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‘चुनाव rigged हैं तो लड़ क्यों रहे हैं?’ Abhijeet Dipke का विपक्ष से सवाल, बोले- ‘अपनी political survival से पहले देश के बारे में सोचिए’

SIR को लेकर जारी विवाद के बीच CJP founder Abhijeet Dipke ने विपक्षी दलों से कहा है कि अगर वे वास्तव में मानते हैं कि चुनावी प्रक्रिया में गड़बड़ी हो रही है, तो उन्हें चुनाव में भागीदारी पर दोबारा विचार करना चाहिए। इससे एक दिन पहले CJP ने CEC Gyanesh Kumar के इस्तीफे की मांग करते हुए बड़े आंदोलन की चेतावनी दी थी।

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Dainik Diary Asad 2026 09 25T163759.805
SIR विवाद के बीच CJP founder Abhijeet Dipke ने विपक्षी दलों से कहा कि अगर वे चुनावी प्रक्रिया को rigged मानते हैं तो उन्हें लगातार चुनाव में भागीदारी पर भी अपना रुख स्पष्ट करना चाहिए।

Cockroach Janta Party (CJP) के founder Abhijeet Dipke ने Election Commission की Special Intensive Revision (SIR) प्रक्रिया को लेकर जारी राजनीतिक विवाद के बीच विपक्षी दलों के सामने एक नया सवाल रखा है। Dipke ने कहा है कि अगर विपक्ष वास्तव में मानता है कि चुनावों में धांधली हो रही है, तो लगातार उन्हीं चुनावों में हिस्सा लेने से उस प्रक्रिया को वैधता मिलती है।

X पर जारी एक पोस्ट में Dipke ने विपक्ष से इस मुद्दे पर स्पष्ट रुख अपनाने को कहा। हालांकि चुनावों में धांधली होने का उनका दावा एक राजनीतिक आरोप है; इसे स्वतंत्र रूप से सिद्ध तथ्य के रूप में स्थापित नहीं किया गया है। Election Commission ने अपने खिलाफ लगाए जा रहे आरोपों का अलग-अलग मौकों पर विरोध किया है।

‘Game rigged बता रहे हैं तो खेलते क्यों जा रहे हैं?’

Dipke ने अपनी पोस्ट में तर्क दिया कि विपक्ष एक तरफ चुनावी प्रक्रिया पर सवाल उठा रहा है और दूसरी तरफ लगातार चुनाव में हिस्सा भी ले रहा है।

उन्होंने लिखा, “आप यह नहीं कह सकते कि game rigged है और फिर उसी game को खेलते रहें।”

उनका कहना था कि अगर विपक्षी पार्टियां चुनावी प्रक्रिया को निष्पक्ष नहीं मानतीं, तो उनकी भागीदारी उस प्रक्रिया के स्वतंत्र और निष्पक्ष होने का “illusion” बनाए रखने में मदद करती है।

Dipke ने विपक्ष से कहा कि वह अपनी राजनीतिक मौजूदगी बचाए रखने की चिंता से आगे बढ़कर लोकतांत्रिक व्यवस्था पर अपने आरोपों के अनुरूप कोई स्पष्ट फैसला ले।

‘कैसी political survival बचा रहे हैं?’

अपने संदेश में CJP founder ने विपक्षी पार्टियों के सामने कई सवाल रखे। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष के वोट “चोरी” होने, विधायकों-सांसदों के दूसरी पार्टियों में जाने और राजनीतिक दलों में टूट जैसे मुद्दे उठते रहे हैं।

Dipke ने सवाल किया कि ऐसी स्थिति में केवल चुनाव लड़ते रहना किस तरह की political survival है।

उन्होंने यह भी कहा कि चुनावी प्रक्रिया पर सवाल केवल उन राज्यों में नहीं उठाए जाने चाहिए जहां किसी खास विपक्षी पार्टी का राजनीतिक हित जुड़ा हो। उनके मुताबिक अगर किसी पार्टी को electoral process में गड़बड़ी का संदेह है तो उसका रुख राज्यों और प्रभावित पार्टियों के आधार पर बदलना नहीं चाहिए।

ये सभी बातें Dipke के राजनीतिक दावे और तर्क हैं, न कि चुनावी गड़बड़ी के स्वतंत्र रूप से स्थापित निष्कर्ष।

विपक्ष को दिया ‘Take a stand’ का संदेश

Dipke ने विपक्षी दलों से अपनी राजनीतिक survival से पहले देश और लोकतंत्र के बारे में सोचने की अपील करते हुए कहा कि उन्हें एक स्पष्ट stand लेना चाहिए।

उनका संदेश मूल रूप से विपक्ष के सामने यह सवाल रखता है कि अगर वह Election Commission और electoral process को लेकर गंभीर आरोप लगा रहा है, तो उन आरोपों के अनुरूप उसकी राजनीतिक रणनीति क्या होनी चाहिए।

यह अपील ऐसे समय सामने आई है जब SIR और Election Commission की कार्यप्रणाली को लेकर कई विपक्षी नेताओं ने सवाल उठाए हैं।

एक दिन पहले CJP ने मांगा था CEC का इस्तीफा

Dipke का यह बयान CJP की ओर से Chief Election Commissioner Gyanesh Kumar के इस्तीफे की मांग किए जाने के एक दिन बाद आया है।

CJP ने CEC को इस्तीफे के लिए 48 घंटे का समय देने की बात कही थी और ऐसा नहीं होने पर nationwide agitation तथा ‘Jantar Mantar 2.0’ जैसे प्रदर्शन की चेतावनी दी थी।

पार्टी ने आगामी चुनावों को रोकने, SIR से पहले की electoral rolls पर लौटने और Election Commissioners की नियुक्ति से जुड़े कानून में बदलाव जैसी मांगें भी रखी हैं।

ये CJP की मांगें हैं और Election Commission ने इन्हें स्वीकार करने की कोई घोषणा नहीं की है।

Indian Express की रिपोर्ट के बाद क्यों बढ़ा विवाद?

इस विवाद को The Indian Express की हालिया investigation के बाद और हवा मिली। रिपोर्ट के मुताबिक Election Commissioners Sukhbir Singh Sandhu और Vivek Joshi ने पिछले करीब 10 महीनों में कम से कम 14 मौकों पर Election Commission के कुछ फैसलों और आदेशों को लेकर लिखित आपत्तियां दर्ज की थीं।

रिपोर्ट के अनुसार ये आपत्तियां नए मतदाताओं के registration, electoral rolls से नाम हटाने और बहाल करने तथा voter database और IT systems के control जैसे मुद्दों से जुड़ी थीं।

एक मामले में दोनों Election Commissioners ने Form 6 में SIR से जुड़े बदलावों पर भी आपत्ति जताई थी। The Indian Express के मुताबिक इन बदलावों को लेकर ‘unauthorised’ और ‘illegal’ जैसे शब्द लिखित आपत्तियों में इस्तेमाल किए गए थे।

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Election Commission का पक्ष भी अहम

हालांकि Election Commission के भीतर किसी फैसले पर मतभेद या लिखित observations सामने आना अपने आप में यह साबित नहीं करता कि चुनावों में धांधली हुई है।

The Indian Express ने अपनी investigation के लिए Election Commission और दोनों Election Commissioners से प्रतिक्रिया मांगी थी, लेकिन रिपोर्ट प्रकाशित होने तक जवाब नहीं मिला था।

वहीं SIR से जुड़े व्यापक विवाद में Election Commission लगातार इस प्रक्रिया को electoral rolls को अपडेट करने और केवल eligible voters को सूची में सुनिश्चित करने की कवायद के रूप में पेश करता रहा है।

इसलिए CJP और विपक्ष द्वारा लगाए जा रहे ‘vote theft’ या ‘rigged election’ जैसे आरोपों और Election Commission की आधिकारिक प्रक्रिया के बीच अंतर करना जरूरी है।

SIR अब सिर्फ voter list नहीं, बड़ा राजनीतिक मुद्दा

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Special Intensive Revision को लेकर शुरू हुआ विवाद अब electoral rolls की तकनीकी प्रक्रिया से आगे बढ़कर एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन चुका है।

एक तरफ विपक्षी दल Election Commission की निष्पक्षता और voter-list changes को लेकर सवाल उठा रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ चुनाव आयोग अपनी प्रक्रियाओं को कानून और निर्धारित व्यवस्था के तहत किए जाने की बात कहता रहा है।

इसी माहौल में Abhijeet Dipke ने विपक्ष से चुनाव बहिष्कार पर विचार करने की अपील कर बहस को एक अलग दिशा दी है।

अब नजर इस बात पर होगी कि प्रमुख विपक्षी दल इस सुझाव पर कोई औपचारिक प्रतिक्रिया देते हैं या चुनाव में बने रहते हुए Election Commission और SIR के खिलाफ अपना राजनीतिक तथा कानूनी विरोध जारी रखते हैं।

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