्रतिशत आरक्षण का मतलब होगा करीब 181 सीटें सिर्फ महिला उम्मीदवारों के लिए।

क्या Parliament में पास होगा यह संशोधन?

यह संविधान संशोधन है — इसलिए इसे पास होने के लिए दोनों सदनों में दो-तिहाई बहुमत चाहिए। सरकार के पास संख्या है या नहीं, यह इन तीन दिनों में साफ हो जाएगा। विपक्ष का रुख भी अहम होगा।

महिला आरक्षण का मुद्दा हमेशा से राजनीतिक सहमति और असहमति दोनों का केंद्र रहा है। लेकिन इस बार सरकार ने समयसीमा तय कर दी है — और फैसला Parliament के हाथ में है।

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