Connect with us

World News

US-Iran War: “बस एक शब्द और एक लाइन पर अटका मामला”, अमेरिका का बड़ा दावा; Trump ने फिर दी न्यूक्लियर चेतावनी

ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर बढ़ा तनाव, अमेरिका बोला- समझौता बेहद करीब लेकिन अभी बाकी है आखिरी सहमति

Published

on

Dainik Diary Zaid 77
अमेरिका और ईरान के बीच परमाणु विवाद पर बढ़ी हलचल, ट्रंप ने फिर संवर्धित यूरेनियम को लेकर दी चेतावनी।

अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनावपूर्ण माहौल के बीच अब एक नया बयान सामने आया है, जिसने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि दोनों देशों के बीच युद्ध और परमाणु विवाद को लेकर मतभेद अब “सिर्फ एक शब्द और एक वाक्य” तक सीमित रह गए हैं।

इस बयान के बाद यह माना जा रहा है कि लंबे समय से चल रही बातचीत किसी निर्णायक मोड़ की तरफ बढ़ सकती है। हालांकि, हालात अभी भी पूरी तरह सामान्य नहीं हैं और दोनों देशों के बीच अविश्वास बरकरार है।

अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने एक बार फिर ईरान को लेकर सख्त रुख अपनाया है। उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि ईरान को अपना एनरिच्ड यूरेनियम अमेरिका को सौंप देना चाहिए ताकि उसे नष्ट किया जा सके। ट्रंप ने यह भी कहा कि अगर ईरान चाहे तो अंतरराष्ट्रीय निगरानी में अपने ही देश में इस संवर्धित यूरेनियम को खत्म कर सकता है।

ट्रंप लंबे समय से यह कहते रहे हैं कि उनका सबसे बड़ा लक्ष्य ईरान को परमाणु हथियार विकसित करने से रोकना है। दूसरी तरफ ईरान लगातार इन आरोपों को खारिज करता आया है और उसका कहना है कि उसका परमाणु कार्यक्रम केवल शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए है।

और भी पढ़ें : क्या इंसानों से बेहतर लड़ेंगे AI फाइटर जेट? अमेरिकी वायुसेना की चेतावनी ने बढ़ाई दुनिया की चिंता

विशेषज्ञों का मानना है कि हालिया बयानबाज़ी यह संकेत देती है कि पर्दे के पीछे कूटनीतिक बातचीत जारी है। अमेरिकी अधिकारियों के “एक शब्द और एक वाक्य” वाले बयान ने यह साफ कर दिया है कि दोनों देशों के बीच समझौते की संभावनाएं अभी खत्म नहीं हुई हैं।

लेकिन इसी बीच मिडिल ईस्ट में सैन्य गतिविधियां भी लगातार बढ़ रही हैं। अमेरिका पहले ही ईरान से जुड़े ठिकानों पर “सेल्फ-डिफेंस स्ट्राइक” कर चुका है, जबकि ईरान भी अमेरिकी दबाव के आगे झुकने के संकेत नहीं दे रहा। यही वजह है कि सीज़फायर की स्थिति बेहद नाजुक बनी हुई है।

Dainik Diary Zaid 76


राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि अगर बातचीत सफल होती है, तो यह मिडिल ईस्ट के लिए बड़ी राहत साबित हो सकती है। लेकिन अगर समझौता टूटता है, तो हालात और ज्यादा गंभीर हो सकते हैं, जिसका असर वैश्विक तेल बाजार, अंतरराष्ट्रीय व्यापार और सुरक्षा पर पड़ सकता है।

भारत समेत कई देशों की नजरें अब अमेरिका और ईरान के अगले कदम पर टिकी हुई हैं। खासकर इसलिए क्योंकि मिडिल ईस्ट में बढ़ता तनाव सीधे पेट्रोल-डीजल की कीमतों और वैश्विक अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर सकता है।

फिलहाल दुनिया इंतजार कर रही है उस “एक शब्द और एक वाक्य” का, जो या तो शांति का रास्ता खोलेगा या फिर नए संघर्ष की शुरुआत कर सकता है।