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Ishan Kishan ने समझा ‘Risk’, Vaibhav Sooryavanshi ने एक Over में 2 विकेट लेकर दिया मजेदार जवाब
Duleep Trophy quarter-final में बल्ले से केवल आठ रन बनाने वाले 15 वर्षीय Vaibhav Sooryavanshi ने left-arm spin से मैच पर अपनी छाप छोड़ी। तीन ओवर में दो विकेट लेने के बाद उन्होंने कप्तान Ishan Kishan को लेकर मजेदार खुलासा किया।
अपनी विस्फोटक बल्लेबाजी और लंबे छक्कों के लिए पहचाने जाने वाले Vaibhav Sooryavanshi ने अब गेंद से भी विपक्षी टीम को चौंका दिया है। Duleep Trophy में East Zone के लिए खेलते हुए 15 वर्षीय खिलाड़ी ने एक ही ओवर में दो विकेट लेकर यह दिखाया कि उनका खेल केवल आक्रामक बल्लेबाजी तक सीमित नहीं है।
दिलचस्प बात यह रही कि East Zone के कप्तान Ishan Kishan को Vaibhav से गेंदबाजी कराना एक जोखिम लग रहा था। लेकिन युवा खिलाड़ी ने केवल तीन ओवर में दो विकेट निकालकर कप्तान के इस tactical gamble को सफल बना दिया।
बाद में Vaibhav ने भी अपने परिचित आत्मविश्वास के साथ कहा कि Ishan को शायद यह मालूम नहीं था कि वह एक “wicket-taker” हैं। उनका यह मजेदार जवाब social media पर तेजी से चर्चा में आ गया।
बल्ले से नहीं चला Vaibhav का जादू
Bengaluru स्थित BCCI Centre of Excellence Ground 2 पर खेले गए Duleep Trophy quarter-final में East Zone का सामना North East Zone से था। इस मुकाबले में सभी की नजरें Vaibhav की बल्लेबाजी पर थीं, लेकिन उनका red-ball outing उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा।
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उन्होंने केवल छह गेंदों का सामना किया और दो चौकों की मदद से आठ रन बनाकर आउट हो गए। इतनी छोटी पारी के बाद लग रहा था कि यह मैच Vaibhav के लिए यादगार नहीं रहने वाला है। हालांकि, East Zone के दूसरे बल्लेबाजों ने टीम को मजबूत स्थिति में पहुंचा दिया।
Sudip Kumar Gharami ने 146 और Shahbaz Ahmed ने 167 रन की शानदार पारी खेली। दोनों की centuries की मदद से East Zone ने अपनी पहली पारी में 467 रन का विशाल स्कोर खड़ा किया।
North East Zone की पहली पारी केवल 111 रन पर सिमट गई। बड़े अंतर से पिछड़ने के कारण टीम को follow-on खेलना पड़ा। दूसरी पारी में भी उसके बल्लेबाज East Zone के गेंदबाजों के सामने ज्यादा देर टिक नहीं पाए।
जब विकेट नहीं मिला तो Ishan ने Vaibhav को सौंपी गेंद
North East Zone की दूसरी पारी में एक समय East Zone के गेंदबाजों को partnership तोड़ने में परेशानी हो रही थी। Regular bowlers के प्रयासों के बावजूद अपेक्षित सफलता नहीं मिल रही थी। इसी दौरान कप्तान Ishan Kishan ने occasional left-arm spinner Vaibhav को गेंद सौंपने का फैसला किया।
मैच के बाद BCCI Domestic द्वारा साझा किए गए video में Vaibhav ने बताया कि उन्हें केवल दो या तीन ओवर डालने के लिए कहा गया था। उनके मुताबिक Ishan को लग रहा था कि एक मुख्य बल्लेबाज से ऐसी स्थिति में गेंदबाजी कराना थोड़ा जोखिम भरा हो सकता है।
Vaibhav ने मजाकिया अंदाज में कहा, “उन्हें नहीं पता कि मैं wicket-taker हूं।” उनके इस आत्मविश्वास का असर मैदान पर भी दिखाई दिया।
चार गेंदों के भीतर मिले दो विकेट
Vaibhav ने अपने छोटे spell में एक ही over के अंदर दो बल्लेबाजों को pavilion भेज दिया। उन्होंने सबसे पहले 25 रन बनाकर खेल रहे Kishan Lyngdoh को हवाई शॉट खेलने के लिए मजबूर किया। बल्लेबाज गेंद को ठीक से connect नहीं कर पाए और deep field में कैच दे बैठे।
तीन गेंद बाद Vaibhav ने फिर सफलता हासिल की। Imliwati Lemtur उनकी गेंद पर बल्ला लगा बैठे और wicketkeeper Ishan Kishan ने पीछे आसान कैच पूरा किया। इस तरह जिस कप्तान को Vaibhav से गेंदबाजी कराना जोखिम लग रहा था, उसी ने उनका दूसरा विकेट पूरा करने में भूमिका निभाई।
इन दो झटकों से North East Zone का स्कोर 75/5 से 79/7 हो गया। विपक्षी टीम की बची हुई उम्मीदें भी लगभग समाप्त हो गईं। Vaibhav ने अपने तीन ओवर में केवल 11 रन दिए और दो विकेट हासिल किए। उनके spell में कोई अतिरिक्त रन भी नहीं आया। ESPNcricinfo के scorecard में East Zone की इस बड़ी जीत और Vaibhav के bowling contribution का विवरण दर्ज है।
Vaibhav ने अपनाई बेहद साधारण योजना
Vaibhav ने बताया कि उन्हें पहले से मालूम था कि शानदार प्रदर्शन करने के बावजूद शायद तीन से ज्यादा ओवर नहीं मिलेंगे। इसलिए उन्होंने ज्यादा प्रयोग करने के बजाय गेंद को लगातार एक ही क्षेत्र में डालने की कोशिश की।
उनकी योजना बल्लेबाज को असाधारण turn से चौंकाने की नहीं थी। वह सही line-length बनाए रखते हुए बल्लेबाज को गलती करने के लिए मजबूर करना चाहते थे। Red-ball cricket में patience की अहमियत होती है और Vaibhav का छोटा spell इसी बात का अच्छा उदाहरण बना।
उन्होंने मजेदार अंदाज में यह भी कहा कि यदि वह पांच विकेट भी ले लेते, तब भी शायद उन्हें केवल तीन ओवर ही मिलते। इसलिए उपलब्ध हर गेंद का सही इस्तेमाल करना जरूरी था।
NDTV Sports के अनुसार Vaibhav ने माना कि बल्ले से अच्छा प्रदर्शन नहीं होने के बाद गेंद से टीम के लिए योगदान देना उनके लिए खास अनुभव था।
बल्लेबाज को विकेट मिले तो खुशी अलग होती है
Vaibhav ने कहा कि ज्यादातर बल्लेबाजों को मौका मिलने पर गेंदबाजी करना पसंद आता है। इसी तरह कई गेंदबाज भी बल्लेबाजी का मौका मिलने पर उत्साहित होते हैं। लेकिन किसी ऐसे खिलाड़ी के लिए विकेट लेने की खुशी अलग होती है, जिसे टीम में मुख्य रूप से रन बनाने के लिए चुना गया हो।
यही कारण था कि दो विकेट लेने के बाद Vaibhav के चेहरे पर अलग तरह का उत्साह दिखाई दिया। बल्लेबाजी में केवल आठ रन बनाकर आउट होने की निराशा अब काफी हद तक पीछे छूट चुकी थी।
उन्होंने अपने छोटे spell से यह भी साबित किया कि मैच में योगदान देने का केवल एक तरीका नहीं होता। यदि किसी दिन बल्लेबाजी साथ न दे तो fielding या bowling से भी टीम के लिए उपयोगी भूमिका निभाई जा सकती है।
East Zone ने दर्ज की विशाल जीत
North East Zone की दूसरी पारी 146 रन पर समाप्त हुई। East Zone ने मुकाबला एक पारी और 210 रन के बड़े अंतर से जीतते हुए semi-final में प्रवेश किया।

दूसरी पारी में Anukul Roy ने 37 रन देकर पांच विकेट हासिल किए और विपक्षी batting order को समेटने में सबसे बड़ी भूमिका निभाई। वहीं Vaibhav ने अपने दो विकेटों से middle और lower order पर दबाव बढ़ाया।
पूरे मैच के सबसे बड़े performer Shahbaz Ahmed रहे। उन्होंने 167 रन बनाने के अलावा गेंद से भी उपयोगी योगदान दिया और Player of the Match चुने गए। हालांकि, Vaibhav का surprise spell मुकाबले के सबसे चर्चित पलों में शामिल रहा। मैच रिपोर्ट के अनुसार East Zone ने batting और bowling दोनों विभागों में North East Zone पर पूरी तरह दबदबा बनाया।
Vaibhav के खेल में जुड़ सकता है नया आयाम
Vaibhav अभी भी मुख्य रूप से एक opening batter हैं। उनकी आक्रामक बल्लेबाजी ही उनकी सबसे बड़ी पहचान रहेगी। ऐसे में केवल एक छोटे spell के आधार पर उन्हें पूर्ण all-rounder कहना जल्दबाजी होगी।
फिर भी, उनकी left-arm spin टीम के लिए अतिरिक्त विकल्प बन सकती है। लंबे domestic tournaments में ऐसा बल्लेबाज, जो जरूरत पड़ने पर कुछ नियंत्रित ओवर डाल सके, captain को playing combination और field placement में ज्यादा विकल्प देता है।
Vaibhav इससे पहले age-group cricket में भी अपनी spin bowling की झलक दिखा चुके हैं। Duleep Trophy में मिले दो विकेटों के बाद उनके First-Class career में wickets की संख्या चार हो गई है। यह आंकड़ा अभी छोटा है, लेकिन 15 वर्ष की उम्र में उनकी बहुआयामी क्षमता का संकेत जरूर देता है।
आत्मविश्वास फिर बना Vaibhav की पहचान
Vaibhav की batting में सबसे ज्यादा चर्चा उनके निडर अंदाज की होती है। वह गेंदबाज का नाम या reputation देखने के बजाय अपने shots पर भरोसा करते हैं। Ishan Kishan को लेकर दिया गया उनका “wicket-taker” वाला जवाब भी उसी आत्मविश्वास का एक नया रूप है।
इस बार उन्होंने छक्कों से नहीं, बल्कि सही जगह पर गेंद डालकर सुर्खियां बटोरीं। बल्ले से असफल होने के बाद भी उन्होंने मैच से खुद को अलग नहीं किया और मौका मिलते ही टीम के लिए योगदान दिया।
Ishan Kishan का फैसला कागज पर risk हो सकता था, लेकिन Vaibhav ने चार गेंदों के भीतर दो विकेट लेकर उसे reward में बदल दिया। यही इस मुकाबले की सबसे दिलचस्प कहानी रही—एक युवा बल्लेबाज, तीन ओवर का मौका और कप्तान को दिया गया मुस्कुराने वाला जवाब।
