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ईरानी युद्धपोत IRIS Lavan पहुंचा Kochi — 183 नाविकों को भारत ने दी शरण, तनाव चरम पर
अमेरिकी पनडुब्बी द्वारा IRIS Dena को डुबोने के बाद भारत सरकार की मंज़ूरी से ईरानी जंगी जहाज़ Kochi बंदरगाह पर लंगर डाला, Sri Lanka में भी फंसा है IRIS Bushehr।
नई दिल्ली / Kochi। हिंद महासागर में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते टकराव की आंच अब भारत के दरवाज़े तक पहुंच गई है। भारत सरकार की अनुमति के बाद ईरानी नौसेना का जंगी जहाज़ IRIS Lavan शुक्रवार को Kerala के Kochi बंदरगाह पर डॉक हो गया। जहाज़ पर सवार 183 नाविकों को Kochi में नौसैनिक सुविधाओं में ठहराया गया है।
यह घटना उस वक्त हुई है जब कुछ ही दिन पहले एक अमेरिकी पनडुब्बी ने Sri Lanka के तट के पास हिंद महासागर में ईरानी युद्धपोत IRIS Dena को टारपीडो से डुबो दिया था। यह पूरा घटनाक्रम उस International Fleet Review के बाद का है, जिसमें हिस्सा लेने के लिए ईरान के ये जंगी जहाज़ इस इलाके में आए थे।
भारत ने कैसे लिया फैसला?
सूत्रों के मुताबिक, IRIS Dena के डूबने से पहले ही ईरान ने भारत से संपर्क किया था और IRIS Lavan को Kochi में जगह देने का अनुरोध किया था। भारत सरकार ने इस अनुरोध को मंज़ूर करते हुए जहाज़ को 4 मार्च को Kochi में डॉक करने की इजाज़त दी। AFP न्यूज़ एजेंसी के हवाले से एक सरकारी सूत्र ने बताया कि जहाज़ के 183 क्रू मेंबर्स फिलहाल Kochi की नौसैनिक सुविधाओं में हैं।
Sri Lanka में फंसा IRIS Bushehr

इधर Sri Lanka में भी एक ईरानी युद्धपोत IRIS Bushehr की स्थिति नाज़ुक है। Sri Lanka की नौसेना ने शुक्रवार को उस जहाज़ से 200 से अधिक नाविकों को किनारे पर उतारा। Sri Lanka नौसेना के प्रवक्ता Commander Buddhika Sampath ने बताया कि इन नाविकों को Colombo के पास Welisara Naval Base ले जाया गया है, जबकि 15 अन्य अभी भी जहाज़ पर मौजूद हैं।
जहाज़ में तकनीकी खराबी बताई गई है। Sri Lanka के नौसैनिक कर्मी भी मदद के लिए जहाज़ पर मौजूद हैं। Sampath के अनुसार IRIS Bushehr को अब पूर्वी Sri Lanka के Trincomalee बंदरगाह ले जाया जाएगा, जहां वह अगले आदेश तक रुकेगा।
IRIS Dena का क्या हुआ?
IRIS Dena वह ईरानी फ्रिगेट है जिसे एक अमेरिकी पनडुब्बी ने Sri Lanka के तट के निकट हिंद महासागर में टारपीडो से नष्ट कर दिया। यह घटना अमेरिका-ईरान युद्ध के सबसे सीधे और गंभीर टकरावों में से एक मानी जा रही है।
भारत की कूटनीतिक कसरत
एक तरफ अमेरिका ने भारत को रूसी तेल खरीदने की 30 दिन की छूट दी है और दूसरी तरफ भारत ने ईरानी जंगी जहाज़ को अपने बंदरगाह में जगह दी है। यह भारत की उस परंपरागत विदेश नीति का हिस्सा है जिसमें वह किसी एक गुट में शामिल हुए बिना सभी पक्षों के साथ संतुलन बनाए रखता है। लेकिन जैसे-जैसे इस युद्ध की आंच बढ़ रही है, यह संतुलन साधना आने वाले दिनों में और मुश्किल होता जाएगा।
