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चेतेश्वर पुजारा का संन्यास गाबा के शेर और भारत की दूसरी दीवार की 5 महान पारियां

चेतेश्वर पुजारा ने क्रिकेट के सभी प्रारूपों को कहा अलविदा, गाबा से मेलबर्न तक खेलीं यादगार पारियां

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चेतेश्वर पुजारा का संन्यास भारत की दूसरी दीवार की टॉप 5 यादगार टेस्ट पारियां
चेतेश्वर पुजारा गाबा में चोट खाते हुए भी डटे रहे, भारत की दूसरी दीवार को सलाम

भारतीय क्रिकेट के भरोसेमंद बल्लेबाज चेतेश्वर पुजारा ने आखिरकार क्रिकेट के सभी प्रारूपों से संन्यास की घोषणा कर दी। सोशल मीडिया पर भावुक संदेश लिखते हुए पुजारा ने कहा कि भारतीय जर्सी पहनना और राष्ट्रगान के साथ मैदान पर उतरना उनके जीवन का सबसे बड़ा गर्व रहा। उन्होंने बीसीसीआई, सौराष्ट्र क्रिकेट एसोसिएशन और उन सभी घरेलू और विदेशी टीमों का आभार जताया जिनके लिए उन्होंने खेला।

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पुजारा को अक्सर टीम इंडिया की दूसरी ‘दीवार’ कहा जाता रहा है। राहुल द्रविड़ के संन्यास के बाद उन्होंने नंबर 3 बल्लेबाज के रूप में भारतीय क्रिकेट में वह जगह संभाली, जिसे भरना आसान नहीं था। 2010 में अपने करियर की शुरुआत करने वाले पुजारा ने 103 टेस्ट मैच खेले और 43.60 की औसत से 7,195 रन बनाए। उनके नाम 19 शतक और 35 अर्धशतक दर्ज हैं, जिसमें तीन दोहरे शतक भी शामिल हैं।

पुजारा की 5 महान पारियां

  1. 206 बनाम इंग्लैंड, अहमदाबाद (2012)* – राहुल द्रविड़ के संन्यास के बाद यह पारी पुजारा की क्षमता का पहला बड़ा सबूत बनी। उन्होंने नाबाद दोहरा शतक जड़कर टीम इंडिया को ठोस जीत दिलाई।
  2. 204 बनाम ऑस्ट्रेलिया, हैदराबाद (2013) – ऑस्ट्रेलियाई गेंदबाजों के सामने पुजारा का क्लासिक अंदाज दिखा। 370 गेंदों पर खेली गई यह पारी भारतीय क्रिकेट के बेहतरीन प्रदर्शनों में गिनी जाती है।
  3. 153 बनाम साउथ अफ्रीका, जोहान्सबर्ग (2013) – विदेशी पिचों पर संघर्ष करती टीम इंडिया के लिए यह पारी ऐतिहासिक रही। उनके 153 रनों ने साबित कर दिया कि वह सिर्फ घरेलू नहीं, बल्कि विदेश में भी टीम की रीढ़ हैं।
  4. 145 बनाम श्रीलंका, कोलंबो (2015) – कठिन परिस्थितियों में टीम इंडिया के लिए पारी संभालने का पुजारा का अंदाज एक बार फिर सामने आया। इस शतक से उन्होंने भारत को जीत दिलाने में अहम योगदान दिया।
  5. 106 बनाम ऑस्ट्रेलिया, मेलबर्न (2018) – बॉक्सिंग डे टेस्ट में जड़ा गया यह शतक ऐतिहासिक रहा। इस पारी ने भारत को सीरीज में बढ़त दिलाई और विदेशी सरजमीं पर टीम इंडिया की जीत की राह आसान की।

और कैसे कोई भूल सकता है 56 रन बनाम ऑस्ट्रेलिया, गाबा (2021) की पारी। इस पारी में पुजारा ने अपने शरीर पर कई चोटें खाईं लेकिन डटे रहे। उनकी इस जुझारू बल्लेबाजी ने भारत को गाबा में ऐतिहासिक जीत दिलाने में नींव का काम किया।

पुजारा और सहनशीलता का रिकॉर्ड

पुजारा न सिर्फ रन बनाने के लिए बल्कि गेंदबाजों को थकाने की कला के लिए भी मशहूर रहे। टेस्ट क्रिकेट में किसी भारतीय बल्लेबाज द्वारा एक पारी में सबसे ज्यादा गेंदें खेलने का रिकॉर्ड भी उन्हीं के नाम है — 525 गेंदें बनाम ऑस्ट्रेलिया। इस सूची में राहुल द्रविड़ (495 बनाम पाकिस्तान) और नवजोत सिंह सिद्धू (491 बनाम वेस्टइंडीज) जैसे दिग्गज शामिल हैं।

करियर का अंत और नई शुरुआत

पिछले एक साल से पुजारा कमेंट्री में हाथ आजमा रहे हैं और क्रिकेट विशेषज्ञ मानते हैं कि मैदान पर उनकी शांत सोच और तकनीक का अनुभव उन्हें एक बेहतरीन विश्लेषक बनाएगा। उनके संन्यास ने भारतीय क्रिकेट में एक खालीपन जरूर छोड़ दिया है, लेकिन उनकी पारियां और योगदान हमेशा फैंस की यादों में जिंदा रहेंगे।

चेतेश्वर पुजारा ने दिखाया कि क्रिकेट सिर्फ आक्रामकता से नहीं, बल्कि धैर्य और जज्बे से भी जीता जा सकता है। वह हमेशा भारत की ‘दूसरी दीवार’ के रूप में याद किए जाएंगे।

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