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पहले प्रयास में AIR 3 हासिल करने वाले CA टॉपर बकुल गुप्ता की सफलता की कहानी – “Zero Distractions, Full Focus ही था मेरा मंत्र”
राजस्थान के खैरथल-तिजारा के रहने वाले 21 वर्षीय बकुल गुप्ता ने पहले ही प्रयास में CA फाइनल में ऑल इंडिया रैंक 3 हासिल की — जानिए उनकी तैयारी, चुनौतियाँ, और सफलता का राज।
कहते हैं, “जहाँ दृढ़ निश्चय होता है, वहाँ सफलता खुद रास्ता बनाती है।” इस कहावत को सच कर दिखाया है राजस्थान के खैरथल-तिजारा जिले के रहने वाले 21 वर्षीय बकुल गुप्ता ने, जिन्होंने चार्टर्ड अकाउंटेंसी (CA) फाइनल परीक्षा में ऑल इंडिया रैंक 3 (AIR 3) हासिल की — वो भी पहले ही प्रयास में।
जब ICAI के अध्यक्ष ने उन्हें कॉल कर यह खुशखबरी दी, तो बकुल को यकीन ही नहीं हुआ कि उनका वर्षों पुराना सपना अब साकार हो चुका है।
बिजनेस और रॉकेट इंजीनियरिंग में से चुना CA का रास्ता
बकुल के पिता एक व्यापारी हैं, जबकि वे खुद बचपन से ही पढ़ाई में अव्वल रहे हैं। उन्होंने हाई स्कूल और इंटरमीडिएट दोनों में 95% से अधिक अंक हासिल किए।
शुरुआत में वे रॉकेट इंजीनियरिंग और बिजनेस फाइनेंस दोनों में रुचि रखते थे, लेकिन उन्होंने कहा —
“मैंने कॉमर्स और बिजनेस स्टडीज़ इसलिए चुनी ताकि मैं असली व्यापारिक दुनिया को समझ सकूं। मेरे माता-पिता और शिक्षकों ने मुझे CA बनने के लिए प्रेरित किया।”

तैयारी का अनोखा तरीका: “Consistency is the key”
बकुल ने अपने आर्टिकलशिप के साथ-साथ ही सभी कोचिंग क्लास पूरी कर ली थीं, ताकि स्टडी लीव के दौरान पूरी तरह से रिवीजन पर ध्यान दे सकें।
उन्होंने बताया —
“मैंने परीक्षा से पहले छहों विषयों की कम से कम तीन बार पुनरावृत्ति की। पिछले वर्षों के प्रश्नपत्रों और मॉक टेस्ट हल कर पैटर्न समझा और टाइम मैनेजमेंट पर फोकस किया।”
हालांकि उन्होंने कोई कठोर शेड्यूल नहीं बनाया, लेकिन रोजाना कम से कम 10 घंटे पढ़ाई जरूर की।
“मैं रोज हर विषय का एक-एक टॉपिक जरूर पढ़ता था,” उन्होंने कहा।
सबसे कठिन विषय — ऑडिट
जब उनसे पूछा गया कि कौन-सा विषय सबसे कठिन था, तो बकुल ने बताया —
“ऑडिट मेरे लिए सबसे चुनौतीपूर्ण था क्योंकि यह पूरी तरह थ्योरी पर आधारित है। इसके अलावा डायरेक्ट और इनडायरेक्ट टैक्स के पेपर भी कठिन थे, क्योंकि उनमें प्रावधानों को समझकर लागू करना पड़ता है।”
इन चुनौतियों से निपटने के लिए उन्होंने कठिन विषयों की 3-4 बार रिवीजन की और अंतिम दिनों में उन्हें अतिरिक्त समय दिया।
बर्नआउट से निपटने का तरीका
लगातार पढ़ाई के चलते कभी-कभी बकुल थक जाते थे, लेकिन उन्होंने खुद को संभालने का तरीका ढूंढ लिया।
“मैं तनाव महसूस करता था तो YouTube पर कुछ हल्का देख लेता था, या माता-पिता से बात करता था, या फिर शतरंज खेल लेता था,” उन्होंने मुस्कुराते हुए बताया।

दिलचस्प बात यह है कि बकुल सोशल मीडिया से पूरी तरह दूर रहते हैं — उनका कोई Instagram या Facebook अकाउंट नहीं है।
वे कहते हैं — “डिस्ट्रैक्शन से दूर रहना ही मेरी सबसे बड़ी ताकत रही।”
सफलता का मंत्र — “Leave the uncontrollables to God”
बकुल का लाइफ मंत्र बेहद सरल लेकिन प्रभावशाली है —
“जो आपके कंट्रोल में है, उसे पूरी निष्ठा से करें, बाकी ईश्वर पर छोड़ दें।”
अगर वे CA नहीं बनते, तो कानून की पढ़ाई कर हाई कोर्ट या सुप्रीम कोर्ट में वकालत करने का सपना रखते थे।
भावी योजनाएँ और सलाह
फिलहाल बकुल अपनी भविष्य की योजनाओं पर विचार कर रहे हैं और जल्द ही अपने ड्रीम जॉब की ओर कदम बढ़ाने वाले हैं।
उन्होंने भावी CA विद्यार्थियों को सलाह दी —
“Consistency बनाए रखें और अपनी मेहनत पर भरोसा रखें, बाकी सब अपने आप हो जाएगा।”
बकुल गुप्ता की यह सफलता न केवल उनके परिवार के लिए गर्व का पल है, बल्कि हर उस छात्र के लिए प्रेरणा है जो “Zero Distraction” के साथ बड़ा सपना देखता है।
