Politics
‘Vande Mataram’ पर BJP का बड़ा प्रस्ताव, पार्टी मुख्यालय पहुंचे PM Modi… Congress के 1937 वाले फैसले पर छिड़ी नई सियासी जंग
BJP ने ‘Vande Mataram’ की ऐतिहासिक विरासत और सम्मान को लेकर प्रस्ताव पारित करते हुए देशव्यापी जागरूकता अभियान का ऐलान किया है। इसके कुछ ही समय बाद PM Narendra Modi दिल्ली स्थित पार्टी मुख्यालय पहुंचे। Congress के केवल पहले दो अंतरे गाने के फैसले पर BJP ने कड़ा विरोध जताया है।
नई दिल्ली: ‘Vande Mataram’ को लेकर देश की दो प्रमुख राजनीतिक पार्टियों Bharatiya Janata Party और Indian National Congress के बीच राजनीतिक टकराव तेज हो गया है। शनिवार, 22 अगस्त को BJP ने राष्ट्रीय गीत के सम्मान और ऐतिहासिक विरासत को लेकर एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव पारित किया। इसके कुछ समय बाद प्रधानमंत्री Narendra Modi दिल्ली स्थित BJP मुख्यालय पहुंचे।
BJP का यह प्रस्ताव Congress Working Committee यानी CWC के उस हालिया फैसले के जवाब में आया है, जिसमें पार्टी ने अपने कार्यक्रमों में Vande Mataram के पहले दो अंतरे ही गाने की 1937 की व्यवस्था पर कायम रहने का फैसला किया है।
BJP ने कहा— ‘Vande Mataram के सम्मान से कोई समझौता नहीं’
BJP ने अपने प्रस्ताव में Vande Mataram को भारत का राष्ट्रीय गीत, स्वतंत्रता आंदोलन का महत्वपूर्ण मंत्र और देश की राष्ट्रीय चेतना का प्रतीक बताया है। पार्टी का कहना है कि इसके सम्मान और ऐतिहासिक विरासत से किसी तरह का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा।
BJP के राष्ट्रीय अध्यक्ष Nitin Nabin की अध्यक्षता में नई राष्ट्रीय टीम की बैठक के दौरान यह प्रस्ताव पारित किया गया। पार्टी ने Congress के फैसले की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि राजनीतिक सुविधा या तुष्टिकरण के लिए Vande Mataram के सम्मान से समझौता नहीं होना चाहिए।
Congress ने क्यों चुने सिर्फ दो अंतरे?
इस विवाद की जड़ करीब नौ दशक पुराने एक फैसले से जुड़ी है। Congress Working Committee ने 1937 में राष्ट्रीय आयोजनों में Vande Mataram के पहले दो अंतरे गाने की सिफारिश की थी। उस समय गीत के बाद के हिस्सों को लेकर कुछ मुस्लिम नेताओं की धार्मिक आपत्तियां सामने आई थीं।
अब Congress Working Committee ने 19 अगस्त 2026 को उसी पुराने रुख पर कायम रहने का फैसला किया। Congress का कहना है कि उसके कार्यक्रमों में पहले दो अंतरे ही गाए जाएंगे। पार्टी ने इस फैसले को अपनी ऐतिहासिक परंपरा से जोड़ा है।
BJP ने 1950 के फैसले और 2026 के कानून का दिया हवाला
BJP ने अपने प्रस्ताव में 24 जनवरी 1950 की Constituent Assembly घोषणा का भी उल्लेख किया है। उस समय Constituent Assembly के अध्यक्ष Rajendra Prasad ने कहा था कि स्वतंत्रता संग्राम में ऐतिहासिक भूमिका निभाने वाले Vande Mataram को Jana Gana Mana के समान सम्मान और दर्जा दिया जाएगा।
इसके अलावा BJP ने जुलाई 2026 में संसद से पारित Prevention of Insults to National Honour (Amendment) Act, 2026 का हवाला देते हुए कहा कि नए कानूनी प्रावधान Vande Mataram को भी राष्ट्रीय सम्मान से जुड़ी वैधानिक सुरक्षा प्रदान करते हैं।
BJP का तर्क है कि Congress Working Committee का कोई प्रस्ताव संवैधानिक संस्थाओं या संसद द्वारा बनाए गए कानून से ऊपर नहीं हो सकता।
देशभर में अभियान चलाएगी BJP
इस पूरे विवाद को BJP अब केवल राजनीतिक बयानबाजी तक सीमित नहीं रखना चाहती। पार्टी ने देशव्यापी जागरूकता अभियान चलाने की घोषणा की है।
अभियान के जरिए लोगों, खासकर युवाओं, तक Vande Mataram का इतिहास, अर्थ, राष्ट्रीय महत्व और स्वतंत्रता आंदोलन में उसकी भूमिका पहुंचाने की योजना है। BJP का कहना है कि वह राष्ट्रीय गीत की विरासत और सम्मान को लेकर देशभर में जागरूकता बढ़ाएगी।
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Tarun Chugh का Congress पर हमला
BJP सांसद Tarun Chugh ने Congress के फैसले पर निशाना साधते हुए कहा कि Vande Mataram गाना हर भारतीय के लिए गर्व का विषय है। उन्होंने आरोप लगाया कि Congress आज भी देश को 1930 के दशक की सोच की ओर ले जाना चाहती है।
BJP की ओर से इस मुद्दे को संविधान और राष्ट्रीय सम्मान से जोड़कर पेश किया जा रहा है, जबकि Congress इसे अपने ऐतिहासिक रुख और 1937 के फैसले की निरंतरता के रूप में देख रही है। Congress ने BJP पर राष्ट्रीय प्रतीकों से जुड़े भावनात्मक मुद्दों का राजनीतिक इस्तेमाल करने का भी आरोप लगाया है।
Biplab Kumar Deb बोले— ‘देश आगे बढ़ चुका है’

BJP सांसद Biplab Kumar Deb ने भी Congress पर हमला बोलते हुए कहा कि पार्टी अभी भी 1937 की मानसिकता में अटकी हुई है, जबकि देश काफी आगे बढ़ चुका है।
Vande Mataram को लेकर यह विवाद आने वाले दिनों में और तेज हो सकता है। एक तरफ BJP पूरे गीत की विरासत और सम्मान को लेकर राष्ट्रीय अभियान शुरू करने की तैयारी कर रही है, तो दूसरी तरफ Congress अपने 1937 के ऐतिहासिक फैसले पर कायम है।
ऐसे में करीब नौ दशक पुराना फैसला एक बार फिर 2026 की राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में आ गया है और Vande Mataram को लेकर इतिहास, कानून और राजनीति—तीनों पर नई बहस शुरू हो गई है।

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