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“मैं टीम के लिए इतना ज़रूरी नहीं हूं” KL Rahul ने रिटायरमेंट और ज़िंदगी को लेकर खोला दिल
पिता बनने के बाद बदली सोच, क्रिकेट से आगे परिवार और जीवन को बताया सबसे अहम
भारतीय क्रिकेट टीम के भरोसेमंद बल्लेबाज़ केएल राहुल अक्सर अपने खेल को लेकर चर्चा में रहते हैं, लेकिन इस बार वजह उनका बल्ला नहीं बल्कि उनके शब्द हैं। हाल ही में एक बातचीत के दौरान राहुल ने अपनी ज़िंदगी, क्रिकेट करियर और भविष्य को लेकर ऐसी बातें कहीं, जिन्होंने फैंस को सोचने पर मजबूर कर दिया।
पूर्व इंग्लैंड कप्तान केविन पीटरसन के यूट्यूब शो The Switch पर बातचीत करते हुए केएल राहुल ने बेहद ईमानदारी से स्वीकार किया कि वह खुद को टीम इंडिया के लिए “अपरिहार्य” नहीं मानते। उनका कहना था कि क्रिकेट भारत में उनसे पहले भी था और उनके बाद भी चलता रहेगा।
बचपन से क्रिकेट तक का सफर
राहुल ने बताया कि क्रिकेट उनके लिए कभी शोहरत या भीड़ की वजह नहीं बना। यह खेल उनके जीवन का हिस्सा अपने आप बन गया। बचपन में घर के पुरुष सदस्य जब भी इकट्ठा होते, क्रिकेट खेला जाता था। उनके पिता गेंदबाज़ी करते और राहुल घंटों बल्लेबाज़ी करते रहते।
उनके शब्दों में, क्रिकेट शायद उनकी किस्मत में लिखा था।
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“मैं खुद को सुपरस्टार नहीं मानता”
आज जब केएल राहुल देश के बड़े क्रिकेट चेहरों में गिने जाते हैं, तब भी वह खुद को सुपरस्टार कहे जाने पर असहज महसूस करते हैं। उन्हें मिलने वाली तारीफ कई बार अजीब लगती है। राहुल मानते हैं कि क्रिकेट ने उन्हें बहुत कुछ दिया है और इसी वजह से वह समाज को कुछ लौटाने की कोशिश भी करते हैं।
उनकी फाउंडेशन के ज़रिए वह ऐसे लोगों की मदद करते हैं, जिन्हें सही मार्गदर्शन और अवसरों की ज़रूरत होती है।

रिटायरमेंट पर साफ सोच
रिटायरमेंट के सवाल पर राहुल का जवाब बेहद सुलझा हुआ था। उनका कहना है कि अगर इंसान खुद से ईमानदार रहे, तो संन्यास का फैसला मुश्किल नहीं होता।
जब समय आएगा, तब उसे स्वीकार कर लेना चाहिए। इंजरी से उबरना सिर्फ शरीर की नहीं बल्कि दिमाग की भी लड़ाई होती है, और खिलाड़ी को यह समझना होता है कि कब रुकना सही है।
पिता बनने के बाद बदली प्राथमिकताएं
केएल राहुल ने खुलासा किया कि पिता बनने के बाद उनकी सोच में बड़ा बदलाव आया है। अब वह खुद को याद दिलाते हैं कि वह टीम के लिए सबसे ज़रूरी खिलाड़ी नहीं हैं।
उनका मानना है कि क्रिकेट से भी ज़्यादा ज़रूरी चीज़ें ज़िंदगी में होती हैं—परिवार, बच्चे और अपनों के साथ बिताया समय। यही वजह है कि आज वह मैदान के बाहर की ज़िंदगी को भी उतनी ही अहमियत देते हैं।
केएल राहुल के ये शब्द दिखाते हैं कि चमक-धमक से दूर, एक खिलाड़ी के भीतर कितना सादा और संतुलित इंसान छुपा होता है। शायद यही सोच उन्हें न सिर्फ बेहतर खिलाड़ी बनाती है, बल्कि एक बेहतर इंसान भी।
