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सिर्फ 2 घंटे में बेंगलुरु की कंपनी से उड़ाए ₹49 करोड़, VPN, म्यूल अकाउंट और Telegram बना ठगों का हथियार
व्हिज़डम फाइनेंस नामक फाइनेंस कंपनी के सिस्टम को हैकर्स ने सिर्फ दो घंटे में हैक कर ₹49 करोड़ ट्रांसफर कर दिए। VPN, म्यूल अकाउंट्स और Telegram की मदद से अंजाम दी गई यह हाई-टेक ठगी अब तक की सबसे बड़ी डिजिटल फ्रॉड घटनाओं में से एक मानी जा रही है।
बेंगलुरु की एक निजी फाइनेंस कंपनी Whizdm Finance पर साइबर अपराधियों ने ऐसा हमला किया कि सिर्फ दो घंटे में ₹49 करोड़ रुपये गायब हो गए। पुलिस ने इस हाई-टेक ठगी को “प्रोफेशनली एक्सीक्यूटेड इंटरनेशनल फ्रॉड” बताया है। दो आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है जबकि मुख्य मास्टरमाइंड दुबई में बैठे हैं।
दो घंटे में ₹49 करोड़ गायब
यह वारदात 6 और 7 अगस्त की रात को हुई जब हैकर्स ने कंपनी के डिजिटल सर्वर में सेंध लगाई। महज 1,782 ट्रांजैक्शंस के जरिए 656 बैंक खातों में ₹49 करोड़ ट्रांसफर कर दिए गए। कंपनी को इसका पता दो दिन बाद 9 अगस्त को मैन्युअल ऑडिट के दौरान चला।
जांच के बाद पुलिस ने इस केस में दो लोगों को गिरफ्तार किया —
- संजय पटेल (43), उदयपुर, राजस्थान
- इस्माइल राशिद अत्तर (27), बेलगावी, कर्नाटक
पुलिस ने अब तक ₹10 करोड़ बरामद कर कंपनी को लौटा दिए हैं, जबकि बाकी रकम की तलाश जारी है।

VPN और म्यूल अकाउंट्स से हुआ पूरा खेल
जांच में सामने आया कि संजय पटेल और अत्तर ने वर्चुअल प्राइवेट नेटवर्क (VPN) का इस्तेमाल कर कंपनी के बैंकिंग सर्वर को दूर से एक्सेस किया। इन लोगों ने 650 से ज्यादा म्यूल अकाउंट्स (यानी फर्जी खातों) का इस्तेमाल किया, ताकि पैसे का ट्रैक पकड़ में न आए।
संजय पटेल ने इन खातों को अलग-अलग नामों और फर्जी KYC डॉक्युमेंट्स के आधार पर खोला था।
दुबई से ऑपरेट हो रहा था पूरा नेटवर्क
इस पूरी ठगी का संचालन दुबई में बैठे दो मास्टरमाइंड कर रहे थे। उन्होंने हॉन्गकॉन्ग के हैकर्स को हायर किया था, जिनके जरिए कंपनी की API (Application Programming Interface) तक पहुंच बनाई गई।
हैकर्स ने व्हिज़डम फाइनेंस के ऐप और बैंक सिस्टम के बीच बने API लिंक का दुरुपयोग किया — यानी सिस्टम को यह विश्वास दिलाया कि असली लोन ट्रांजैक्शन हो रहा है।
Telegram पर होती थी एन्क्रिप्टेड बातचीत
पुलिस के अनुसार, आरोपी Telegram का इस्तेमाल कर रहे थे ताकि उनकी बातचीत एन्क्रिप्टेड रहे और किसी सर्वर पर रिकॉर्ड न हो सके।
साथ ही, उन्होंने अपने सर्वर हॉन्गकॉन्ग और लिथुआनिया में बनाए थे ताकि भारत की डिजिटल जांच एजेंसियों को भ्रमित किया जा सके।
पुलिस की तत्परता से बचाए गए ₹10 करोड़
डीसीपी (क्राइम–2) राजा इमाम कासिम पी के नेतृत्व में पुलिस ने तुरंत कार्रवाई की और जिन खातों में पैसे ट्रांसफर हुए थे, उनमें से कुछ को फ्रीज करवा दिया।
पुलिस कमिश्नर सीमंत कुमार सिंह ने बताया, “यह एक अंतरराष्ट्रीय साइबर फ्रॉड था, जिसे पेशेवर तरीके से अंजाम दिया गया। सिर्फ दो घंटे में ₹49 करोड़ ट्रांसफर होना बताता है कि गिरोह कितना संगठित था।”

कैसे चुनी गई कंपनी?
व्हिज़डम फाइनेंस छोटी रकम के व्यक्तिगत लोन देने वाली नॉन-बैंकिंग फाइनेंस कंपनी (NBFC) है।
हैकर्स ने इस कंपनी को इसलिए चुना क्योंकि इसका ट्रांजैक्शन मॉडल तेज और ऑटोमेटेड था। उन्होंने सिस्टम में ऐसे कोड डाले जिससे लोन डिस्बर्समेंट की तरह पैसे भेजे गए लेकिन असल में वो ठगी के खाते थे।
क्या सीख है इस घटना से?
यह मामला साफ करता है कि साइबर फ्रॉड अब सिर्फ आम लोगों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि बड़ी वित्तीय कंपनियां भी इनके निशाने पर हैं।
कंपनियों को चाहिए कि वे अपने सर्वर पर API सिक्योरिटी, VPN लॉगिंग और रियल-टाइम ट्रांजैक्शन मॉनिटरिंग जैसे टूल्स का उपयोग करें।
जांच जारी, दुबई के मास्टरमाइंड की तलाश
पुलिस ने इंटरपोल की मदद से दुबई में बैठे दोनों मास्टरमाइंड्स का लोकेशन ट्रैक करना शुरू कर दिया है। वहीं, यह भी जांच हो रही है कि क्या भारत में किसी अंदरूनी व्यक्ति ने हैकर्स को तकनीकी मदद दी थी।
यह घटना न केवल बेंगलुरु बल्कि देश के साइबर इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए चेतावनी है कि डिजिटल सुरक्षा में एक छोटी सी चूक भी करोड़ों का नुकसान कर सकती है।

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