Connect with us

Sports

‘Ronaldo की कहानी ने मुझे टूटने नहीं दिया…’ पिता को खोने के बाद Asmita Dey ने रचा इतिहास, जीता CWG का गोल्ड

Tripura की बेटी Asmita Dey ने Commonwealth Games में भारत के लिए जूडो का पहला स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रच दिया। उन्होंने बताया कि कठिन दौर में Cristiano Ronaldo की संघर्षभरी कहानी ने उन्हें आगे बढ़ने की प्रेरणा दी।

Published

on

Dainik Diary Asad 2026 08 04T131855.488
Commonwealth Games में ऐतिहासिक गोल्ड जीतने के बाद Asmita Dey ने कहा कि Cristiano Ronaldo की संघर्षभरी कहानी ने उन्हें मुश्किल समय में आगे बढ़ने की प्रेरणा दी।

भारतीय जूडो के इतिहास में Asmita Dey ने एक नया अध्याय जोड़ दिया है। Commonwealth Games में महिलाओं के 48 किलोग्राम वर्ग में स्वर्ण पदक जीतने वाली Asmita भारत की पहली जूडो खिलाड़ी बन गई हैं, जिन्होंने इस प्रतियोगिता में गोल्ड मेडल अपने नाम किया।

लेकिन यह उपलब्धि केवल मैट पर जीते गए मुकाबलों की कहानी नहीं है। इसके पीछे वर्षों का संघर्ष, पिता का सपना और फुटबॉल सुपरस्टार Cristiano Ronaldo से मिली प्रेरणा भी छिपी हुई है।

“Ronaldo की कहानी ने मुझे ताकत दी”

अपने ऐतिहासिक गोल्ड मेडल के बाद बातचीत में Asmita Dey ने बताया कि वह सबसे ज्यादा Cristiano Ronaldo के जीवन को पढ़ती और देखती रही हैं।

उन्होंने कहा,“मैं जिस इंसान को सबसे ज्यादा देखती और पढ़ती हूं, वह Cristiano Ronaldo हैं। उन्होंने अपनी जिंदगी में बहुत संघर्ष किया है। जब उन्होंने 19 साल की उम्र में अपने पिता को खोया, तब भी उन्होंने हार नहीं मानी और दुनिया के सर्वश्रेष्ठ फुटबॉलरों में जगह बनाई। उनकी पूरी कहानी ने मुझे हमेशा प्रेरित किया है।”

Asmita ने कहा कि Ronaldo की यही संघर्ष यात्रा उनके लिए सबसे बड़ी प्रेरणा बनी।

पिता के निधन के बाद टूट गई थीं Asmita

Asmita Dey के लिए साल 2025 बेहद कठिन रहा। उनके पिता Arjun Dey, जो Tripura में साइकिल मैकेनिक थे और प्रतिदिन लगभग 300 रुपये कमाते थे, दिसंबर 2025 में ब्रेन स्ट्रोक के कारण दुनिया से चले गए।

यह घटना Commonwealth Games के लिए उनके क्वालीफाई करने से कुछ ही दिन पहले हुई थी।

पिता के निधन के बाद Asmita ने एक समय खेल छोड़ने तक का विचार बना लिया था। लेकिन उनकी मां ने उन्हें हिम्मत दी और पिता का सपना पूरा करने के लिए दोबारा अभ्यास शुरू करने के लिए प्रेरित किया।

संघर्षों से भरा रहा बचपन

South Tripura के Belonia कस्बे में जन्मी Asmita का बचपन आर्थिक तंगी में बीता।

परिवार एक साधारण मिट्टी के घर में रहता था। सीमित आय के बावजूद उनके पिता ने हमेशा बेटी के खेल के सपने को प्राथमिकता दी।

बाद में Asmita ने Sports Authority of India के Bhopal केंद्र में प्रशिक्षण लिया और खेल कोटे के जरिए Uttar Pradesh Police में नौकरी भी हासिल की।

Golden Score में रचा इतिहास

Commonwealth Games में Asmita ने शानदार प्रदर्शन करते हुए पहले Eva Ewing और Sarah Adlington को हराया।

फाइनल में उनका मुकाबला Canada की Heidi Quach से हुआ। बेहद रोमांचक Golden Score मुकाबले में Asmita ने 2-1 (Yuko) से जीत दर्ज कर भारत के लिए ऐतिहासिक स्वर्ण पदक हासिल किया।

पिता का सपना हुआ पूरा

Dainik Diary Asad 2026 08 04T131905.877


स्वर्ण पदक जीतने के बाद पोडियम पर खड़ी Asmita के लिए यह पल खुशी और भावुकता दोनों से भरा था।

उन्होंने स्वीकार किया कि उस ऐतिहासिक पल में उन्हें अपने पिता की सबसे ज्यादा याद आई। हालांकि उनके पिता अब इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन उनका सपना पूरा कर Asmita ने उन्हें सच्ची श्रद्धांजलि दी।

Cristiano Ronaldo की संघर्ष गाथा से मिली प्रेरणा और अपने पिता के सपने को साकार करने के जुनून ने Asmita Dey को भारतीय जूडो के इतिहास में हमेशा के लिए अमर कर दिया।