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TMC में बगावत की बड़ी आहट! Mamata Banerjee की करीबी Saayoni Ghosh का नाम भी विद्रोही खेमे से जुड़ा, सियासत में मचा हड़कंप
जो नेता कभी Mamata Banerjee की सबसे मुखर समर्थक थीं, अब उन्हीं के खिलाफ खड़े सांसदों के साथ जुड़ने की खबरों ने पश्चिम बंगाल की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है।
पश्चिम बंगाल की राजनीति में इन दिनों बड़ा राजनीतिक भूचाल देखने को मिल रहा है। विधानसभा चुनावों में करारी हार के बाद तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर असंतोष की खबरें लगातार सामने आ रही हैं। अब इस संकट के बीच पार्टी की चर्चित सांसद Saayoni Ghosh का नाम भी कथित विद्रोही खेमे से जुड़ने की खबरों में सामने आया है।
राजनीतिक गलियारों में इस घटनाक्रम को TMC के गठन के बाद का सबसे बड़ा आंतरिक संकट माना जा रहा है। खास बात यह है कि Saayoni Ghosh को लंबे समय से मुख्यमंत्री Mamata Banerjee की सबसे भरोसेमंद और आक्रामक नेताओं में गिना जाता रहा है।
आखिर क्या है पूरा मामला?
रिपोर्ट्स के मुताबिक लोकसभा में TMC के लगभग 20 सांसदों ने अलग संसदीय समूह बनाने की कोशिश की है। बताया जा रहा है कि इन सांसदों ने संसद में अलग पहचान बनाने और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) को समर्थन देने के संकेत दिए हैं।
इस समूह का नेतृत्व सांसद Kakoli Ghosh Dastidar कर रही हैं। राजनीतिक सूत्रों का दावा है कि Saayoni Ghosh भी अब इस खेमे के संपर्क में हैं और विद्रोही सांसदों के साथ खड़ी दिखाई दे रही हैं।
हालांकि Saayoni Ghosh की ओर से अब तक इस पूरे घटनाक्रम पर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। इसी वजह से राजनीतिक अटकलों का दौर और तेज हो गया है।
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Mamata Banerjee की करीबी मानी जाती रही हैं Saayoni
Saayoni Ghosh का नाम TMC के युवा चेहरों में शामिल रहा है। उन्हें पार्टी की युवा इकाई की जिम्मेदारी भी सौंपी गई थी। चुनाव प्रचार के दौरान वह लगातार Mamata Banerjee के समर्थन में मुखर नजर आई थीं।
उन्होंने कई मौकों पर Mamata Banerjee को राष्ट्रीय राजनीति में बड़ी भूमिका निभाने योग्य नेता बताया था। इतना ही नहीं, उन्होंने सार्वजनिक मंचों पर यह भी कहा था कि वह कभी अपनी पार्टी प्रमुख का साथ नहीं छोड़ेंगी।
यही वजह है कि उनके विद्रोही खेमे से जुड़ने की खबरें TMC कार्यकर्ताओं और राजनीतिक विश्लेषकों दोनों को चौंका रही हैं।
BJP पर हमलावर रहीं, अब बदलेगी रणनीति?

Saayoni Ghosh पिछले कुछ वर्षों में भाजपा और NDA की नीतियों की खुलकर आलोचना करती रही हैं। संसद से लेकर चुनावी मंचों तक उन्होंने कई बार भाजपा नेतृत्व पर तीखे हमले किए।
विधानसभा चुनाव परिणामों के बाद भी उन्होंने दावा किया था कि पार्टी की हार के पीछे वोटों में गड़बड़ी और अनियमितताएं जिम्मेदार थीं। ऐसे में अब अगर उनका राजनीतिक रुख बदलता है तो यह बंगाल की राजनीति में एक बड़ा मोड़ माना जाएगा।
TMC के लिए क्यों अहम है यह संकट?
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि चुनावी हार के बाद किसी भी पार्टी के सामने सबसे बड़ी चुनौती संगठन को एकजुट रखना होती है। यदि पार्टी के प्रभावशाली सांसद और नेता अलग राह चुनते हैं तो इसका असर भविष्य की रणनीति और जनाधार दोनों पर पड़ सकता है।
फिलहाल सभी की नजरें Saayoni Ghosh के अगले कदम पर टिकी हैं। जब तक उनकी ओर से कोई स्पष्ट बयान नहीं आता, तब तक यह मामला राजनीतिक चर्चाओं और अटकलों का केंद्र बना रहेगा।
पश्चिम बंगाल की राजनीति में आने वाले दिनों में यह घटनाक्रम किस दिशा में जाएगा, यह देखना बेहद दिलचस्प होगा।
