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Islamabad में बड़ी कूटनीतिक हलचल: US-Iran युद्ध खत्म कराने के लिए JD Vance का दौरा संभव

सीजफायर खत्म होने से पहले बातचीत की कोशिश, ट्रंप ने बढ़ाया एक दिन का समय

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JD Vance Islamabad Visit: US-Iran Peace Talks Ahead Of Ceasefire Deadline
इस्लामाबाद में संभावित US-Iran वार्ता से पहले बढ़ी कूटनीतिक हलचल

दुनिया की नजरें इस वक्त दक्षिण एशिया पर टिकी हैं, जहां अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे तनाव को खत्म करने के लिए अहम कूटनीतिक कोशिशें तेज हो गई हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका के उपराष्ट्रपति JD Vance मंगलवार को Islamabad का दौरा कर सकते हैं, जहां दोनों देशों के बीच शांति वार्ता होने की संभावना है।

यह दौरा ऐसे समय पर हो रहा है जब 8 अप्रैल को अमेरिका और ईरान के बीच हुआ दो हफ्तों का सीजफायर खत्म होने वाला है। अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने इस सीजफायर को एक दिन के लिए बढ़ाकर बुधवार तक कर दिया है, ताकि बातचीत के लिए और समय मिल सके।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, JD Vance के साथ अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल में विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और जारेड कुशनर भी शामिल हो सकते हैं। वहीं, ईरान की ओर से संसद अध्यक्ष मोहम्मद-बाकर गालिबाफ के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल के शामिल होने की संभावना जताई जा रही है।

हालांकि, हालात अब भी बेहद नाजुक बने हुए हैं। हाल ही में ओमान की खाड़ी में एक अमेरिकी युद्धपोत द्वारा ईरानी कार्गो जहाज को रोकने की घटना ने तनाव को और बढ़ा दिया है। ऐसे में यह बैठक बेहद अहम मानी जा रही है।

सूत्रों के मुताबिक, ईरान बातचीत के लिए तैयार है, लेकिन उसने साफ किया है कि जब तक अमेरिका अपनी समुद्री नाकाबंदी खत्म नहीं करता, तब तक कोई ठोस समझौता मुश्किल होगा।

JD Vance Islamabad Visit: US-Iran Peace Talks Ahead Of Ceasefire Deadline


इससे पहले 11 अप्रैल को हुई पहली बातचीत में अमेरिका ने ईरान के यूरेनियम संवर्धन (enrichment) पर 20 साल तक रोक लगाने का प्रस्ताव दिया था, जबकि ईरान ने इसे 5 साल तक सीमित करने की बात कही थी। दोनों देशों के बीच यही मतभेद अब भी बना हुआ है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह वार्ता सिर्फ युद्ध रोकने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका असर वैश्विक तेल कीमतों, व्यापार और अंतरराष्ट्रीय राजनीति पर भी पड़ेगा। उदाहरण के तौर पर, जब भी मिडिल ईस्ट में तनाव बढ़ता है, तो दुनिया भर में पेट्रोल-डीजल की कीमतें प्रभावित होती हैं।

फिलहाल, सभी की नजरें इस्लामाबाद में होने वाली संभावित बैठक पर टिकी हैं, जो आने वाले दिनों में वैश्विक हालात को बदल सकती है।