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क्या Narottam Mishra को टिकट न देना BJP पर पड़ा भारी? Datia उपचुनाव की हार के बाद उठे बड़े सवाल

Datia विधानसभा उपचुनाव में BJP की हार के बाद पार्टी की उम्मीदवार चयन रणनीति पर सवाल उठ रहे हैं। कई राजनीतिक विश्लेषक पूछ रहे हैं कि अगर Narottam Mishra चुनाव लड़ते, तो क्या नतीजा अलग होता?

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Datia उपचुनाव में BJP की हार के बाद Narottam Mishra को टिकट न देने के फैसले पर राजनीतिक बहस तेज हो गई है।

Madhya Pradesh के Datia विधानसभा उपचुनाव में Bharatiya Janata Party (BJP) की हार ने पार्टी की चुनावी रणनीति पर नई बहस छेड़ दी है। Indian National Congress के उम्मीदवार Kunwar Ghanshyam Singh ने BJP के Ashutosh Tiwari को 6,016 वोटों से हराकर सीट अपने नाम कर ली।

नतीजों के बाद सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि क्या BJP ने वरिष्ठ नेता Narottam Mishra को टिकट न देकर रणनीतिक गलती की?

क्या टिकट बदलने का फैसला पड़ा भारी?

Datia लंबे समय तक Narottam Mishra का मजबूत राजनीतिक गढ़ माना जाता रहा है। उन्होंने 2008 से इस सीट का कई बार प्रतिनिधित्व किया था। हालांकि 2023 Madhya Pradesh विधानसभा चुनाव में उन्हें Congress के Rajendra Bharti से हार का सामना करना पड़ा था।

उपचुनाव में पार्टी ने Narottam Mishra की जगह Ashutosh Tiwari को उम्मीदवार बनाया। इसके बाद पार्टी के भीतर असंतोष की खबरें भी सामने आईं।

हालांकि राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि केवल उम्मीदवार बदलना हार की एकमात्र वजह नहीं माना जा सकता।

पार्टी के भीतर भी अलग-अलग राय

रिपोर्ट्स के मुताबिक, Madhya Pradesh के एक BJP विधायक का कहना है कि यदि Narottam Mishra को भी टिकट दिया जाता, तब भी पार्टी को जीत नहीं मिलती।

उनके अनुसार, इस चुनाव में कुछ सामाजिक और राजनीतिक समीकरण BJP के खिलाफ रहे, जिनका असर नतीजों पर पड़ा।

यह बयान इस बात की ओर इशारा करता है कि पार्टी के भीतर भी हार के कारणों को लेकर अलग-अलग राय मौजूद है।

टिकट कटने पर समर्थकों ने किया था विरोध

जब BJP ने Ashutosh Tiwari को उम्मीदवार घोषित किया था, तब Narottam Mishra के समर्थकों ने विरोध प्रदर्शन किया था। रिपोर्ट्स के अनुसार, उन्होंने National Highway-44 पर जाम भी लगाया था।

हालांकि Narottam Mishra ने सार्वजनिक रूप से किसी नाराजगी से इनकार किया था।

उन्होंने कहा था कि वह पार्टी के फैसले का सम्मान करते हैं और Ashutosh Tiwari की जीत सुनिश्चित करने के लिए पूरी ताकत से प्रचार करेंगे। नामांकन रैली में भी उन्होंने पार्टी में किसी बड़े आंतरिक विवाद की बात से इनकार किया था।

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क्यों हुआ था Datia उपचुनाव?

Datia सीट पर उपचुनाव इसलिए कराया गया क्योंकि Congress विधायक Rajendra Bharti की सदस्यता धोखाधड़ी से जुड़े एक मामले में दोषसिद्धि के बाद समाप्त हो गई थी।

इसके बाद Congress ने Kunwar Ghanshyam Singh को उम्मीदवार बनाया, जिन्होंने चुनाव जीतकर सीट पार्टी के पास बरकरार रखी।

Congress ने बताया बदलाव का संकेत

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परिणाम आने के बाद Jitu Patwari ने दावा किया कि Datia उपचुनाव का नतीजा Madhya Pradesh की जनता के बदलते राजनीतिक मूड का संकेत है।

उन्होंने कहा कि यह परिणाम BJP सरकार के खिलाफ जनता की नाराजगी को दर्शाता है। Patwari ने यह भी दावा किया कि यदि Narottam Mishra स्वयं चुनाव लड़ते, तब भी परिणाम अलग नहीं होता।

हार के कारणों पर मंथन शुरू

Datia उपचुनाव का परिणाम BJP के लिए केवल एक सीट की हार नहीं, बल्कि संगठन और उम्मीदवार चयन को लेकर आत्ममंथन का विषय बन गया है।

फिलहाल पार्टी की ओर से आधिकारिक रूप से यह नहीं कहा गया है कि टिकट वितरण का फैसला हार की वजह बना, लेकिन राजनीतिक गलियारों में इस मुद्दे पर चर्चा लगातार जारी है। आने वाले समय में BJP इस हार के कारणों की समीक्षा कर अपनी आगे की रणनीति तय कर सकती है।

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