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Persian Gulf Shipping Crisis: US-Iran तनाव के बीच करीब 6,000 नाविक फंसे, UN ने जारी की तत्काल अपील
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव का असर अब वैश्विक समुद्री व्यापार पर भी दिखाई देने लगा है। संयुक्त राष्ट्र से जुड़ी अंतरराष्ट्रीय समुद्री संस्था ने हालात पर चिंता जताते हुए सभी पक्षों से संयम बरतने की अपील की है।
नई दिल्ली: अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का प्रभाव अब समुद्री परिवहन क्षेत्र पर भी साफ दिखाई दे रहा है। रिपोर्टों के अनुसार, फारस की खाड़ी (Persian Gulf) में बढ़ी सुरक्षा चुनौतियों के कारण करीब 6,000 नाविक (Seafarers) विभिन्न व्यापारिक जहाजों पर फंसे हुए हैं। इस स्थिति को देखते हुए संयुक्त राष्ट्र से संबद्ध अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन (IMO) ने सभी संबंधित पक्षों से तत्काल संयम बरतने और समुद्री मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की अपील की है।
विशेषज्ञों के अनुसार, फारस की खाड़ी दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री व्यापारिक मार्गों में से एक है। यहां से प्रतिदिन बड़ी मात्रा में कच्चा तेल, प्राकृतिक गैस और अन्य महत्वपूर्ण वस्तुओं का परिवहन होता है। ऐसे में क्षेत्र में किसी भी प्रकार का सैन्य तनाव वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला पर सीधा असर डाल सकता है।
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रिपोर्टों में कहा गया है कि हालिया सुरक्षा हालात के चलते कई जहाजों की आवाजाही प्रभावित हुई है। कुछ जहाजों को अतिरिक्त सुरक्षा इंतजामों के कारण निर्धारित समय से अधिक समय तक समुद्र में रुकना पड़ा, जिससे हजारों नाविक लंबे समय से जहाजों पर ही रहने को मजबूर हैं।
अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन ने अपने बयान में कहा कि समुद्री कर्मचारियों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। संगठन ने सभी देशों से अपील की है कि वे ऐसे कदम उठाएं जिससे व्यापारिक जहाजों की सुरक्षित आवाजाही बनी रहे और समुद्र में कार्यरत लोगों की जान जोखिम में न पड़े।

समुद्री सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि यदि क्षेत्र में तनाव लंबे समय तक जारी रहता है, तो इसका असर केवल तेल बाजार तक सीमित नहीं रहेगा। वैश्विक माल ढुलाई, बीमा लागत, शिपिंग कंपनियों के संचालन और अंतरराष्ट्रीय व्यापार की गति भी प्रभावित हो सकती है।
अर्थशास्त्रियों का मानना है कि फारस की खाड़ी में अस्थिरता बढ़ने से ऊर्जा कीमतों में उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। इसका असर दुनिया के कई देशों की अर्थव्यवस्था और आयात-निर्यात पर भी पड़ सकता है।
फिलहाल अंतरराष्ट्रीय समुदाय लगातार कूटनीतिक समाधान पर जोर दे रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि समुद्री मार्गों की सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखने के लिए सभी पक्षों के बीच संवाद और संयम सबसे प्रभावी रास्ता है।
