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Bobby Deol की ‘Bandar’ ने उठाए न्याय व्यवस्था पर सवाल, दमदार अभिनय के बावजूद उलझी हुई लगी कहानी
Anurag Kashyap की जेल-ड्रामा फिल्म में Bobby Deol ने दिखाया अलग अंदाज, लेकिन कमजोर लेखन और असंतुलित किरदारों पर उठे सवाल
क्या एक आरोप किसी इंसान की पूरी जिंदगी बदल सकता है? ‘Bandar’ इसी सवाल के इर्द-गिर्द घूमती है
Mumbai: Bollywood अभिनेता Bobby Deol अपनी नई फिल्म Bandar के साथ एक बार फिर गंभीर और चुनौतीपूर्ण किरदार में नजर आए हैं। निर्देशक Anurag Kashyap की यह फिल्म सिर्फ एक जेल-ड्रामा नहीं, बल्कि न्याय व्यवस्था, सामाजिक धारणा और मीडिया ट्रायल जैसे संवेदनशील मुद्दों को भी छूने की कोशिश करती है।
फिल्म की कहानी Samar Mehra नाम के एक अभिनेता के इर्द-गिर्द घूमती है, जिसकी जिंदगी तब पूरी तरह बदल जाती है जब उस पर एक पूर्व प्रेमिका द्वारा गंभीर आरोप लगाए जाते हैं। एक सफल लेकिन संघर्ष कर रहे कलाकार से जेल के कैदी तक का उसका सफर फिल्म का मुख्य आधार बनता है।
जेल की सलाखों के पीछे की कड़वी दुनिया
Bandar दर्शकों को ऐसी जेल व्यवस्था के भीतर ले जाती है, जहां विचाराधीन कैदियों की जिंदगी बेहद कठिन दिखाई गई है। यहां कानून की प्रक्रिया खुद सजा जैसी महसूस होती है। फिल्म यह दिखाने की कोशिश करती है कि किसी व्यक्ति पर आरोप लगते ही समाज, मीडिया और व्यवस्था किस तरह उसके खिलाफ खड़ी हो जाती है।
Samar के लिए सबसे बड़ी चुनौती सिर्फ जेल में रहना नहीं, बल्कि अपनी बेगुनाही साबित करने की कोशिश भी है। हर कदम पर उसे ऐसे हालात का सामना करना पड़ता है जहां सच और झूठ की सीमाएं धुंधली होती नजर आती हैं।
Bobby Deol का दमदार प्रदर्शन
फिल्म की सबसे मजबूत कड़ी Bobby Deol का अभिनय माना जा रहा है। उन्होंने एक ऐसे व्यक्ति की मानसिक स्थिति को प्रभावशाली ढंग से पर्दे पर उतारा है, जो लगातार टूटता है लेकिन हार नहीं मानता।
उनके चेहरे के भाव, संवादों की गंभीरता और भावनात्मक संघर्ष दर्शकों को किरदार से जोड़ने में सफल रहते हैं। कई दृश्यों में Bobby Deol फिल्म को अपने कंधों पर संभालते हुए दिखाई देते हैं।
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कहानी में दिखी कुछ कमजोरियां
जहां फिल्म का विषय मजबूत है, वहीं इसकी कहानी कई जगह उलझी हुई महसूस होती है। खासकर महिला किरदारों को जिस तरह लिखा गया है, उस पर सवाल उठ सकते हैं।
फिल्म कुछ महत्वपूर्ण मुद्दों को उठाती जरूर है, लेकिन कई बार उनके जवाब देने से बचती हुई नजर आती है। यही वजह है कि दर्शकों को कहानी के कुछ हिस्से अधूरे या भ्रमित करने वाले लग सकते हैं।
जेल की दुनिया को दिखाने की कोशिश

फिल्म में जेल के भीतर की सत्ता, हिंसा, गुटबाजी और मानसिक दबाव को विस्तार से दिखाया गया है। कैदियों के बीच बनने वाले रिश्ते, डर और जीवित रहने की जद्दोजहद कहानी को अलग रंग देते हैं।
सहायक कलाकारों ने भी अपने किरदारों में जान डालने की कोशिश की है। कई नए और अनुभवी कलाकारों की मौजूदगी फिल्म के माहौल को वास्तविक बनाने में मदद करती है।
क्या देखनी चाहिए ‘Bandar’?
अगर आप ऐसी फिल्मों के शौकीन हैं जो मनोरंजन के साथ सामाजिक और कानूनी सवाल भी उठाती हैं, तो Bandar आपके लिए दिलचस्प साबित हो सकती है। हालांकि यह कोई आसान या हल्की-फुल्की फिल्म नहीं है।
फिल्म का विषय गंभीर है और इसकी गति भी कई जगह धीमी महसूस हो सकती है। बावजूद इसके, Bobby Deol का अभिनय और फिल्म द्वारा उठाए गए सवाल दर्शकों को सोचने पर मजबूर करते हैं।
कुल मिलाकर, Bandar एक ऐसी फिल्म है जो न्याय व्यवस्था और समाज के रवैये पर बहस छेड़ती है, लेकिन अपनी कहानी को पूरी तरह संतुलित ढंग से पेश करने में कुछ हद तक चूक जाती है।

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