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महंगा हुआ गैस सिलेंडर तो फिर जला चूल्हा! 5.56 करोड़ लोगों ने सालभर में नहीं भरवाया LPG सिलेंडर

RTI खुलासे में सामने आई चौंकाने वाली तस्वीर, करोड़ों परिवारों ने महंगे LPG की वजह से कम कर दिया गैस का इस्तेमाल

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Dainik Diary Zaid 83

देश में बढ़ती महंगाई और मिडिल ईस्ट युद्ध के असर के बीच रसोई गैस को लेकर एक बड़ा खुलासा सामने आया है। RTI से मिली जानकारी के मुताबिक वित्त वर्ष 2025-26 में देश के 5.56 करोड़ LPG उपभोक्ताओं ने या तो एक भी गैस सिलेंडर रिफिल नहीं कराया या सिर्फ एक बार ही सिलेंडर भरवाया।

यह आंकड़े सिर्फ नंबर नहीं हैं, बल्कि उन करोड़ों परिवारों की कहानी बयान करते हैं जिनके लिए अब LPG सिलेंडर जरूरत से ज्यादा “महंगा सामान” बनता जा रहा है।

RTI कार्यकर्ता चंद्रशेखर गौर द्वारा हासिल जानकारी के अनुसार, देश की तीन बड़ी ऑयल मार्केटिंग कंपनियां — Indian Oil Corporation, Bharat Petroleum और Hindustan Petroleum — के रिकॉर्ड बताते हैं कि 3.30 करोड़ उपभोक्ताओं ने पूरे साल एक भी सिलेंडर रिफिल नहीं कराया। वहीं 2.26 करोड़ लोगों ने सिर्फ एक बार सिलेंडर भरवाया।

मिडिल ईस्ट में युद्ध के चलते LPG सप्लाई पर असर पड़ा है। कई शहरों में बुकिंग सेंटरों के बाहर लंबी कतारें देखने को मिलीं, जबकि कुछ जगहों पर ब्लैक मार्केट में सिलेंडर ऊंचे दामों पर बिकने की खबरें भी सामने आईं।

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लेकिन असली चिंता उन परिवारों की है जो गैस कनेक्शन होने के बावजूद अब फिर से पारंपरिक चूल्हे की तरफ लौट रहे हैं।

भोपाल के बंगंगा इलाके में रहने वाली सलमा बी बताती हैं कि उनके सात लोगों के परिवार में अब सिलेंडर का इस्तेमाल बहुत संभालकर किया जाता है। खाना बनाने के लिए ज्यादातर समय लकड़ी और चूल्हे का सहारा लिया जाता है ताकि खर्च कम हो सके।

इसी तरह श्यामला हिल्स इलाके की शहजादी बी कहती हैं कि पहले उन्हें गैस सब्सिडी मिल जाती थी, लेकिन अब करीब 900 रुपये से ज्यादा का सिलेंडर खरीदना मुश्किल हो गया है। उनके परिवार ने भी पिछले कई महीनों से चूल्हे पर खाना बनाना शुरू कर दिया है।

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विशेषज्ञों का मानना है कि LPG की बढ़ती कीमतों ने गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों पर सीधा असर डाला है। सरकार की उज्ज्वला योजना के जरिए करोड़ों घरों तक गैस कनेक्शन तो पहुंच गया, लेकिन अब लगातार बढ़ती कीमतें इन कनेक्शनों के इस्तेमाल को प्रभावित कर रही हैं।

ग्रामीण इलाकों में स्थिति और गंभीर बताई जा रही है, जहां कई परिवार सिर्फ त्योहारों या खास मौकों पर ही गैस सिलेंडर इस्तेमाल कर रहे हैं। रोजमर्रा के लिए वे फिर से लकड़ी, कोयला और पारंपरिक ईंधन की ओर लौटते दिख रहे हैं।

आर्थिक जानकारों का कहना है कि अगर LPG की कीमतों और सप्लाई संकट पर जल्द नियंत्रण नहीं हुआ, तो आने वाले महीनों में और ज्यादा परिवार गैस से दूरी बना सकते हैं। इसका असर सिर्फ घरेलू बजट पर नहीं बल्कि स्वास्थ्य और पर्यावरण पर भी पड़ सकता है।