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Politics

क्या भारत में विपक्ष का सबसे बुरा दौर चल रहा है? Uddhav Thackeray से लेकर Mamata Banerjee तक उठे बगावत के सवाल

Shiv Sena (UBT) और TMC में अंदरूनी संकट, SP-BSP समेत कई क्षेत्रीय दलों की कमजोरी—क्या बदल रहा है भारत का राजनीतिक संतुलन?

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Shiv Sena (UBT), TMC और अन्य क्षेत्रीय दलों में बढ़ते अंदरूनी संकट ने भारतीय राजनीति में विपक्ष की स्थिति पर सवाल खड़े किए।

भारत की राजनीति एक बार फिर बड़े बदलाव के दौर से गुजरती नजर आ रही है। एक तरफ BJP का राष्ट्रीय स्तर पर मजबूत विस्तार है, तो दूसरी तरफ कई क्षेत्रीय दल अपने ही अस्तित्व और नेतृत्व संकट से जूझते दिखाई दे रहे हैं। हालिया घटनाएं, खासकर Shiv Sena (UBT) और Trinamool Congress में उठे अंदरूनी विद्रोह, इस सवाल को और गहरा कर रहे हैं—क्या यह भारत में विपक्ष का सबसे कठिन समय है?

Uddhav Thackeray की शिवसेना: लगातार टूटता आधार

महाराष्ट्र की राजनीति में बड़ा झटका तब लगा जब Uddhav Thackeray के नेतृत्व वाली शिवसेना (UBT) से छह सांसदों के टूटकर Eknath Shinde गुट में शामिल होने की खबर सामने आई।

Uddhav Thackeray, जिन्होंने 2019 में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री पद तक का सफर तय किया था, आज अपनी ही पार्टी की बिखरती संरचना को संभालने की कोशिश कर रहे हैं। 2022 की बगावत ने पहले ही पार्टी को दो हिस्सों में बांट दिया था, जिसमें चुनाव चिन्ह और संगठनात्मक नियंत्रण तक Shinde गुट के पास चला गया।

Mayawati और BSP: एक युग का अंत?

उत्तर प्रदेश की राजनीति की सबसे प्रभावशाली हस्तियों में रहीं Mayawati की पार्टी Bahujan Samaj Party भी लगातार गिरावट का सामना कर रही है।

2007 में पूर्ण बहुमत की सरकार बनाने के बाद BSP का ग्राफ धीरे-धीरे नीचे आया, और 2014 व 2019 में पार्टी लोकसभा में लगभग अप्रासंगिक हो गई। दलित वोट बैंक में BJP की पैठ ने BSP की राजनीतिक जमीन को और कमजोर कर दिया।

Sharad Pawar बनाम परिवार की राजनीति

महाराष्ट्र में ही एक और बड़ा राजनीतिक झटका Sharad Pawar को तब लगा जब 2023 में उनके भतीजे Ajit Pawar ने NCP में विभाजन कर दिया।

इस टूट ने न सिर्फ पार्टी को कमजोर किया बल्कि Sharad Pawar को एक ‘पावर ब्रोकिंग’ नेता से बदलकर एक ‘लीगेसी फिगर’ में बदल दिया।

Mehbooba Mufti और Article 370 के बाद का संकट

जम्मू-कश्मीर की राजनीति में Mehbooba Mufti और उनकी पार्टी Jammu and Kashmir Peoples Democratic Party 2019 के बाद गंभीर राजनीतिक संकट में है।

Article 370 हटने के बाद घाटी की राजनीतिक संरचना बदल गई और PDP का प्रभाव तेजी से घटा।

और भी पढ़ें : TMC में बगावत पर Kalyan Banerjee का पलटवार, बोले- ‘जो जाना चाहते हैं जाएं, BJP भी नहीं अपनाएगी’

Mamata Banerjee और TMC का अंदरूनी संकट

पश्चिम बंगाल में Mamata Banerjee के नेतृत्व वाली TMC में हाल ही में अंदरूनी बगावत की खबरों ने राजनीतिक हलचल बढ़ा दी है।

कुछ नेताओं द्वारा खुद को “real TMC” घोषित करने जैसी घटनाएं पार्टी के भीतर नेतृत्व केंद्रीकरण और असंतोष की ओर इशारा करती हैं।

Akhilesh Yadav और SP की दोहरी चुनौती

Akhilesh Yadav के नेतृत्व वाली समाजवादी पार्टी 2024 में भले ही मजबूत वापसी करती दिखी हो, लेकिन उत्तर प्रदेश की सत्ता से दूरी अभी भी कायम है।

Lalu Prasad Yadav और RJD का बदलता दौर

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बिहार की राजनीति में Lalu Prasad Yadav का प्रभाव अब सीमित हो चुका है, जबकि पार्टी की जिम्मेदारी अब Tejashwi Yadav के कंधों पर है।क्या सच में विपक्ष संकट में है?

इन सभी उदाहरणों से यह स्पष्ट है कि कई क्षेत्रीय दल नेतृत्व संकट, पारिवारिक विवाद और संगठनात्मक टूट का सामना कर रहे हैं। हालांकि कुछ दल अब भी अपने राज्यों में मजबूत बने हुए हैं, लेकिन राष्ट्रीय स्तर पर विपक्ष की स्थिति लगातार चुनौतीपूर्ण होती जा रही है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह दौर केवल संकट नहीं, बल्कि भारतीय राजनीति के पुनर्गठन (re-alignment) का भी संकेत है।

अब सवाल यह है कि क्या विपक्ष इन चुनौतियों से उबरकर फिर से मजबूत विकल्प बन पाएगा या भारतीय राजनीति का संतुलन हमेशा के लिए बदल चुका है।