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महिला आरक्षण अभी क्यों नहीं? 543 सीटों पर लागू करने में क्या है असली रोड़ा, जानें पूरा विवाद
2023 में कानून बन चुका है, लेकिन Census और Delimitation की शर्त ने रोका रास्ता, OBC quota का सवाल भी अनसुलझा
Parliament में शुक्रवार को Constitution (131st Amendment) Bill, 2026 के गिरने के बाद देश में एक बड़ा सवाल गूंज रहा है। PM Narendra Modi की 12 साल की सरकार में यह पहली बार है जब कोई bill Lok Sabha में गिरा है। सवाल यह है कि आखिर मौजूदा 543 सीटों वाली Lok Sabha में अभी से 33 फीसदी महिला आरक्षण क्यों नहीं लागू हो सकता?
2023 में बन चुका है कानून, फिर भी क्यों रुकावट?
Nari Shakti Vandan Adhiniyam September 2023 में Parliament ने सर्वसम्मति से पास किया था। 16 अप्रैल 2026 को इसे gazette में notified भी किया गया। यह कानून Constitution के Article 334A के तहत दर्ज है। लेकिन इसी कानून में एक शर्त है जो इसे अमल में आने से रोकती है। कानून कहता है कि पहले Census होगी, फिर Delimitation होगी और तब जाकर reservation लागू होगा। इस timeline के हिसाब से 2034 से पहले यह संभव नहीं।
Congress Parliamentary Party chairperson Sonia Gandhi ने April 13 को एक अखबार में लिखा कि यह शर्त Opposition ने नहीं, सरकार ने खुद डाली थी। उन्होंने याद दिलाया कि Rajya Sabha में Leader of Opposition Mallikarjun Kharge ने 2024 के Lok Sabha elections से ही यह reservation लागू करने की मांग की थी, जिसे सरकार ने नहीं माना।
सरकार का तर्क क्या था?
सरकार ने कोई संवैधानिक दलील नहीं दी कि मौजूदा 543 सीटों पर आरक्षण असंभव है। Amit Shah ने arithmetic का सहारा लिया। उन्होंने कहा कि अगर Tamil Nadu की 39 सीटों पर 33 फीसदी लागू हों तो सिर्फ 13 सीटें महिलाओं को मिलेंगी। लेकिन सीटें बढ़ाकर 59 करें तो 20 महिलाओं को मिलेंगी और 39 सीटें बाकी सबके लिए खुली रहेंगी।
सरकार की plan थी Lok Sabha की सीटें 543 से 50 फीसदी बढ़ाकर 816 करना और इन नई सीटों पर महिलाओं को आरक्षण देना। लेकिन Opposition इसके लिए 2011 की पुरानी Census का इस्तेमाल करने पर तैयार नहीं हुई।
Opposition ने क्या offer किया?
Leader of Opposition Rahul Gandhi ने सीधे कहा, “पुराना bill वापस लाओ, हम अभी पास करवाने में मदद करेंगे।” Congress नेता KC Venugopal ने भी कहा कि Opposition ने 2024 elections से ही इसे लागू करने की मांग की थी। Trinamool Congress के Kalyan Banerjee ने कहा कि Delimitation की जरूरत ही नहीं, 50 फीसदी आरक्षण अभी दिया जा सकता है। Priyanka Gandhi Vadra ने सरकार को “हिम्मत दिखाने” की नसीहत दी और कहा कि कुछ पुरुष नेता नहीं चाहते कि उनकी सीट जाए।
OBC का सवाल अभी भी अनसुलझा
इस पूरे विवाद के नीचे एक और बड़ा मुद्दा दबा है। Parliament में SC और ST के लिए political reservation है, लेकिन OBCs के लिए कुछ नहीं। महिला आरक्षण में OBC women को कोई sub-quota नहीं मिलेगी क्योंकि OBC political reservation का संवैधानिक प्रावधान ही नहीं है।

Samajwadi Party chief Akhilesh Yadav ने Parliament में कहा, “सरकार census से भाग रही है क्योंकि OBC और Muslim की आबादी देखकर reservation की मांग बढ़ेगी। हम चाहते हैं कि Muslim और OBC महिलाओं को reservation मिले।”
Bihar और Telangana के surveys के अनुसार OBCs देश की 50 फीसदी से ज्यादा आबादी हो सकते हैं, लेकिन उन्हें नौकरियों में सिर्फ 27 फीसदी quota मिलता है। 2026 की Census में पहली बार 1931 के बाद सभी के लिए caste enumeration हो रही है।
Southern states का डर
Tamil Nadu के Chief Minister MK Stalin सबसे पहले इन bills की copies जलाने वालों में थे। Southern states को डर है कि population के आधार पर Delimitation होने से उन्हें नुकसान होगा क्योंकि उन्होंने family planning पर बेहतर काम किया है। जबकि Hindi-belt states जहां population अधिक है, Parliament में और ज्यादा seats पाएंगे।
Congress MP Shashi Tharoor ने Lok Sabha में कहा कि यह Delimitation उसी जल्दबाजी में लाई गई जैसे 2016 में Demonetisation लाई गई थी। “और हम सब जानते हैं उससे देश का कितना नुकसान हुआ। Delimitation राजनीतिक Demonetisation साबित होगी,” उन्होंने कहा।
फिलहाल तीनों bills गिर चुके हैं। महिला आरक्षण का कानून किताब में है, लेकिन अमल में आने के लिए Census और Delimitation का इंतजार करना होगा। और Delimitation का यह सवाल पिछले 50 सालों से अनसुलझा है।
