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ईरान की जमी हुई संपत्ति लौटाने पर Trump का बड़ा बयान, बोले- “यह हमारा नहीं, उनका पैसा है”
G7 शिखर सम्मेलन के दौरान डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि किसी देश की संपत्ति हमेशा के लिए रोकना डॉलर और वैश्विक वित्तीय व्यवस्था के भरोसे को कमजोर कर सकता है।
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान की जमी हुई संपत्तियों को वापस लौटाने के मुद्दे पर बड़ा बयान दिया है। फ्रांस में आयोजित G7 Summit के दौरान पत्रकारों से बातचीत करते हुए ट्रंप ने कहा कि ईरान की जिन संपत्तियों को अमेरिका ने वर्षों पहले फ्रीज़ किया था, वे आखिरकार ईरान की ही हैं और उन्हें हमेशा के लिए रोके रखना सही नहीं होगा।
ट्रंप ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि अमेरिका ने सुरक्षा और कूटनीतिक कारणों से ईरान की बड़ी रकम को फ्रीज़ किया था, लेकिन वह पैसा अमेरिकी सरकार का नहीं है। उनके अनुसार, यदि अमेरिका किसी दूसरे देश की संपत्ति को स्थायी रूप से अपने पास रख लेता है, तो इससे दुनिया भर के देशों का अमेरिकी डॉलर और वित्तीय संस्थानों पर भरोसा कम हो सकता है।
राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि कई ऐसे देश भी हैं जिनसे अमेरिका के संबंध पूरी तरह सामान्य नहीं हैं, फिर भी वे अपनी विदेशी मुद्रा और संपत्तियां डॉलर आधारित व्यवस्था में रखते हैं। अगर उन्हें यह डर होने लगे कि किसी राजनीतिक विवाद की स्थिति में उनकी संपत्ति जब्त की जा सकती है, तो वे अमेरिकी वित्तीय प्रणाली से दूरी बना सकते हैं।
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विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप का यह बयान केवल ईरान तक सीमित नहीं है, बल्कि वैश्विक वित्तीय स्थिरता और डॉलर की विश्वसनीयता को लेकर भी एक महत्वपूर्ण संदेश देता है। अंतरराष्ट्रीय व्यापार और विदेशी निवेश काफी हद तक भरोसे पर आधारित होते हैं, और यही भरोसा अमेरिकी डॉलर को दुनिया की प्रमुख रिजर्व मुद्रा बनाए हुए है।

इस बीच अमेरिका और ईरान के बीच रिश्तों में नरमी के संकेत भी देखने को मिले हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन के बीच एक 14-सूत्रीय समझौता ज्ञापन (MoU) पर सहमति बनी है। इस पहल का उद्देश्य दोनों देशों के बीच तनाव कम करना, Hormuz Strait में सामान्य गतिविधियां बहाल करना और प्रतिबंधों तथा ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर आगे की बातचीत का रास्ता खोलना है।
यदि आगामी 60 दिनों के भीतर बातचीत सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ती है, तो यह पश्चिम एशिया की राजनीति और वैश्विक ऊर्जा बाजार दोनों के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो सकता है।
