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धुरंधर 2 ट्रेलर: Ranveer Singh ने पाकिस्तानी आतंकियों पर बरपाया कहर बदले की आग में जलता हर सीन
रहमान डकैत की मौत के बाद लियारी की सत्ता संभालता हमज़ा अली मज़ारी — 3 मिनट 25 सेकंड का ट्रेलर देखकर रोंगटे खड़े हो जाएंगे।
मुंबई। कुछ ट्रेलर सिर्फ देखे जाते हैं — और कुछ ट्रेलर महसूस किए जाते हैं। धुरंधर: द रिवेंज का ट्रेलर दूसरी कैटेगरी में आता है। 3 मिनट 25 सेकंड की यह झलक देखते-देखते आप भूल जाते हैं कि यह सिर्फ एक फिल्म का प्रोमो है — लगता है जैसे किसी असली ऑपरेशन की फाइल आपके सामने खुल गई हो।
कहां से शुरू होती है कहानी?
पहले पार्ट में दर्शकों ने देखा था कि भारतीय खुफिया एजेंट जसकिरत सिंह रंगी किस तरह कराची में हमज़ा अली मज़ारी की पहचान लेकर पाकिस्तान के क्राइम नेटवर्क में घुसपैठ करता है। वो पूरी कहानी असली घटनाओं से प्रेरित थी — और इसीलिए उसमें एक कच्चापन था, एक सच्चाई थी जो दर्शकों को कुर्सी से बांधे रखती थी।
धुरंधर 2 वहीं से शुरू होती है जहां पहली फिल्म खत्म हुई थी। रहमान डकैत — जिसे अक्षय खन्ना ने पर्दे पर जीवंत किया था — अब नहीं रहा। और उसकी मौत के बाद पाकिस्तान के लियारी इलाके की सत्ता का खालीपन भरने के लिए हमज़ा उर्फ जसकिरत आगे आता है। लेकिन इस बार दांव सिर्फ देश की सुरक्षा का नहीं — बल्कि उस इंसान की अपनी पहचान का भी है।
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ट्रेलर में क्या-क्या दिखा?
ट्रेलर की शुरुआत से ही रणवीर सिंह का वो रूप सामने आता है जो शायद उनके करियर का सबसे खतरनाक अवतार है। लंबे बाल, घनी दाढ़ी और आंखों में एक ऐसी ठंडक जो डरा देती है — यह रणवीर नहीं, हमज़ा है। और फिर अचानक एक क्लीन शेव्ड, तेज़तर्रार चेहरा सामने आता है — यह जसकिरत है। दोनों के बीच की यह लड़ाई ही इस फिल्म की असली जान है।
एक्शन सीक्वेंस की बात करें तो डायरेक्टर आदित्य धर ने इस बार स्केल को कई गुना बड़ा किया है। गलियों में गोलीबारी, करीबी मुकाबले और विस्फोटों के बीच एक जासूस की मनोवैज्ञानिक उथल-पुथल — यह सब मिलाकर ट्रेलर को एक अलग ही ऊंचाई पर ले जाता है। बिल्कुल वैसे जैसे विक्रम बेदला में कमल हासन ने एक किरदार के भीतर कई परतें दिखाई थीं।

संजय दत्त और सारा अर्जुन
संजय दत्त का SP चौधरी असलम एक बार फिर ट्रेलर में अपनी धमाकेदार उपस्थिति दर्ज कराता है। उनकी एक-एक लाइन में जो वज़न है, वो किसी और से नहीं आ सकता। सारा अर्जुन का किरदार इस बार सिर्फ सहायक भूमिका में नहीं दिखता — हाथ में बंदूक और आंखों में दृढ़ संकल्प लिए वो भी इस लड़ाई का हिस्सा हैं।
असली घटनाओं पर आधारित — इसलिए और भी दिल को छूती है
जो बात इस फ्रैंचाइज़ी को राज़ी और शेरशाह जैसी फिल्मों की कतार में खड़ा करती है, वो यह है कि यह कहानी काल्पनिक नहीं है। भारत के वो अनजान जासूस जो दुश्मन की धरती पर जाकर अपनी जान दांव पर लगाते हैं, उनकी कहानियां कभी अखबारों में नहीं आतीं। धुरंधर उन्हीं गुमनाम नायकों को पर्दे पर आवाज़ देती है।
ट्रेलर के आखिरी सीन में रणवीर का जो भाव है — थका हुआ, टूटा हुआ लेकिन झुका नहीं — वो देखकर मन में एक ही सवाल आता है: यह आदमी आखिर में जीतेगा, या खुद को खो देगा?
जवाब के लिए 19 मार्च का इंतज़ार करना होगा।
