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“‘लोगों को ‘चींटी’ कहना संविधान के खिलाफ’… Supreme Court के Justice Ujjal Bhuyan ने न्यायपालिका की पारदर्शिता पर उठाए बड़े सवाल”
Justice Ujjal Bhuyan ने Judicial Transparency Index रिपोर्ट जारी होने के दौरान कहा कि न्यायाधीशों की नियुक्ति प्रक्रिया अधिक पारदर्शी होनी चाहिए, ताकि असंवैधानिक सोच रखने वाले लोग न्यायपालिका में प्रवेश न कर सकें।
Supreme Court of India के न्यायाधीश Justice Ujjal Bhuyan ने न्यायपालिका में पारदर्शिता की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि न्यायाधीशों की नियुक्ति प्रक्रिया में अधिक खुलापन होना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि नियुक्तियों को लेकर पर्याप्त सार्वजनिक चर्चा और कारण सामने नहीं आते, तो ऐसे लोग भी न्यायपालिका का हिस्सा बन सकते हैं जो किसी समुदाय या लोगों को “चींटी (ants)” जैसे शब्दों से संबोधित करें और फिर भी जवाबदेही से बच जाएं।
उन्होंने ऐसे बयानों को “पूरी तरह असंवैधानिक” करार दिया।
Judicial Transparency Index कार्यक्रम में रखा पक्ष
Justice Ujjal Bhuyan ने New Delhi के India International Centre (IIC) में Vidhi Centre for Legal Policy द्वारा आयोजित कार्यक्रम में यह टिप्पणी की। इस दौरान “Judicial Transparency Index” नामक रिपोर्ट भी जारी की गई।
रिपोर्ट में Supreme Court और देश के 25 High Courts द्वारा सार्वजनिक रूप से उपलब्ध कराई जाने वाली सूचनाओं का विश्लेषण किया गया। इसमें अदालत की कार्यवाही, प्रशासनिक प्रक्रियाओं और न्यायाधीशों की नियुक्तियों से जुड़ी जानकारी का आकलन शामिल था।
नियुक्ति प्रक्रिया पर सार्वजनिक चर्चा की वकालत
अपने संबोधन में Justice Bhuyan ने कहा कि न्यायाधीशों की नियुक्ति से पहले उनके बारे में कुछ सार्वजनिक चर्चा होना लोकतंत्र के लिए नुकसानदायक नहीं, बल्कि फायदेमंद होगा।
उन्होंने कहा कि नागरिकों को यह जानने का अधिकार है कि उनके न्यायाधीश कौन होंगे, उन्होंने पहले कौन-कौन से फैसले दिए हैं और उनकी न्यायिक सोच क्या रही है। उनके अनुसार ऐसी जानकारी सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध होनी चाहिए।
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Collegium प्रणाली की गोपनीयता पर सवाल
Justice Bhuyan ने Supreme Court Collegium की कार्यप्रणाली में मौजूद गोपनीयता पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि न्यायाधीशों की नियुक्ति और तबादले से जुड़े विचार-विमर्श पूरी तरह गोपनीय रहते हैं और कई बार किसी नाम को अस्वीकार या लंबित रखने के पीछे के कारण सार्वजनिक नहीं किए जाते।
उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि वर्ष 2025 की कुछ Collegium सिफारिशों में कारणों का स्पष्ट उल्लेख नहीं किया गया, जबकि पहले जारी कई प्रस्तावों में विस्तृत वजहें बताई जाती थीं।

RTI और जवाबदेही का किया जिक्र
अपने भाषण में Justice Bhuyan ने उस संवैधानिक फैसले का भी उल्लेख किया, जिसके तहत Chief Justice of India के कार्यालय को Right to Information Act के दायरे में लाया गया था।
उन्होंने कहा कि न्यायपालिका की स्वतंत्रता बेहद महत्वपूर्ण है, लेकिन इसे जवाबदेही से बचने का माध्यम नहीं बनाया जा सकता। उनके अनुसार पारदर्शिता और न्यायिक स्वतंत्रता दोनों साथ-साथ चल सकती हैं।
खुली अदालतों की भावना नियुक्तियों में भी दिखनी चाहिए
Justice Bhuyan ने कहा कि अदालतों ने हाल के वर्षों में लाइव स्ट्रीमिंग और अन्य माध्यमों से न्यायिक कार्यवाही को अधिक पारदर्शी बनाया है, लेकिन न्यायाधीशों की नियुक्ति जैसी संस्थागत प्रक्रियाओं में अभी भी उतनी पारदर्शिता दिखाई नहीं देती।
उन्होंने जोर देकर कहा कि अगर न्यायपालिका जनता का विश्वास और मजबूत करना चाहती है, तो नियुक्ति प्रक्रिया में भी अधिक खुलापन और जवाबदेही जरूरी है।
