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Iran पहुंचे Mehbooba Mufti! Ayatollah Khamenei के अंतिम संस्कार में शामिल होने रवाना, Delhi Airport पर एक नेता को रोका गया
US-Israel-Iran युद्ध के बीच Khamenei की राजकीय अंतिम यात्रा में भारत से खास प्रतिनिधिमंडल शामिल, कई बड़े नाम पहुंचे Tehran
मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच एक बड़ी राजनीतिक और कूटनीतिक हलचल देखने को मिली है। People’s Democratic Party की अध्यक्ष Mehbooba Mufti गुरुवार को नई दिल्ली से Iran की राजधानी Tehran के लिए रवाना हुईं, जहां वह ईरान के दिवंगत सर्वोच्च नेता Ayatollah Ali Khamenei के राजकीय अंतिम संस्कार में शामिल होंगी।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, Mehbooba Mufti एक विशेष विमान से रवाना हुईं, जिसे ईरानी सरकार ने विदेशी मेहमानों के लिए विशेष रूप से आयोजित किया था। उनके साथ भारत सरकार की ओर से Union Minister of State for External Affairs Pabitra Margherita और Bihar Governor Lt Gen (Retd) Syed Ata Hasnain भी इस प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा हैं।
जम्मू-कश्मीर से इस प्रतिनिधिमंडल में शिया नेता Imran Ansari भी शामिल हैं। हालांकि, इस यात्रा से जुड़ा एक विवाद भी सामने आया। वरिष्ठ शिया धर्मगुरु Aga Syed Hassan Mosvi को दिल्ली एयरपोर्ट पर यात्रा की अनुमति नहीं दी गई और उनका पासपोर्ट जब्त कर लिया गया, जिससे राजनीतिक हलचल और तेज हो गई।
बताया जा रहा है कि National Conference सांसद Aga Ruhullah Mehdi और कुछ लद्दाख के नेता इस यात्रा में शामिल नहीं हुए, क्योंकि उनके पास पहले से निर्धारित क्षेत्रीय बैठकों का कार्यक्रम था।
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दरअसल, Ayatollah Ali Khamenei की मौत 28 फरवरी 2026 को Tehran में हुए संयुक्त US-Israel airstrike में हुई थी। इसके बाद सुरक्षा कारणों और युद्ध की स्थिति के चलते उनका अंतिम संस्कार कई महीनों तक टलता रहा। अब हाल ही में अमेरिका और ईरान के बीच बनी अस्थायी शांति के बाद अंतिम संस्कार की प्रक्रिया शुरू हो सकी है।
ईरान सरकार के मुताबिक अंतिम संस्कार कई चरणों में होगा। 3 जुलाई को Tehran के Imam Khomeini Grand Mosalla Complex में विदाई समारोह आयोजित किया गया, 4 जुलाई को स्मृति सभा होगी और 6 जुलाई को आधिकारिक अंतिम यात्रा निकाली जाएगी। इसके बाद Mashhad में दफनाया जाएगा।

Mehbooba Mufti ने इस निमंत्रण को भारत और ईरान के ऐतिहासिक संबंधों का प्रतीक बताते हुए कहा कि यह उनके लिए “जीवन का एक दुर्लभ सम्मान” है। उन्होंने पहले भी Khamenei की हत्या की कड़ी आलोचना की थी।
इस यात्रा को सिर्फ धार्मिक नहीं, बल्कि एक बड़े कूटनीतिक संदेश के तौर पर भी देखा जा रहा है। खासकर ऐसे समय में, जब Middle East में तनाव अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है।
