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₹2,000 से ज्यादा UPI Payment पर क्या ग्राहक को देना होगा extra पैसा? Nirmala Sitharaman ने साफ कर दिया पूरा नियम

15 अक्टूबर से चुनिंदा UPI merchant payments पर 0.4% MDR लागू होने जा रहा है। Finance Minister Nirmala Sitharaman ने साफ किया है कि यह कोई tax, cess या surcharge नहीं है और इसका बोझ ग्राहकों पर नहीं डाला जाएगा। ₹2,000 तक के merchant payments और सभी person-to-person UPI transfers पहले की तरह MDR-free रहेंगे।

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Dainik Diary Asad 2026 09 25T164536.340
Finance Minister Nirmala Sitharaman ने स्पष्ट किया कि ₹2,000 से ज्यादा के चुनिंदा UPI merchant payments पर लागू होने वाला 0.4% MDR ग्राहकों से नहीं वसूला जाएगा।

अगर आप रोजमर्रा की खरीदारी के लिए UPI का इस्तेमाल करते हैं और ₹2,000 से ज्यादा का payment करते हैं, तो नए Merchant Discount Rate (MDR) को लेकर आपके मन में भी सवाल हो सकता है—क्या अब UPI payment करते समय ग्राहक को extra charge देना होगा?

केंद्रीय वित्त मंत्री Nirmala Sitharaman ने इसे लेकर स्थिति साफ कर दी है। उनका कहना है कि चुनिंदा merchant UPI transactions पर लगने वाला MDR ग्राहक से नहीं लिया जाएगा। यह merchant-side charge होगा और इसे consumer के bill में जोड़कर पास नहीं किया जाना चाहिए।

‘यह tax नहीं, cess नहीं और surcharge भी नहीं’

PTI से बातचीत में Sitharaman ने नए charge को लेकर सबसे बड़ी गलतफहमी दूर करने की कोशिश की।

उन्होंने कहा कि MDR को सरकार द्वारा लगाया गया tax, cess या surcharge समझना गलत है। इससे मिलने वाली रकम Consolidated Fund of India में भी नहीं जाएगी।

वित्त मंत्री के मुताबिक यह digital payment ecosystem के भीतर service providers, banks और दूसरे संबंधित पक्षों के बीच का charge है। उन्होंने जोर देकर कहा कि इसे consumer पर नहीं डाला जाएगा।

₹2,000 से ज्यादा UPI payment पर क्या बदलेगा?

नए framework के तहत 15 अक्टूबर 2026 से चुनिंदा Person-to-Merchant (P2M) UPI transactions में ₹2,000 से अधिक की payment पर 0.4% MDR लागू होगा।

लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि अगर आपने दुकान पर ₹5,000 का UPI payment किया तो आपके account से MDR के नाम पर अलग से रकम काट ली जाएगी। घोषित व्यवस्था के तहत charge merchant side पर रहेगा और consumers के लिए UPI payment पर अलग transaction fee नहीं होगी।

उदाहरण के लिए, अगर किसी सामान्य merchant को ₹5,000 की qualifying UPI payment की जाती है, तो 0.4% के हिसाब से MDR ₹20 बनता है। यह processing cost merchant/payment ecosystem से जुड़ी होगी, ग्राहक के bill में MDR जोड़ने की व्यवस्था नहीं है।

किन UPI transactions पर MDR नहीं लगेगा?

नए नियम में सभी UPI transactions को charge के दायरे में नहीं लाया गया है।

₹2,000 तक के P2M transactions MDR-free रहेंगे। इसके अलावा किसी व्यक्ति द्वारा दूसरे व्यक्ति को भेजा गया Person-to-Person (P2P) UPI payment भी इस MDR के दायरे में नहीं आएगा। ₹75,000 और उससे अधिक के qualifying transactions के लिए MDR को ₹300 प्रति transaction पर cap किया गया है।

छोटे merchants के लिए भी राहत रखी गई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक जिन merchants की monthly P2M UPI receipts ₹1 लाख से कम हैं, वे इस charge से बाहर रहेंगे।

₹1,000, ₹5,000 और ₹10,000 की payment पर ग्राहक कितना देगा?

ग्राहक के नजरिए से इसे आसान तरीके से समझें।

अगर आपने ₹1,000 का सामान खरीदा और UPI से payment किया, तो ₹1,000 ही देना होगा। अगर ₹5,000 की खरीदारी है, तब भी customer-side UPI MDR के नाम पर अतिरिक्त charge नहीं होना चाहिए। इसी तरह ₹10,000 की payment में भी ग्राहक पर अलग MDR लगाने की बात नहीं है।

MDR qualifying transaction पर merchant side में calculate होगा। Finance Minister ने स्पष्ट कहा है कि इसका बोझ consumer तक नहीं पहुंचना चाहिए।

Debit-Credit Card का उदाहरण देकर Sitharaman ने समझाया

Sitharaman ने MDR को समझाने के लिए card payments का उदाहरण भी दिया।

उनका कहना था कि merchants पहले से Visa, debit और credit cards जैसे payment modes स्वीकार करते हैं, जिनमें MDR की व्यवस्था मौजूद है। सामान्य तौर पर customer को product के bill में अलग से MDR जोड़कर नहीं दिया जाता।

वित्त मंत्री ने इसी आधार पर कहा कि UPI के मामले में भी merchant-side MDR को consumer पर pass नहीं किया जाना चाहिए।

सरकार banks और traders से भी करेगी बात

सिर्फ सार्वजनिक स्पष्टीकरण ही नहीं, Finance Ministry यह सुनिश्चित करने की कोशिश भी कर रही है कि ground level पर MDR का बोझ ग्राहकों तक न पहुंचे।

रिपोर्ट्स के मुताबिक मंत्रालय Indian Banks’ Association (IBA) और traders’ organisations के साथ बातचीत करेगा। Banks को यह सुनिश्चित करने के लिए कहा जा रहा है कि merchant-side charge consumer से न वसूला जाए। Awareness campaign के जरिए नए नियम को लेकर confusion दूर करने की तैयारी भी है।

व्यापारियों में क्यों है नाराजगी?

Consumers को सीधे charge नहीं देना है, लेकिन merchants के एक हिस्से ने नए MDR का विरोध किया है। उनकी चिंता है कि high-value digital payments पर processing cost बढ़ने से उनके margins पर असर पड़ सकता है।

Prayagraj समेत कुछ जगहों पर व्यापारियों ने नए charge का विरोध किया है और आशंका जताई है कि इससे बड़े payments के लिए cash की तरफ वापसी हो सकती है। सरकार का कहना है कि ऐसी आशंकाएं उचित नहीं हैं और UPI का व्यापक इस्तेमाल जारी रहने की उम्मीद है।

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MDR पर GST का सवाल अभी चर्चा में

एक अलग सवाल यह भी है कि MDR की रकम पर GST किस तरह लागू होगा। रिपोर्ट्स के मुताबिक MDR पर 18% GST के मुद्दे की समीक्षा GST Council में हो सकती है।

हालांकि 7 अक्टूबर की GST Council meeting के औपचारिक agenda में इस पर tax-rate change का प्रस्ताव शामिल नहीं होने की रिपोर्ट है। इसलिए इस हिस्से पर अंतिम स्थिति Council के किसी फैसले के बाद ही स्पष्ट मानी जानी चाहिए।

यह समझना जरूरी है कि संभावित GST पूरे UPI transaction amount पर 18% tax नहीं है; चर्चा MDR/service charge पर लागू GST को लेकर है।

15 अक्टूबर से लागू होगा नया framework

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नया MDR framework 15 अक्टूबर 2026 से प्रभावी होना है। Standard qualifying P2M UPI transaction में ₹2,000 से ज्यादा की रकम पर 0.4% MDR लागू होगा और ₹75,000 या उससे ज्यादा की transaction पर अधिकतम MDR ₹300 रहेगा।

इसलिए आम UPI user के लिए सबसे अहम बात सीधी है—UPI बंद नहीं हो रहा, हर ₹2,000 से ज्यादा payment पर customer से 0.4% extra नहीं लिया जाएगा और P2P money transfer पर यह MDR लागू नहीं है।

नया charge मुख्य रूप से merchant-payment ecosystem से जुड़ा है। Finance Minister ने साफ कहा है कि इसे ग्राहक तक pass नहीं किया जाना चाहिए।

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