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23 साल बाद बदल सकती है Tamil Nadu की शराब नीति?… TASMAC दुकानों के निजीकरण की अटकलों से मचा सियासी बवाल
Vijay सरकार द्वारा शहरी इलाकों की TASMAC शराब दुकानों को निजी हाथों में सौंपने की चर्चाओं ने राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया है। PMK नेता Anbumani Ramadoss ने इस संभावित कदम का कड़ा विरोध किया है।
Tamil Nadu में शराब बिक्री को लेकर एक बार फिर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। चर्चाएं हैं कि Chief Minister Vijay के नेतृत्व वाली Tamilaga Vettri Kazhagam (TVK) सरकार राज्य की TASMAC (Tamil Nadu State Marketing Corporation) की कुछ शराब दुकानों के निजीकरण पर विचार कर रही है। हालांकि सरकार की ओर से अब तक इस संबंध में कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है, लेकिन राजनीतिक गलियारों में इस मुद्दे को लेकर अटकलें तेज हैं।
यदि यह प्रस्ताव लागू होता है, तो 2003 के बाद पहली बार राज्य में शराब की खुदरा बिक्री के सरकारी मॉडल में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। उस समय AIADMK सरकार ने निजी शराब बिक्री व्यवस्था समाप्त कर TASMAC के जरिए राज्य के नियंत्रण में शराब की बिक्री शुरू की थी।
क्या है निजीकरण को लेकर चर्चा?
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, राज्य की 4,048 TASMAC दुकानों में से लगभग 2,500 दुकानें, जो मुख्य रूप से नगर निगम और नगर पालिका क्षेत्रों में स्थित हैं, निजी संचालकों को सौंपी जा सकती हैं। हालांकि इस प्रस्ताव की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन माना जा रहा है कि आगामी विधानसभा सत्र में इससे जुड़ा विधेयक पेश किया जा सकता है।
इसी संभावना को लेकर विपक्षी दलों ने सरकार पर निशाना साधना शुरू कर दिया है। उनका आरोप है कि इससे शराब की उपलब्धता और खपत बढ़ सकती है, जबकि राज्य लंबे समय से चरणबद्ध शराबबंदी (Prohibition) की बात करता रहा है।
Anbumani Ramadoss ने जताई कड़ी आपत्ति
PMK अध्यक्ष Anbumani Ramadoss ने संभावित निजीकरण का विरोध करते हुए कहा कि यदि यह खबर सही है तो सरकार का फैसला निंदनीय होगा।
उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य शराब की दुकानों को निजी हाथों में सौंपना नहीं, बल्कि उन्हें धीरे-धीरे बंद कर पूर्ण शराबबंदी लागू करना होना चाहिए।
Anbumani ने कहा कि सरकार का खुद शराब बेचना भी उचित नहीं है, लेकिन इसका समाधान निजीकरण नहीं बल्कि राज्यभर में शराब की दुकानों को बंद करना है।
‘पुरानी व्यवस्था में लौटना सुधार नहीं, पीछे जाना होगा’
Anbumani Ramadoss ने 2003 से पहले की व्यवस्था का जिक्र करते हुए दावा किया कि उस समय निजी शराब दुकानों में कई तरह की अनियमितताएं थीं। उन्होंने आरोप लगाया कि अवैध दुकानें, लाइसेंस नियमों का उल्लंघन और अवैध शराब की बिक्री जैसी समस्याएं आम थीं।
उनका कहना था कि 23 साल बाद उसी व्यवस्था में लौटना किसी सुधार का संकेत नहीं बल्कि राज्य को पीछे ले जाने जैसा होगा।
उन्होंने यह भी दावा किया कि TVK सरकार बनने के तुरंत बाद से शराब बिक्री के निजीकरण और अन्य राज्यों से शराब खरीदने को लेकर एक लॉबी सक्रिय होने की चर्चाएं सामने आई थीं।
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हाल ही में TASMAC कर्मचारियों के लिए सख्त नियम लागू
इस संभावित प्रस्ताव के बीच राज्य सरकार ने हाल ही में Madras High Court के निर्देशों के बाद TASMAC कर्मचारियों के लिए अनुशासनात्मक नियमों को और सख्त किया है।
नई व्यवस्था के तहत यदि कोई कर्मचारी Maximum Retail Price (MRP) से अधिक कीमत वसूलते हुए पाया जाता है, तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। बार-बार नियम तोड़ने वालों को नौकरी से बर्खास्त तक किया जा सकता है।
राजस्व बढ़ाने के प्रयासों के बीच आई चर्चा

यह पूरा घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब राज्य सरकार ने राजस्व बढ़ाने के लिए छह सदस्यीय Revenue Augmentation Committee का गठन किया है। इस समिति की अध्यक्षता प्रसिद्ध अर्थशास्त्री Montek Singh Ahluwalia कर रहे हैं।
समिति को राज्य के लिए नए राजस्व स्रोत तलाशने, कर संग्रह में होने वाले नुकसान को रोकने और शराब कर व्यवस्था में संभावित सुधारों का अध्ययन करने की जिम्मेदारी दी गई है।
फिलहाल सरकार ने TASMAC के निजीकरण पर कोई आधिकारिक रुख स्पष्ट नहीं किया है। ऐसे में आगामी विधानसभा सत्र और सरकार के अगले कदम पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।
