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क्या राष्ट्रीय राजनीति की ओर बढ़ रहीं Mamata Banerjee? बंगाल हार के बाद बदला सियासी समीकरण
वेस्ट बंगाल में चुनावी झटके और पार्टी में बढ़ती अंदरूनी खींचतान के बीच ममता बनर्जी अब दिल्ली-केंद्रित राजनीति और INDIA गठबंधन में फिर से सक्रिय नजर आ रही हैं।
कोलकाता/नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल की राजनीति में हालिया चुनावी परिणामों के बाद मुख्यमंत्री Mamata Banerjee की रणनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। लंबे समय तक दिल्ली की राष्ट्रीय राजनीति से दूरी बनाए रखने के बाद अब ममता बनर्जी एक बार फिर INDIA गठबंधन और विपक्षी एकजुटता में सक्रिय भूमिका निभाती नजर आ रही हैं।
राजनीतिक हलकों में अब यह सवाल तेजी से उठ रहा है कि क्या ममता बनर्जी धीरे-धीरे राष्ट्रीय राजनीति की ओर कदम बढ़ा रही हैं?
दिल्ली की राजनीति में अचानक बढ़ी दिलचस्पी
हाल के महीनों में ममता बनर्जी की उपस्थिति दिल्ली में विपक्षी बैठकों में लगातार बढ़ी है। पहले जहां वे INDIA गठबंधन की बैठकों से दूरी बनाए हुए थीं, वहीं अब वे फिर से इन मंचों पर सक्रिय हो गई हैं।
राजनीतिक जानकारों के अनुसार, यह बदलाव सिर्फ राजनीतिक संयोग नहीं बल्कि एक सुनियोजित रणनीतिक पुनर्संतुलन (strategic repositioning) है।
बंगाल चुनाव के बाद बदली राजनीतिक जमीन
2026 के विधानसभा चुनावों के बाद पश्चिम बंगाल की राजनीतिक स्थिति में काफी बदलाव आया है। राज्य में टीएमसी को झटका लगा और पार्टी के भीतर असंतोष के स्वर भी तेज हुए।
कई विधायकों और नेताओं के अलग होने की खबरों ने संगठनात्मक कमजोरी को उजागर किया। वहीं, बीजेपी लगातार आक्रामक रुख अपनाए हुए है और कांग्रेस-लेफ्ट भी अपनी जमीन वापस पाने की कोशिश कर रहे हैं।
इस बहुस्तरीय दबाव ने टीएमसी नेतृत्व को एक नई राजनीतिक दिशा की ओर सोचने पर मजबूर किया है।
कांग्रेस के साथ रिश्तों में नया मोड़
चुनाव से पहले कांग्रेस और टीएमसी के बीच सीट शेयरिंग या गठबंधन को लेकर कोई ठोस सहमति नहीं बन सकी थी। लेकिन अब राजनीतिक हालात बदलते दिख रहे हैं।
सूत्रों के अनुसार, दोनों दलों के बीच संवाद धीरे-धीरे फिर से शुरू हो रहा है। यह संकेत देता है कि विपक्षी राजनीति में नई समीकरणों की जमीन तैयार हो रही है।
राष्ट्रीय मुद्दों पर फोकस क्यों?
ममता बनर्जी अब राज्य से आगे बढ़कर राष्ट्रीय मुद्दों पर सरकार को घेरने की रणनीति पर काम कर रही हैं। इनमें प्रमुख मुद्दे हैं—
- बेरोजगारी
- महंगाई
- विदेशी नीति पर सवाल
- आर्थिक अनिश्चितता
- अंतरराष्ट्रीय व्यापार समझौते
विपक्ष का मानना है कि इन मुद्दों पर संयुक्त मोर्चा बनाकर केंद्र सरकार पर दबाव बढ़ाया जा सकता है।
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“लीडर बनने की होड़” से दूरी
हालांकि पहले यह चर्चा तेज थी कि ममता बनर्जी विपक्षी गठबंधन की नेतृत्वकर्ता बनना चाहती हैं, लेकिन अब उनका रुख थोड़ा बदला हुआ नजर आता है।
फिलहाल वे खुद को समन्वयक और सहयोगी भूमिका में रखकर विपक्षी एकता को मजबूत करने पर ध्यान दे रही हैं, न कि सीधे प्रधानमंत्री पद की दावेदारी पर।
अंदरूनी चुनौतियां भी बरकरार

टीएमसी के लिए चुनौती सिर्फ बाहरी नहीं है। पार्टी के भीतर भी असंतोष और अस्थिरता की खबरें लगातार सामने आ रही हैं।
कई सांसदों और विधायकों के बीच नाराजगी की चर्चाएं हैं, जबकि कुछ नेताओं के संपर्क टूटने की खबरें भी संगठन के लिए चिंता का कारण बनी हुई हैं।
इस स्थिति में ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी खुद नेताओं से संपर्क कर संगठन को मजबूत करने की कोशिश में लगे हुए हैं।
क्या राष्ट्रीय राजनीति की ओर बढ़ रहा है कदम?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ममता बनर्जी का मौजूदा रुख पूरी तरह से डैमेज कंट्रोल और री-बैलेंसिंग स्ट्रैटेजी का हिस्सा है।
एक तरफ बंगाल में राजनीतिक दबाव है, दूसरी तरफ राष्ट्रीय स्तर पर विपक्षी एकता का अवसर। ऐसे में ममता बनर्जी दोनों मोर्चों को साधने की कोशिश कर रही हैं।

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