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Trump का अल्टीमेटम — “Iran से कोई डील नहीं, सिर्फ बिना शर्त आत्मसमर्पण!” और फिर बोले — ‘MIGA’
युद्ध के सातवें दिन Trump ने साफ कर दिया — Tehran को घुटने टेकने होंगे, नया नेता चुनना होगा, तब जाकर होगा Iran का “महान भविष्य”। Khamenei की मौत के बाद Pezeshkian संभाल रहे हैं कमान।
Washington / Tehran। US-Iran युद्ध के सातवें दिन राष्ट्रपति Donald Trump ने अपना रुख एकदम साफ कर दिया — Iran के साथ कोई समझौता नहीं होगा, जब तक वह “बिना शर्त आत्मसमर्पण” नहीं करता। और इसके बाद? Trump ने एक नया नारा दे दिया — “Make Iran Great Again” यानी MIGA।
Trump ने अपने Truth Social अकाउंट पर लिखा, “Iran के साथ कोई डील नहीं होगी, सिवाय बिना शर्त आत्मसमर्पण के! उसके बाद, और एक महान व स्वीकार्य नेता या नेताओं के चुनाव के बाद, हम और हमारे साहसी सहयोगी Iran को तबाही के कगार से वापस लाने के लिए अथक मेहनत करेंगे — उसे आर्थिक रूप से पहले से कहीं बड़ा, बेहतर और मज़बूत बनाएंगे।”
उन्होंने आगे लिखा — “IRAN WILL HAVE A GREAT FUTURE. MAKE IRAN GREAT AGAIN (MIGA!)” — यह वही अंदाज़ है जो Trump ने अपने “Make America Great Again” नारे के साथ दुनिया को दिया था। लेकिन इस बार निशाने पर एक ऐसा देश है जिसके साथ अमेरिका इस वक्त युद्धरत है।
Trump चाहते हैं Iran का नया सुप्रीम लीडर भी
गुरुवार को Reuters को दिए एक फोन इंटरव्यू में Trump ने कहा था कि वह Iran के नए सर्वोच्च नेता के चुनाव में भी भूमिका चाहते हैं। यह बयान इसलिए और अहम है क्योंकि युद्ध के पहले ही दिन Iran के सर्वोच्च नेता Ayatollah Ali Khamenei मारे जा चुके हैं। अब Iran के राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian उस पैनल का हिस्सा हैं जो Khamenei की ज़िम्मेदारियां संभाल रहा है।
Iran का जवाब — मध्यस्थता करो, लेकिन सही पते पर

इधर Pezeshkian ने शुक्रवार को X पर पोस्ट करते हुए कहा कि कुछ देशों ने मध्यस्थता की कोशिशें शुरू की हैं — हालांकि उन्होंने इन देशों के नाम नहीं बताए। उन्होंने कहा कि Iran स्थायी शांति चाहता है, लेकिन मध्यस्थता का असली पता वे लोग हैं जिन्होंने यह संघर्ष भड़काया।
यह ध्यान देने वाली बात है कि Iran की व्यवस्था में राष्ट्रपति, सर्वोच्च नेता से नीचे होता है — लेकिन Khamenei की मौत के बाद Pezeshkian अब उस पैनल में हैं जो सर्वोच्च नेता की भूमिका निभा रहा है।
MIGA — मज़ाक या रणनीति?
Trump का “MIGA” वाला बयान दुनिया भर में चर्चा का विषय बन गया है। कुछ इसे Trump की विशिष्ट शैली का हिस्सा मान रहे हैं — पहले दुश्मन को तबाह करो, फिर “दोस्त” बनने का ऑफर दो। लेकिन Tehran के लिए यह संदेश अभी बेमानी है — जब राजधानी पर बम गिर रहे हों, तो “महान भविष्य” की बातें खोखली लगती हैं।
सवाल यह है कि क्या Iran उन शर्तों पर आत्मसमर्पण करेगा जो Trump ने रखी हैं? और क्या दुनिया के वे गुमनाम देश जो मध्यस्थता की कोशिश कर रहे हैं, इस जंग को रोकने में कामयाब होंगे?
