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अमेरिका का बड़ा झटका! अब नहीं मिलेगा भारत को रूसी तेल पर छूट

सैंक्शन वॉवर खत्म करने के फैसले से बढ़ सकती हैं तेल की कीमतें, भारत पर पड़ेगा सीधा असर

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रूसी तेल खरीद पर अमेरिका की छूट खत्म होने से वैश्विक बाजार में बढ़ी चिंता
रूसी तेल खरीद पर अमेरिका की छूट खत्म होने से वैश्विक बाजार में बढ़ी चिंता

वैश्विक ऊर्जा बाजार में हलचल मचाने वाला एक बड़ा फैसला सामने आया है। अमेरिका ने साफ कर दिया है कि वह अब रूस और ईरान से तेल खरीदने पर दी जा रही विशेष छूट (Sanctions Waiver) को आगे नहीं बढ़ाएगा। इस फैसले का सीधा असर भारत पर पड़ने वाला है, जो पिछले कुछ समय से रूसी तेल का बड़ा खरीदार बनकर उभरा था।

क्या था यह ‘सैंक्शन वॉवर’?

दरअसल, अमेरिका ने वैश्विक ऊर्जा संकट को देखते हुए कुछ समय के लिए यह छूट दी थी कि देश पहले से लोड किए गए तेल (Oil Cargo) को बिना किसी प्रतिबंध के खरीद सकें। इसका मकसद था कि बाजार में तेल की कमी न हो और कीमतें नियंत्रण में रहें।

लेकिन अब अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने स्पष्ट कर दिया है कि यह व्यवस्था अब खत्म हो चुकी है और इसे दोबारा लागू नहीं किया जाएगा।

भारत को कैसे हुआ फायदा?

इस छूट का सबसे ज्यादा फायदा भारत को हुआ था। मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ में बाधाओं के कारण कई देशों की तेल सप्लाई प्रभावित हुई थी।

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ऐसे समय में भारत ने रूस से सस्ता कच्चा तेल खरीदकर अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा किया। रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारतीय रिफाइनरियों ने इस दौरान करीब 30 मिलियन बैरल रूसी तेल के ऑर्डर दिए थे।

क्यों लिया गया यह फैसला?

यह फैसला उस समय आया है जब मध्य पूर्व में तनाव बढ़ रहा है और वैश्विक तेल बाजार पहले से ही अस्थिर है।

डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने पहले इन छूटों का इस्तेमाल तेल की सप्लाई बढ़ाने और कीमतों को नियंत्रित करने के लिए किया था। लेकिन अब अमेरिका ने सख्ती दिखाते हुए इसे खत्म करने का फैसला किया है।

विशेषज्ञ मानते हैं कि यह कदम रूस और ईरान पर दबाव बनाने की रणनीति का हिस्सा भी हो सकता है।

कब खत्म हुई यह छूट?

अमेरिका ने मार्च में 30 दिनों की अस्थायी छूट दी थी, जिसके तहत 12 मार्च से पहले जहाजों में लोड किया गया तेल वैश्विक बाजार तक पहुंच सकता था।

यह छूट 11 अप्रैल को समाप्त हो गई और अब इसके आगे बढ़ने की कोई संभावना नहीं है।

भारत के लिए क्या मायने?

इस फैसले से भारत के लिए सस्ता तेल हासिल करना मुश्किल हो सकता है। इससे देश में पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर असर पड़ सकता है और महंगाई बढ़ने का खतरा भी है।

रूसी तेल खरीद पर अमेरिका की छूट खत्म होने से वैश्विक बाजार में बढ़ी चिंता


हालांकि, भारत पहले भी कई बार वैकल्पिक स्रोतों से तेल खरीदने की रणनीति अपनाता रहा है। ऐसे में सरकार और कंपनियां नए विकल्प तलाश सकती हैं।

वैश्विक असर भी तय

इस फैसले का असर सिर्फ भारत तक सीमित नहीं रहेगा। पूरी दुनिया में तेल की कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है।

खासतौर पर रूस और ईरान जैसे देशों के निर्यात पर इसका असर पड़ेगा, जिससे वैश्विक सप्लाई चेन प्रभावित हो सकती है।

आगे क्या?

अब सवाल यह है कि क्या भारत और अन्य देश इस स्थिति से निपटने के लिए नए रास्ते खोज पाएंगे या फिर तेल की कीमतों में बड़ा उछाल देखने को मिलेगा।

फिलहाल, यह साफ है कि अमेरिका के इस फैसले ने वैश्विक ऊर्जा बाजार में एक नई अनिश्चितता पैदा कर दी है।