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3 ईरानी जहाज़, 3 अलग-अलग किस्मतें एक डूबा, एक भारत में शरण में, एक श्रीलंका की कैद में
भारत की नौसैनिक मेज़बानी का मेहमान बनकर आया ईरानी युद्धपोत IRIS Dena अमेरिकी टॉरपीडो से समंदर में समा गया — और मोदी सरकार चुप रही
यह कहानी है तीन जहाज़ों की — जो एक ही मिशन पर निकले थे, एक साथ भारत के मेहमान बने थे, लेकिन जिनकी किस्मत ने तीन अलग-अलग रास्ते चुने। एक डूब गया, एक भारत के बंदरगाह में छुपा बैठा है, और एक श्रीलंका की नौसेना की हिरासत में है।
ये तीनों जहाज़ थे — IRIS Dena, IRIS Lavan और IRIS Bushehr — जो हिंद महासागर में तैनात थे और फरवरी 2026 में विशाखापट्टनम में भारतीय नौसेना द्वारा आयोजित अंतर्राष्ट्रीय फ्लीट रिव्यू और MILAN 2026 नौसैनिक अभ्यास में शामिल हुए थे।
भारत का मेहमान बनकर आया IRIS Dena — 74 देशों के साथ समुद्री शक्ति का प्रदर्शन किया। भारतीय नौसेना ने उसके आगमन का स्वागत करते हुए लिखा था कि यह “दोनों देशों के बीच गहरे सांस्कृतिक संबंधों को दर्शाता है।” लेकिन इस गर्मजोशी को महज कुछ दिन बाद एक टॉरपीडो ने ठंडा कर दिया।
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IRIS Dena: जो मेहमान घर नहीं लौट पाया
25 फरवरी को MILAN अभ्यास समाप्त होने के बाद IRIS Dena विशाखापट्टनम से ईरान के लिए रवाना हुआ। लेकिन 4 मार्च की सुबह अमेरिका की एक फास्ट-अटैक पनडुब्बी ने उसके पतवार में एक Mark 48 टॉरपीडो दाग दिया — श्रीलंका से करीब 25 मील दक्षिण में, अंतरराष्ट्रीय जल में।
जहाज़ से सुबह 5:08 बजे श्रीलंकाई समय पर एक विस्फोट की सूचना देते हुए संकट संदेश भेजा गया — लेकिन जब तक श्रीलंका नौसेना वहाँ पहुँची, जहाज़ डूब चुका था।
श्रीलंका नौसेना ने 32 नाविकों को जीवित बचाया और 87 शव बरामद कि 100 से ज़्यादा लापता हैं — वे नाविक जो कुछ दिन पहले भारत में भारतीय नौसैनिकों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े थे।
अमेरिकी रक्षा सचिव पीट हेगसेथ ने Pentagon में घोषणा की — “कल रात हमने उनके प्रिय जहाज़ ‘सुलेमानी’ को डुबो दिया।” ज्वाइंट चीफ ऑफ स्टाफ जनरल डैन केन ने कहा — “यह अमेरिका की वैश्विक पहुँच का अविश्वसनीय प्रदर्शन है। किसी दूर-दराज़ तैनात दुश्मन को ढूंढकर खत्म करना — यह सिर्फ अमेरिका ही इस पैमाने पर कर सकता है।”

IRIS Bushehr: श्रीलंका की हिरासत में
IRIS Dena के डूबने के बाद उसके साथी जहाज़ IRIS Bushehr ने कोलंबो बंदरगाह में शरण माँगी। श्रीलंका ने IRIS Bushehr के 204 नाविकों को वेलिसारा नौसेना बेस पर उतारा। सभी की मेडिकल जाँच हुई — कोई गंभीर बीमार नहीं था।
यह द्वितीय विश्व युद्ध के बाद पहली बार है जब किसी युद्धपोत को किसी तटस्थ देश में इस तरह हिरासत में लिया गया है।
IRIS Lavan: चुपचाप भारत के कोच्चि में
इस बीच सबसे शांत कहानी रही IRIS Lavan की — जो चुपचाप कोच्चि, भारत में आ टिका। भारत के एक सरकारी प्रवक्ता के अनुसार अनुरोध अमेरिका-इजरायली हमलों से ठीक पहले आया था और जहाज़ उसी दिन बंदरगाह में घुसा जिस दिन IRIS Dena डूबा। उसके 183 नाविकों को कोच्चि में भारतीय नौसेना की आवासीय सुविधाओं में रखा गया है।
भारत की चुप्पी पर उठे सवाल
मोदी ने अक्टूबर में कहा था — “भारतीय नौसेना हिंद महासागर की संरक्षक है।” लेकिन जब अपने मेहमान जहाज़ को अमेरिकी पनडुब्बी ने उसके पिछवाड़े में डुबोया, तो भारत न बचा सका, न बोल सका।
कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने तीखा सवाल किया — “इस अमेरिकी कार्रवाई के भारत के लिए भी बड़े निहितार्थ हैं और यह चौंकाने वाला है कि अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई। भारतीय सरकार इतनी डरपोक और कायर कभी नहीं दिखी।”
तीन जहाज़, तीन किस्मतें — और बीच में भारत, जो न अमेरिका को नाराज़ कर सकता है, न ईरान को। यह हिंद महासागर की राजनीति का सबसे कठिन इम्तिहान है।
