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“‘शांति, मध्यस्थता और कानून एक-दूसरे के विरोधी नहीं’… CJI Surya Kant ने Jaipur से दुनिया को दिया बड़ा संदेश”
Commonwealth Peace, Mediation and Rule of Law Conference के उद्घाटन पर Chief Justice of India Surya Kant ने कहा कि स्थायी शांति अदालतों से ज्यादा संवाद और मध्यस्थता के जरिए हासिल होती है।
Chief Justice of India Justice Surya Kant ने Jaipur में आयोजित Commonwealth Peace, Mediation and Rule of Law Conference के उद्घाटन अवसर पर शांति, मध्यस्थता और कानून के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि ये तीनों एक-दूसरे के विरोधी नहीं, बल्कि एक-दूसरे के पूरक हैं।
उन्होंने कहा कि अक्सर यह धारणा बनाई जाती है कि शांति और कानून अलग-अलग दुनिया की अवधारणाएं हैं, जबकि वास्तविकता इससे बिल्कुल अलग है।
“शांति कानून की सबसे बड़ी उपलब्धि है”
अपने संबोधन में Justice Surya Kant ने कहा कि शांति केवल संघर्ष का अभाव नहीं होती, बल्कि यह कानून की सबसे बड़ी उपलब्धि भी है।
उन्होंने कहा कि किसी विवाद का स्थायी समाधान केवल कानूनी लड़ाई से नहीं, बल्कि संवाद, विश्वास और सहमति से भी संभव है। यही कारण है कि मध्यस्थता (Mediation) आज भी न्याय व्यवस्था का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बनी हुई है।
Gram Panchayat की परंपरा का किया जिक्र
CJI Surya Kant ने भारत की प्राचीन Gram Panchayat व्यवस्था का उल्लेख करते हुए कहा कि औपचारिक न्यायिक संस्थाओं के विकसित होने से बहुत पहले गांवों में विवादों का समाधान आपसी सहमति और मध्यस्थता के जरिए किया जाता था।
उन्होंने कहा कि उस समय न वकील होते थे और न ही औपचारिक अदालतें, फिर भी लोग बातचीत और समझौते के माध्यम से विवाद सुलझा लेते थे।
उनके अनुसार, आज भी एक सफल मध्यस्थ की सबसे बड़ी जिम्मेदारी सभी पक्षों को धैर्यपूर्वक सुनना और विश्वास का माहौल बनाना है।
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“हर आवाज़ को मिलना चाहिए सम्मान”
Justice Surya Kant ने कहा कि मध्यस्थता का मूल सिद्धांत यह है कि किसी भी पक्ष की आवाज दूसरे पर हावी नहीं होनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि हर व्यक्ति को अपनी बात रखने का समान अवसर मिलना चाहिए और हर दृष्टिकोण को सम्मान के साथ सुना जाना चाहिए। इसी प्रक्रिया से स्थायी और न्यायपूर्ण समाधान निकलता है।
Jaipur की ऐतिहासिक विरासत की सराहना
अपने भाषण में Justice Surya Kant ने Jaipur को इस सम्मेलन के लिए उपयुक्त स्थान बताते हुए कहा कि यह शहर संतुलन, सामाजिक समरसता और समावेशी शासन के सिद्धांतों पर बसाया गया था।

उन्होंने कहा कि Jaipur की योजना इस तरह बनाई गई थी कि शहर का कोई भी हिस्सा दूसरे हिस्से पर हावी न हो। यही दर्शन मध्यस्थता की भावना को भी दर्शाता है, जहां हर पक्ष को बराबरी का महत्व दिया जाता है।
CM Bhajan Lal Sharma ने भी रखे विचार
कार्यक्रम में Bhajan Lal Sharma ने कहा कि लंबे समय तक चलने वाले मुकदमे लोगों का समय, धन और संसाधन खर्च कर देते हैं, जबकि मध्यस्थता कम समय में व्यावहारिक और स्थायी समाधान प्रदान करती है।
उन्होंने बताया कि Rajasthan में भी वैकल्पिक विवाद समाधान (Alternative Dispute Resolution) को बढ़ावा देने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।
52 देशों के विशेषज्ञ हुए शामिल
इस तीन दिवसीय सम्मेलन में 52 Commonwealth देशों के मध्यस्थ, न्यायविद, कानूनी विशेषज्ञ, शिक्षाविद और नीति-निर्माता हिस्सा ले रहे हैं।
इस कार्यक्रम का आयोजन Rajasthan State Legal Services Authority (RSLSA), Supreme Court Bar Association (SCBA), Commonwealth Lawyers Association (CLA) और Nivaaran के संयुक्त तत्वावधान में किया गया है। सम्मेलन का समापन रविवार को होगा।
